मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर चल रही कवायद के बीच कांग्रेस ने सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि यूसीसी मूल रूप से केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र का विषय है, लेकिन राज्य में इसे मुद्दा बनाकर जनता का ध्यान असली समस्याओं से हटाने का प्रयास किया जा रहा है।
पहले दूसरे राज्यों का आकलन बताए सरकार
पटवारी ने कहा कि गुजरात, असम और उत्तराखंड जैसे राज्यों में यूसीसी लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। ऐसे में मध्य प्रदेश में आगे बढ़ने से पहले सरकार को यह बताना चाहिए कि उन राज्यों में इसके क्या परिणाम सामने आए, क्या फायदे हुए और किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि बिना किसी विस्तृत मूल्यांकन के प्रदेश में यूसीसी पर चर्चा शुरू करना जल्दबाजी होगी।
आदिवासी समाज को लेकर जताई चिंता
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि मध्य प्रदेश की सामाजिक संरचना अन्य राज्यों से अलग है। यहां बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय निवास करता है, जिनकी अपनी परंपराएं, सामाजिक व्यवस्थाएं और सांस्कृतिक पहचान है। पटवारी ने सवाल उठाया कि क्या यूसीसी लागू होने से आदिवासी समाज के पारंपरिक अधिकारों और सांस्कृतिक व्यवस्थाओं पर असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि इस पहलू पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
असल मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश
पटवारी ने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य सरकारें समय-समय पर ऐसे मुद्दे सामने लाकर जनता का ध्यान महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक चुनौतियों से हटाने का प्रयास करती हैं। उन्होंने कहा कि लोगों की आय बढ़ाने, रोजगार सृजन और आर्थिक सुधारों पर चर्चा कम हो रही है, जबकि नए राजनीतिक मुद्दों को आगे बढ़ाया जा रहा है।
गायब आदिवासी महिलाओं का मुद्दा उठाया
कांग्रेस नेता ने प्रदेश में बड़ी संख्या में लापता महिलाओं और बेटियों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की महिलाओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों पर सरकार को जवाब देना चाहिए। उनका सवाल था कि यदि समानता की बात की जा रही है तो सबसे पहले कमजोर वर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। पटवारी ने कहा कि यदि समानता की अवधारणा को लागू करना है तो आर्थिक असमानता, रोजगार और अवसरों में भी समानता सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इन मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय नए विवादास्पद विषयों को आगे बढ़ा रही
कांग्रेस का रुख स्पष्ट
पटवारी ने कहा कि कांग्रेस का मानना है कि यूसीसी संसद और केंद्र सरकार से जुड़ा विषय है। इसलिए राज्यों में अलग-अलग स्तर पर इसकी प्रक्रिया चलाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में यूसीसी की कवायद राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा अधिक और जनहित का विषय कम दिखाई देती है।