चार साल की सेवा अवधि समाप्त होने पर भी बने रहेंगे अध्यक्ष और सदस्य

भोपाल। प्रदेश के 31 जिलों में संचालित जिला उपभोक्ता प्रतितोषण आयोगों के अध्यक्षों और सदस्यों के कार्यकाल को लेकर महत्वपूर्ण स्थिति स्पष्ट हुई है। उच्चतम न्यायालय के एक हालिया फैसले के बाद अब राज्य के 8 अध्यक्ष और 11 सदस्य अपनी 4 साल की सेवा अवधि पूरी करने के बावजूद पद पर बने रहेंगे।
सामान्य नियमों के अनुसार, इन पदों पर नियुक्ति 4 वर्ष के कार्यकाल या 65 वर्ष की आयु (जो भी पहले हो) के लिए की जाती थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट द्वारा सिविल अपील (गनेश कुमार राजेश्वर राव सेलुकर बनाम महेन्द्र भास्कर लिमये) में 21 मई 2025 को दिए गए आदेश ने इस व्यवस्था में बदलाव कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि राज्य एवं जिला आयोगों में वर्तमान में कार्यरत ऐसे पदाधिकारी, जिनकी सेवा शर्तें पूरी हो रही हैं, उन्हें तब तक पद से मुक्त नहीं किया जाएगा जब तक भारत सरकार द्वारा अधिसूचित नवीन नियमों के तहत भर्ती प्रक्रिया पूर्ण नहीं हो जाती।
इस आदेश का लाभ केवल उन्हीं पदाधिकारियों को मिलेगा जिनका 4 वर्ष का कार्यकाल पूरा हो चुका है,  जो अभी 65 वर्ष की अधिकतम आयु सीमा तक नहीं पहुंचे हैं,  वे तब तक कार्य करते रहेंगे जब तक नई भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती या वे 65 वर्ष के नहीं हो जाते।  इस निर्णय से उपभोक्ता आयोगों में लंबित मामलों के निपटारे में निरंतरता बनी रहेगी। यदि इन 19 पदाधिकारियों (8 अध्यक्ष और 11 सदस्य) को कार्यकाल पूरा होते ही हटा दिया जाता, तो कई जिलों में आयोगों के काम ठप होने की स्थिति बन सकती थी। अब नई भर्ती होने तक ये अनुभवी पदाधिकारी पद पर रहकर उपभोक्ताओं की शिकायतों की सुनवाई जारी रख सकेंगे।

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