पुराने दिग्गजों की साख दांव पर, मची रार

 बिना इंटरव्यू दिए नहीं बन सकेंगे प्रवक्ता
भोपाल। प्रदेश कांग्रेस में प्रवक्ताओं के चयन को लेकर शुरू हुई नई कवायद ने पार्टी के भीतर सियासी भूचाल ला दिया है। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के नेतृत्व में शुरू हुए ‘टैलेंट हंट कार्यक्रम ने उन अनुभवी चेहरों की पेशानी बढ़ा दी हैं, जो पिछले एक दशक से टीवी डिबेट्स और मंचों पर कांग्रेस का झंडा बुलंद कर रहे थे। अब नियम साफ है पार्टी का प्रवक्ता वही बनेगा, जो संगठन की इंटरव्यू में पास होगा।
पार्टी के भीतर सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि जो नेता करीब 8 से 10 साल से प्रवक्ता की जिम्मेदारी निभा रहे हैं, उन्हें भी नए उम्मीदवारों की तरह लाइन में लगकर अपनी क्षमता साबित करनी होगी। सूत्रों के मुताबिक, इस फैसले से वरिष्ठ प्रवक्ताओं में गहरा असंतोष है। उनका तर्क है कि सालों के अनुभव और विपरीत परिस्थितियों में पार्टी का पक्ष रखने के बावजूद उन्हें नए रंगरूटों की तरह इंटरव्यू देना पड़ रहा है, जो उनकी राजनैतिक साख पर सवाल खड़ा करता है।
इस तरह होगा प्रवक्ता का चयन
संगठन सृजन अभियान के तहत शुरू हुई इस प्रक्रिया का खाका बेहद विस्तृत है। पार्टी सूत्रों के अनुसार प्रदेश स्तर पर करीब 20 मुख्य प्रवक्ताओं और मीडिया पैनलिस्ट का चयन होगा। जिला और मंडल स्तर पर भी दो-दो प्रवक्ताओं की नियुक्ति की जाएगी।  कांग्रेस नेतृत्व का कहना है कि प्रवक्ताओं के चयन की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और योग्यता आधारित होगी। टैलेंट हंट के जरिए हम उन ऊर्जावान और सक्रिय लोगों को आगे लाना चाहते हैं, जो जमीनी मुद्दों पर पार्टी का प्रभावी प्रतिनिधित्व कर सकें।
पुराने नेताओं में बढ़ रही नाराजगी
हालांकि कोई भी नेता खुलकर बोलने को तैयार नहीं है, लेकिन दबी जुबान में इसे अपमानजनक बताया जा रहा है। वरिष्ठों का मानना है कि अनुभव का कोई विकल्प नहीं होता और महज एक इंटरव्यू किसी की सालों की निष्ठा और वाकपटुता का पैमाना नहीं हो सकता। वहीं, दूसरी ओर युवा कार्यकर्ताओं में इस फैसले को लेकर खासा उत्साह है, उन्हें लगता है कि इस फिल्टर से गुटबाजी खत्म होगी और केवल काबिल चेहरों को ही माइक थामने का मौका मिलेगा।

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