श्वेत-पत्र जारी करने की नई परंपरा शुरू करे सरकार

  राजेंद्र  पराशर   

1  श्वेत-पत्र जारी करने की नई परंपरा शुरू करे सरकार
दतिया उपचुनाव के परिणाम आने के बाद पटवारी का मुख्यमंत्री को पत्र
भोपाल। दतिया विधानसभा उपचुनाव में भाजपा को मिली करारी शिकस्त के बाद मध्य प्रदेश की राजनीति में नया मोड़ आ गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मंगलवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को एक पत्र लिखकर दतिया के जनादेश को सकारात्मक राजनीति और बदलाव का प्रतीक बताया है। उन्होंने आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति को छोड़कर सरकार से राज्य के 8 बुनियादी विषयों पर क्रमवार श्वेत-पत्र  जारी करने की मांग की है।
पटवारी ने अपने पत्र में लिखा है कि कि दतिया का परिणाम केवल एक निर्वाचन क्षेत्र का निर्णय नहीं, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश की जनता की उस मन की आवाज का प्रतीक है जो जनहित के वास्तविक मुद्दों को राजनीति के केंद्र में देखना चाहती है। उन्होंने कहा कि जनता अब नफरत और नकारात्मकता के बजाय सकारात्मक राजनीति, पारदर्शिता और समाधान चाहती है।
इन 8 प्रमुख मुद्दों को उठाया
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने सुझाव दिया कि सरकार पारदर्शी व्यवस्था के लिए बिजली एवं पेयजल व्यवस्था,  शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाएं, किसानों और कृषि क्षेत्र की चुनौतियां,  युवाओं का रोजगार,  प्रदेश की कानून-व्यवस्था,  महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान,  आदिवासी समुदाय के प्रश्न और दलित एवं पिछड़ा वर्ग की स्थिति को लेकर ष्ष्वेतपत्र जारी करने की मांग की है।
कांग्रेस तथ्यों पर बहस को तैयार
पटवारी ने कहा कि कांग्रेस इन सभी मुद्दों पर अपने तथ्य और सुझाव सार्वजनिक करने के लिए तैयार है। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि सरकार भी तर्क और आंकड़ों के आधार पर अपनी बात रखे, क्योंकि लोकतंत्र की स्वस्थ परंपरा तथ्यों पर आधारित बहस से ही चलती है। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि श्वेत-पत्र जारी करने की यह पहल शुरू होती है, तो प्रदेश की राजनीति जवाबदेही और वास्तविक विकास की दिशा में आगे बढ़ेगी।
2 दतिया हार पर भाजपा सख्त, जांच करेगी समिति
मुख्यमंत्री निवास पर हुई बैठक, रिपोर्ट केंद्रीय नेतृत्व को भेजी जाएगी
भोपाल। दतिया विधानसभा उपचुनाव में मिली अप्रत्याशित हार के बाद भाजपा संगठन पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। हार की कड़वी घूंट पीने के बाद पार्टी ने न केवल इसकी विस्तृत समीक्षा शुरू कर दी है, बल्कि हार की वजहों और स्थानीय स्तर पर हुए तथाकथित ‘भीतरघात’ की जांच के लिए दो सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन भी कर दिया है।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल’ ने हार के कारणों की तह तक जाने के लिए इस समिति का गठन किया है। प्रदेश महामंत्री गौरव रणदीवे और वरिष्ठ नेता अंबाराम कराड़ा को समिति में शामिल किया गया है। यह समिति दतिया जाकर चुनाव से जुड़े पदाधिकारियों, धरातल के कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं से सीधी बातचीत करेगी। चुनाव प्रबंधन, संगठनात्मक ढिलाई और भीतरघात के आरोपों की गहराई से समीक्षा कर रिपोर्ट सीधे प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडलेवाल को सौंपी जाएगी।
मुख्यमंत्री निवास में हुई बैठक
इससे पहले मंगलवार को मुख्यमंत्री निवास पर दतिया उपचुनाव को लेकर एक हाई-प्रोफाइल समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी और संगठन के शीर्ष पदाधिकारी। बैठक के दौरान प्रत्याशी आशुतोष तिवारी ने चुनाव में पार्टी के ही कुछ नेताओं पर असहयोग और कथित भीतरघात के गंभीर आरोप लगाते हुए इससे जुड़े दस्तावेज और तथ्य शीर्ष नेतृत्व के सामने रखे।
मौन रहे दिग्गज, केंद्रीय नेतृत्व तय करेगा आगे का रुख
समीक्षा बैठक के बाद मुख्यमंत्री निवास से बाहर निकले अधिकांश मंत्रियों और संगठन पदाधिकारियों ने मीडिया से दूरी बनाए रखी और कुछ भी बोलने से परहेज किया। सूत्रों के मुताबिक, जिन नेताओं पर गंभीर स्तर के भीतरघात के आरोप लगे हैं, उन पर अंतिम फैसला जांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा ही लिया जाएगा। पार्टी इस मामले में सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई के मूड में दिख रही है।
पार्षदों पर भीतरघात के आरोप
बैठक में जो तथ्य सामने आए, उनमें सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा भीतरघात का रहा। सूत्रों के अनुसार दतिया और बरौनी क्षेत्र के अधिकांश पार्षदों पर चुनाव के दौरान पार्टी के खिलाफ काम करने के आरोप लगे हैं। बैठक में दावा किया कि कुछ स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने प्रत्याशी को हराने में अहम भूमिका निभाई। इन आरोपों पर भी विस्तृत चर्चा की गई और संबंधित जानकारियां दर्ज की गईं।
3 हाईकोर्ट की कार्रवाई का किया स्वागत, सरकार पर साधा निशाना
भोपाल। विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने छात्रसंघ चुनाव को लेकर हाईकोर्ट की सख्त कार्रवाई का स्वागत किया है। उन्होंने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार पिछले नौ वर्षों से प्रदेश के युवाओं की आवाज़ दबाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन अदालत के रुख के कारण अब उसे बैकफुट पर आना पड़ा है।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि प्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में नौ साल से चुनाव नहीं कराए गए। इस दौरान हर साल छात्रों से नियमानुसार चुनाव शुल्क तो वसूला गया, लेकिन उन्हें अपना प्रतिनिधि चुनने के अधिकार से पूरी तरह वंचित रखा गया। जब इस मामले में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया, तब जाकर सरकार को सितंबर महीने में छात्रसंघ चुनाव कराने का आश्वासन अदालत के समक्ष देना पड़ा। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार युवाओं की आवाज़ से डरती है, इसीलिए लोकतंत्र की पहली पाठशाला माने जाने वाले छात्र संघों को जानबूझकर कमजोर करने का प्रयास किया गया।
जेन ज़ी अपने अधिकारों के प्रति सजग
नेता प्रतिपक्ष ने स्पष्ट कहा कि लोकतंत्र में अधिकार किसी सरकार की कृपा से नहीं, बल्कि संविधान से मिलते हैं। आज की नई पीढ़ी (जेन ज़ी) अपने अधिकारों के प्रति बेहद जागरूक है और वह अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के साथ कोई समझौता स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि समय पर पारदर्शी तरीके से छात्रसंघ चुनाव कराना अब सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है।
4  अब नॉमिनी बेच सकेंगे मूंग और उड़द, भुगतान सीधे किसान के खाते में
बायोमेट्रिक सत्यापन में विफलता पर केंद्र का फैसला
भोपाल।  प्रदेश में समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर जारी ग्रीष्मकालीन मूंग और उड़द की खरीदी को लेकर केंद्र और राज्य सरकार ने किसानों के पक्ष में दो महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। तकनीकी खामियों के कारण उपज बेचने में आ रही व्यावहारिक कठिनाइयों को दूर करते हुए केंद्र सरकार ने बायोमेट्रिक छूट का प्रावधान किया है, वहीं राज्य सरकार ने खरीदी की समय-सीमा में विस्तार कर दिया है।
केंद्रीय कृषि विभाग द्वारा जारी नए आदेश के अनुसार, जिन किसानों का आधार-आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन बार-बार विफल हो रहा है, वे अब अपने नामित प्रतिनिधि (नॉमिनी) के माध्यम से समर्थन मूल्य पर फसल बेच सकेंगे। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र किसान तकनीकी कारणों से अपनी उपज बेचने से वंचित न रहे।  प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार ने कुछ आवश्यक शर्तें भी तय की हैं। इसके अनुसार खरीदी केंद्र पर संबंधित किसान का सत्यापन एवं फोटो अनिवार्य होगा। इसके साथ ही, नामांकित प्रतिनिधि का आधार ओटीपी , ई-केवाईसी और बायोमेट्रिक सत्यापन कराना होगा। बिक्री प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद पूरी राशि केवल पंजीकृत किसान के बैंक खाते में ही ट्रांसफर की जाएगी। किसी भी परिस्थिति में प्रतिनिधि के खाते में भुगतान नहीं होगा। यह छूट केवल वास्तविक और विशेष तकनीकी समस्याओं का सामना कर रहे किसानों के लिए ही मान्य होगी।
स्लॉट बुकिंग 10 अगस्त तक बढ़ी
प्रदेश सरकार ने भी किसानों को राहत देते हुए ग्रीष्मकालीन मूंग और उड़द के उपार्जन की समय-सीमा बढ़ा दी है। अब किसान 10 अगस्त तक ई-उपार्जन पोर्टल पर अपना स्लॉट बुक कर सकेंगे, जबकि सरकारी केंद्रों पर खरीदी की प्रक्रिया 20 अगस्त तक जारी रहेगी। इसके अलावा, जिन किसानों ने 30 जुलाई तक अपनी आंशिक उपज बेच दी है, उन्हें शेष उपज के लिए पोर्टल पर पुनः स्लॉट बुक करने की सुविधा भी प्रदान की गई है।
5  बिना जांच पटवारियों पर नहीं होगी सीधी एफआईआर
राजस्व विभाग ने जारी किए नए निर्देश
भोपाल। प्रदेश सरकार ने अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे पटवारियों के हित में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक फैसला लिया है। नए निर्देशों के अनुसार, अब किसी भी पटवारी के खिलाफ सीधे प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज नहीं की जा सकेगी। राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव ई. रमेश कुमार ने प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों को इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी कर दिए हैं।
शासकीय आदेश में स्पष्ट किया गया है कि भविष्य में राजस्व न्यायालय में प्रस्तुत प्रतिवेदन या शासकीय कार्य से संबंधित किसी भी मामले में यदि एफआईआर दर्ज कराने की आवश्यकता महसूस होती है, तो पहले प्रकरण का गहन प्रारंभिक परीक्षण अनिवार्य होगा। जांच में संबंधित कर्मचारी की भूमिका, नियमों के उल्लंघन और उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा की जाएगी। पर्याप्त आधार मिलने पर ही आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। सरकार के इस कदम का मुख्य उद्देश्य निष्पक्षता सुनिश्चित करना और कर्मचारियों को अनावश्यक कानूनी कार्यवाहियों से सुरक्षा प्रदान करना है।
मानसिक दबाव से मिलेगी राहत
पटवारी संघ लंबे समय से यह शिकायत कर रहा था कि पर्याप्त जांच के बिना सीधे एफआईआर दर्ज होने से निष्ठावान कर्मचारियों का मनोबल गिरता है और उन पर काम का अनावश्यक दबाव बनता है। सरकार के इस फैसले से कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

6  कवच योजना से 5 हजार किसानों को मिलेगा नया कर्ज
मंत्रिमंडल का  फैसला, जनजातीय शिक्षकों को 35 साल की सेवा पर चतुर्थ क्रमोन्नत वेतनमान
भोपाल। सरकार ने राज्य के सर्वांगीण विकास, किसान कल्याण और जन-सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मंगलवार को आयोजित मंत्रि-परिषद की बैठक में विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित कुल 32,070 करोड़ रुपए की दूरगामी योजनाओं एवं प्रस्तावों को औपचारिक स्वीकृति प्रदान की गई। बैठक में सहकारिता विभाग की बहुप्रतीक्षित कवच योजनाश् का अनुमोदन किया गया, जिसके तहत ऋण खातों में गड़बड़ी और जांच में देरी की वजह से योजनाओं से वंचित लगभग 5,000 किसानों को मुख्यधारा में लाकर पुनः नया ऋण और सरकारी लाभ उपलब्ध कराया जाएगा।
मंत्रिमंडल की बैठक में सहकारी समितियों के ऐसे लगभग 5,000 किसान जिनके ऋण खातों में अनियमितताएँ हुई थीं और लंबी जांच प्रक्रिया के कारण वे सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं ले पा रहे थे, उन्हें अब बड़ी राहत दी गई है। अपैक्स बैंक एवं जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों द्वारा अपने स्तर से 50 करोड़ की सीमा तक की राहत निधि बनाई जाएगी। राज्य सरकार किसान हित में 25 करोड़ की अंशपूंजीएकमुश्त प्रदान करेगी। इस योजना से प्रभावित किसान क्रेडिट संकट से बाहर निकलेंगे और उन्हें खेती-किसानी के लिए नया ऋण व अनुदान मिल सकेगा।
बदलेगी अस्पतालों की तस्वीर
आगामी 5 वित्तीय वर्षों 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 के लिए प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे को सुदृढ़ बनाने हेतु विभिन्न मदों में बड़ी राशि स्वीकृत की गई है।  अस्पतालों व औषधालयों का संचालन (12,517.99 करोड़) जिला एवं सिविल अस्पतालों को सुचारू रूप से चलाने, रोगियों को बेहतर इलाज देने और स्वास्थ्य जागरूकता फैलाने के लिए मंजूर किए गए। ग्रामीण व सुदूर अंचलों तक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच का दायरा बढ़ाने के लिए 11,812.02 करोड़ की राषि स्वीकृत की है।  वहीं मलेरिया और शीत ज्वर जैसी बीमारियों के प्रभावी नियंत्रण के लिए नए कीटनाशकों और लार्विसाइड्स की खरीद व अभियानों का संचालन किए जाने का फैसला लिया है।
चतुर्थ क्रमोन्नत वेतनमान की मंजूर
जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत कार्यरत शैक्षणिक संवर्ग के सहायक शिक्षक, उच्च श्रेणी शिक्षक तथा नवीन शैक्षणिक संवर्ग के प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षकों के हित में बड़ा फैसला लिया गया है। 35 वर्ष की सेवा पूर्ण कर चुके पात्र शिक्षकों को 1 जुलाई 2023 या इसके बाद की तिथि से चतुर्थ क्रमोन्नत वेतनमान प्रभावशील करने का अनुमोदन किया गया है।
युवाओं को उपलब्ध कराई जाएगी खेल सुविधाएं
प्रदेश के युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से खेल एवं युवा कल्याण विभाग की योजना को वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक के लिए 2,460.57 करोड़ की स्वीकृति दी गई है। इससे खिलाड़ियों के लिए विश्वस्तरीय खेल परिसर, स्टेडियम तथा आधुनिक स्थायी खेल उपकरण स्थापित किए जाएंगे। प्रदेश के जिला मुख्यालयों और 313 में से निर्मित 100 विकासखंडों के स्टेडियमों का जीर्णाेद्धार व उन्नयन किया जाएगा।
मजबूत होगा स्टेट डाटा सेंटर
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत मध्यप्रदेश स्टेट डाटा सेंटर के 2026 से 2031 तक निरंतर संचालन और अपग्रेडेशन के लिए 1,099.58 करोड़ मंजूर किए गए हैं। यह सेंटर राज्य के सभी विभागों की वेबसाइटों, पोर्टलों, ईमेल सेवाओं और क्लाउड होस्टिंग के लिए एक साझा व सुरक्षित प्लेटफॉर्म प्रदान करता है।

 

       
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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