राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को ओबीसी आरक्षण 14 से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने और ओबीसी अभ्यर्थियों के 13 प्रतिशत रोके गए पदों को लेकर शिवम गौतम एवं अन्य बनाम मध्य प्रदेश शासन के मामले में सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा अभी तक कोई अंतिम आदेश पारित नहीं किया गया। राज्य सरकार स्वयं ट्रांसफर याचिका के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट आई थी, इसलिए इन मामलों को पुनः हाईकोर्ट को भेजना उचित होगा। साथ ही हाई कोर्ट को निर्देश दिए कि दो माह के भीतर निराकरण करे।
13 प्रतिशत पदों पर रोक और ओबीसी महासभा का रुख
याचिकाकर्ता और ओबीसी महासभा की राष्ट्रीय कोर कमेटी सदस्य लोकेंद्र गुर्जर ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने 13 प्रतिशत पदों पर रोक हटाने या किसी अंतरिम आदेश पर विशेष टिप्पणी या निर्देश देने से इन्कार कर दिया। एडिशनल सालिसिटर जनरल केएम नटराज ने न्यायालय को बताया कि राज्य सरकार मामलों को पुनः हाईकोर्ट भेजे जाने के पक्ष में है। इसके बाद न्यायालय ने यह व्यवस्था दी।
हाई कोर्ट को दो माह की समय-सीमा में देना होगा निर्णय
आज भले ही ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) अभ्यर्थियों को तत्काल राहत नहीं मिली, लेकिन लंबे समय से चला आ रहा गतिरोध समाप्त हुआ है। हाई कोर्ट को दो माह की समय-सीमा में अंतिम निर्णय देना होगा। गुर्जर ने कहा कि निर्धारित समय-सीमा में न्याय नहीं मिला, तो समाज लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करने को बाध्य होगा।