भोपाल-विदिशा समेत 9 जिलों में नहीं खुले खाते
भोपाल।प्रदेश में शराब दुकानों के समूहों के ई-टेंडर और ऑक्शन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। पहले राउंड के दूसरे बैच में प्रदेश के आबकारी विभाग को मिला-जुला असर ही देखने को मिला है। कुल 306 समूहों में से 131 समूहों के लिए ठेकेदारों ने रुचि दिखाई है, जिससे सरकार को कुल आरक्षित मूल्य का लगभग 35 प्रतिशत राजस्व मिलना तय हो गया है। हालांकि, राजधानी भोपाल समेत 9 जिले ऐसे रहे जहाँ शराब सिंडिकेट ने टेंडर से पूरी तरह दूरी बनाए रखी।
आंकड़ों के लिहाज से देखें तो दूसरे बैच में प्रतिस्पर्धा और उत्साह की कमी साफ नजर आई। 306 कुल समूहों में से विभाग को 131 समूहों के प्रस्ताव मिले हैं। इनमें 479 ठेकेदार ष्शामिल हैं। ठेकों का कुल आरक्षित मूल्य 6597 करोड़ 31 लाख रखा गया, जिसमें से 2360 करोड़ 7 लाख रूपए के प्रस्ताव मिले हैं। प्रदेश के सात जिलों में सरकार को अच्छी सफलता मिली है, जहां शत-प्रतिशत आरक्षित मूल्य पर ठेके आवंटित हुए हैं। इनमें अशोकनगर, खरगोन, नर्मदापुरम, सीहोर, सीधी, उमरिया और मंडला शामिल हैं।
नौ जिलों में ठेकेदारों ने नहीं लगाई बोली
हैरानी की बात यह रही कि प्रदेश के 9 जिलों में एक भी ठेकेदार बोली लगाने आगे नहीं आया। भोपाल जिले में 7 समूह, विदिशा जिले में 5 समूह, कटनी जिले में 5, पन्ना जिले में 3, झाबुआ जिले में 3, आगर मालवा जिले में 3, अनूपपुर जिले में 2, हरदा जिले में 2 और मऊगंज जिले में 1 में विभाग का खाता तक नहीं खुल सका। पाँच जिलों में ठेकेदारों ने बेहद कम दिलचस्पी दिखाई और आरक्षित मूल्य से 10 फीसदी से भी कम बढ़ोतरी पर टेंडर आए हैं। इनमें शाजापुर जिले में 9.98 फीसदी,रतलाम जिले में 4.54 फीसदी, राजगढ़ जिले में 4.45 फीसदी, उज्जैन जिले में 4.08 फीसदी और छिंदवाड़ा जिले में 3.46 फीसदी हैं। छिंदवाड़ा में 8 समूहों का रिजर्व प्राइज 173 करोड़ था, लेकिन केवल एक प्रस्ताव 6 करोड़ 2 लाख का आया। इसी तरह उज्जैन में 9 समूहों के 180 करोड़ 25 लाख के रिजर्व प्राइज के विरुद्ध मात्र 10 करोड़ 95 लाख का ही ऑफर प्राप्त हुआ।