अभिनेत्री तापसी पन्नू ने अपनी आगामी फिल्म अस्सी की रिलीज से पहले फिल्म उद्योग की मौजूदा स्थिति को लेकर चिंता जताई है. तापसी का कहना है कि अस्सी जैसी लीक से हटकर और सामाजिक मुद्दों पर आधारित फिल्में अब “विलुप्त प्रजाति” बनने की कगार पर हैं. यह फिल्म 20 फरवरी को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है और इसके जरिए तापसी तीसरी बार निर्देशक अनुभव सिन्हा के साथ काम कर रही हैं. इससे पहले दोनों मुल्क और थप्पड़ जैसी चर्चित फिल्मों में साथ नजर आ चुके हैं.
अस्सी एक गंभीर सामाजिक ड्रामा है, जिसमें तापसी एक वकील की भूमिका निभा रही हैं जो एक क्रूर दुष्कर्म मामले में पीड़िता के लिए न्याय की लड़ाई लड़ती है. फिल्म का विषय संवेदनशील और यथार्थवादी है, जिसे लेकर तापसी का मानना है कि आज के दौर में ऐसी कहानियों को बनाना और दर्शकों तक पहुंचाना लगातार मुश्किल होता जा रहा है.
समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में तापसी ने कहा कि मुख्यधारा के व्यावसायिक सिनेमा का एक तयशुदा ढांचा बन चुका है और अस्सी जैसी फिल्में उस ढांचे में फिट नहीं बैठतीं. उनके मुताबिक, “हम विलुप्त होने की कगार पर हैं, हमारा मतलब अस्सी जैसी फिल्मों से है. एक खास टेम्पलेट है जिसे तथाकथित कमर्शियल सिनेमा फॉलो करता है और हम उस टेम्पलेट में पारंपरिक रूप से फिट नहीं बैठते.”
तापसी ने ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को लेकर भी खुलकर बात की. उन्होंने कहा कि आम धारणा यह है कि अगर ऐसी फिल्में सिनेमाघरों में ज्यादा नहीं चलतीं तो वे ओटीटी पर अपनी जगह बना लेंगी, लेकिन वास्तविकता इससे अलग है. उनके अनुसार, ओटीटी प्लेटफॉर्म भी अब उन्हीं फिल्मों को प्राथमिकता दे रहे हैं जो सिनेमाघरों में अच्छा प्रदर्शन कर चुकी हों. “ओटीटी प्लेटफॉर्म्स भी ऐसी फिल्मों को नहीं चाहते. उनके स्पष्ट निर्देश होते हैं कि वही फिल्में उठाई जाएं जो थिएटर में काम कर चुकी हों,” तापसी ने कहा.
अभिनेत्री ने यह भी जोड़ा कि ओटीटी प्लेटफॉर्म्स का लक्ष्य बड़े पैमाने पर दर्शकों को जोड़ना है, खासकर उन दर्शकों को जो बड़े व्यावसायिक मनोरंजन से आकर्षित होते हैं. उनका मानना है कि प्लेटफॉर्म्स थिएटर में सफल ‘मास’ फिल्मों के दर्शकों को अपने सब्सक्रिप्शन मॉडल से जोड़ना चाहते हैं. ऐसे में छोटे बजट और गंभीर विषयों वाली फिल्मों के लिए स्पेस सीमित होता जा रहा है.
तापसी ने दर्शकों से भी अपील की कि यदि वे अच्छी और जमीनी कहानियों वाली फिल्मों को देखना चाहते हैं तो उन्हें सिनेमाघरों में जाकर समर्थन देना होगा. उन्होंने कहा, “घर बैठकर ओटीटी पर देखना अच्छा सिनेमा सपोर्ट करने का तरीका नहीं है. अगर आपको फिल्म पसंद आती है तो उसका प्रचार करें, लोगों को थिएटर तक आने के लिए प्रेरित करें.” उनका मानना है कि दर्शकों की सक्रिय भागीदारी ही ऐसे सिनेमा को जीवित रख सकती है.
फिल्म अस्सी में तापसी पन्नू के अलावा मनोज पाहवा, कुमुद मिश्रा, कानी कुसरुति, मोहम्मद जीशान अय्यूब, सुप्रिया पाठक, रेवती और नसीरुद्दीन शाह जैसे सशक्त कलाकार भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे. मजबूत कलाकारों की मौजूदगी और सामाजिक मुद्दे पर आधारित कहानी को लेकर फिल्म पहले ही चर्चा में है.
फिल्म उद्योग में कंटेंट और कमर्शियल संतुलन पर चल रही बहस के बीच तापसी का यह बयान महत्वपूर्ण माना जा रहा है. एक ओर जहां बड़े बजट की एक्शन और फ्रेंचाइजी फिल्मों का दबदबा है, वहीं दूसरी ओर यथार्थवादी और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी फिल्मों के लिए चुनौतियां बढ़ती दिख रही हैं. अब देखना होगा कि 20 फरवरी को रिलीज के बाद अस्सी दर्शकों का कितना समर्थन हासिल कर पाती है और क्या यह तापसी की आशंकाओं को गलत साबित कर पाएगी या नहीं.