यूसीसी के विरोध में प्रदेशभर में अभियान 16 से, जनसंवाद भी करेंगे

                                  राष्ट्रपति और राज्यपाल के नाम सौंपेंगे ज्ञापन
भोपाल। प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर राजनीतिक और सामाजिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने इंदौर के मुफ्ती जुनैद और भोपाल के मौलाना माज के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में यूसीसी के खिलाफ 16 से 20 अगस्त तक प्रदेशव्यापी विरोध अभियान चलाने का ऐलान किया है।
इस दौरान प्रदेश के सभी जिलों में 21 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल कलेक्टर के माध्यम से राष्ट्रपति और राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपेगा। आयोजकों ने इस अभियान में महिलाओं, युवतियों और युवाओं की भागीदारी को प्राथमिकता देने की बात कही है। विधायक मसूद ने केंद्र व राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यूसीसी का प्रभाव केवल मुस्लिम समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर अन्य वर्गों पर भी पड़ेगा। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 25 का हवाला देते हुए कहा कि नए बदलावों से नागरिकों की धार्मिक स्वतंत्रता प्रभावित होने की आशंका है।
अभियान के पहले चरण में प्रदेश के हर जिले में ज्ञापन सौंपा जाएगा। प्रतिनिधिमंडल में 15 से 17 महिलाएं और युवा शामिल रहेंगे। दूसरे चरण में जिलों में डायलॉग सेंटर बनाए जाएंगे, जहां विभिन्न समुदायों और सामाजिक समूहों के प्रबुद्ध जनों के साथ विचार-विमर्श होगा।  इसके अलावा ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और जमीयत उलेमा-ए-हिंद जैसे संगठनों को एक मंच पर लाने की कवायद के साथ वकीलों की टीम कानूनी लड़ाई की रूपरेखा तैयार कर रही है।
  प्रदेश के 74 शासकीय कॉलेजों में अब तक जनभागीदारी समितियों का गठन नहीं
एक माह में पंजीयन कराने के निर्देश जारी, एक्सीलेंस भोपाल समेत कई प्रमुख संस्थान शामिल
भोपाल। प्रदेश के उच्च शिक्षा तंत्र में प्रशासनिक सुस्ती का बड़ा मामला सामने आया है। राज्य के 74 शासकीय कॉलेजों में चालू सत्र के बावजूद अब तक श्जनभागीदारी समितियोंश् का गठन ही नहीं हो सका है। उच्च शिक्षा मंत्रालय द्वारा कराई गई समीक्षा में इस बड़ी लापरवाही का खुलासा होने के बाद हड़कंप मच गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए मंत्रालय ने संबंधित सभी प्राचार्यों को सूची थमाते हुए एक महीने के भीतर अनिवार्य रूप से समितियों का गठन कर पंजीयन कराने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।
कॉलेजों में जनभागीदारी समिति का न होना सीधे तौर पर छात्र हित से जुड़ा मुद्दा है। इन समितियों के अभाव में कॉलेजों में होने वाले स्थानीय आयोजन, विकास कार्यों के प्रस्ताव, आवश्यक स्वीकृतियां और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े वित्तीय फैसले पूरी तरह ठप हो जाते हैं। उच्च शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि तय समय-सीमा के भीतर पंजीयन प्रक्रिया पूरी न करने वाले जिम्मेदार प्राचार्यों पर प्रशासनिक कार्रवाई की जा सकती है। विभाग द्वारा जारी सूची में राजधानी का प्रतिष्ठित एक्सीलेंस कॉलेज भोपाल और लॉ कॉलेज हरदा जैसे प्रमुख संस्थान भी शामिल हैं। इसके अलावा प्रभावित 74 कॉलेजों की सूची उच्च शिक्षा विभाग ने जारी की है, जहां पर समिति का गठन नहीं हुआ है।
इन कॉलेजों में अटकी प्रक्रिया
भोपाल व आसपासः एक्सीलेंस कॉलेज भोपाल, फंदा, लॉ कॉलेज रायसेन, लॉ कॉलेज सीहोर।
इंदौर व उज्जैन संभागः कंकेश्वरी देवी कॉलेज नंदानगर (इंदौर), खजराना, कंपेल, बेमा, सोयतकला, बदोद, आगर-मालवा।
महाकौशल व बुंदेलखंडः  छगरवान (जबलपुर), शाहपुरा, गढ़ा, हट्टा (बालाघाट), आदर्श महाविद्यालय छतरपुर, गुवारा, दमोह, बसई (दतिया), लॉ कॉलेज बीना, शाहपुर (सागर)।
अन्य जिलेः अलीराजपुर, बैतूल, गोरमी (भिंड), मेहदवानी, करंजिया, अमरपुर, बमोरी, खिरकिया, खालवा, झिरन्या (खरगोन), सालीचौका, ओरछा, श्योपुर व बरोदा शामिल हैं।
अनुकंपा नियुक्ति से हटाने और वेतन विसंगति पर नाराज कर्मचारियों ने कराया मुंडन
भोपाल। अनुकंपा नियुक्ति में सीपीसीटी की अनिवार्यता के कारण सेवा से पृथक किए गए एक हजार से अधिक युवाओं के समर्थन में सोमवार को मध्यप्रदेश लिपिक वर्ग कर्मचारी संघ ने मंत्रालय के समक्ष प्रदर्शन किया।
इस दौरान कर्मचारियों ने अनोखा विरोध दर्ज कराते हुए सभा आयोजित की और मृत कर्मचारियों के आश्रितों ने मुंडन कराया। संघ के प्रदेश अध्यक्ष मुकेश चतुर्वेदी ने बताया कि लिपिकों की मुख्य मांगों में सुरक्षित अनुकंपा नियुक्ति और मंत्रालय के समान वेतनमान व ग्रेड पे देना शामिल है। उन्होंने कहा कि समान कार्य करने के बावजूद मंत्रालय, विधि, विधायी एवं राजभवन के लिपिकों को उन्नत लाभ मिल रहा है, जबकि विभागाध्यक्ष कार्यालयों के लिपिक इससे वंचित हैं।
18 अगस्त को तृतीय वर्ग कर्मचारियों का प्रदर्शन
तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ मप्र के महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने बताया कि 18 अगस्त को प्रदेश अध्यक्ष अतुल मिश्रा के नेतृत्व में सभी जिला मुख्यालयों और भोपाल में विशाल प्रदर्शन किया जाएगा। संघ ने सरकार से अखिल भारतीय सेवा अधिकारियों की तर्ज पर कर्मचारियों व पेंशनरों को 1 जनवरी 2026 से 2 प्रतिशत महंगाई भत्ता देने, नवनियुक्त कर्मचारियों को तीन वर्ष तक 70, 80 और 90 प्रतिशत वेतन देने का नियम समाप्त करने, अनुकंपा नियुक्ति में सीपीसीटी की शर्त हटे और कैशलेस स्वास्थ्य बीमा योजना लागू की करने और  ई-अटेंडेंस व्यवस्था को तत्काल समाप्त किया जाने की मांग की है।
   प्रदेश में तीन राज्य औद्योगिक सुरक्षा बल होंगे गठित
मुख्यमंत्री ने कहा बैगा, भारिया और सहरिया युवाओं की बनेंगी विशेष कंपनियां
भोपाल। प्रदेश में औद्योगिक सुरक्षा को मजबूती देने के लिए तीन श्राज्य औद्योगिक सुरक्षा बलश् (एसआईएसफ) का गठन किया जाएगा, जिसके पहले चरण की शुरुआत जल्द होगी। इसके साथ ही प्रदेश के विशेष पिछड़ी जनजातीय समूह के बैगा, भारिया एवं सहरिया युवाओं को रोजगार और मुख्यधारा से जोड़ने के लिए पुलिस विभाग में उनकी विशेष कंपनियां बनाई जाएंगी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को भोपाल के रवींद्र भवन में पुलिस विभाग द्वारा आयोजित अपने अभिनंदन समारोह के दौरान ये महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। नवीन भर्तियों की शुरुआत और वर्षों से लंबित पदोन्नति का रास्ता साफ करने पर पुलिस अधिकारियों-कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री का आभार जताया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने पुलिस बल की क्षमता और मनोबल दोनों बढ़ाने की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने प्रदेश में 3 राज्य औद्योगिक सुरक्षा बल गठित होंगे। इसके अलावा खंडवा में एक नई पुलिस बटालियन की स्थापना की जाएगी। उन्होंने कहा कि विशेष पिछड़ी जनजातियों (बैगा, भारिया और सहरिया) के युवाओं के लिए पुलिस में विशेष कंपनियां गठित होंगी।
पुलिस बैंड, एफएसएल में होगी नियुक्तियां
मुख्यमंत्री ने कहा कि पदोन्नति की बाधाएं दूर होने से 58 संवर्गों में रिकॉर्ड 27,534 पुलिसकर्मियों को प्रमोशन मिला है, जिनमें 12,928 आरक्षक से प्रधान आरक्षक और 5,171 प्रधान आरक्षक से एएसआई बने हैं। 30 रक्षित निरीक्षक भी डीएसपी पद पर पदोन्नत हुए हैं। वर्ष 2023 से अब तक 14,704 से अधिक पदों पर चयन हो चुका है, जबकि 9,751 पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है। पुलिस बैंड और एफएसएल की भर्तियां भी अंतिम चरण में हैं। अगले दो वर्षों में आरक्षक व सब-इंस्पेक्टर के शेष सभी रिक्त पदों को भर लिया जाएगा।
अपराधियों में कानून का खौफ पैदा करें
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश पुलिस ने चंबल से डकैतों का सफाया करने और राज्य को नक्सलमुक्त बनाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। उन्होंने पुलिसकर्मियों का आह्वान किया कि वे संवेदनशीलता और निष्पक्षता से काम करते हुए आमजन में विश्वास और अपराधियों में कानून का खौफ पैदा करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पुलिस अपनी ड्यूटी निभाए, सरकार आपके परिवार के लिए अपने दायित्वों का निर्वहन करेगी।
परेड से बढ़ता है अनुशासन
पुलिस  महानिदेशक कैलाश   मकवाणा ने कहा कि पुलिस विभाग में अनुशासन का बड़ा महत्व है। परेड से अनुशासन बढ़ता है। इसके लिए बैंड दस्ते में भर्ती प्रक्रिया चल रही है। सभी इकाइयों को जल्द ही पुलिस बैंड उपलब्ध होगा। नवीन आपराधिक कानूनों को लागू कराने में एफएसएल का बड़ा महत्व है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एफएसएल में नई भर्ती के लिए भी स्वीकृति प्रदान की। सिंहस्थ 2028 में पूरे देश से श्रद्धालु उज्जैन आएंगे। पिछले दो वर्षों में पुलिस विभाग ने 18 हजार से अधिक पदों पर नई नियुक्तियां की हैं। यह पुलिस बल प्रशिक्षण के बाद सिंहस्थ ड्यूटी के लिए उपलब्ध होगा।   

 पूर्व मंत्री के बंगले पर चोरी, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
भोपाल। राजधानी भोपाल का सबसे सुरक्षित माना जाने वाला वीआईपी इलाका चार इमली अब बेखौफ बदमाशों की गिरफ्त में नजर आ रहा है। विधायकों, मंत्रियों और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के इन सरकारी आवासों के बीच चोरों ने पूर्व मंत्री व वरिष्ठ भाजपा विधायक अजय विश्नोई के बंगले को अपना निशाना बनाया। स्पेशल डीजी अजय शर्मा के ठीक सामने स्थित इस बंगले में हुई दुस्साहसिक चोरी ने शहर की कानून-व्यवस्था और सुरक्षा दावों की पोल खोलकर रख दी है।
घटना की जानकारी मिलते ही हबीबगंज पुलिस बल और फॉरेंसिक की टीम मौके पर पहुंची। शुरुआती जांच में बंगले के मुख्य गेट के लॉक, अलमारी और लॉकर टूटे हुए पाए गए हैं। मकान बंद होने के कारण चोरी गए कुल सामान और नकदी का सटीक आकलन फिलहाल नहीं हो सका है। गौर करने वाली बात यह है कि ठीक 3-4 दिन पहले इसी इलाके में एक अन्य अधिकारी के सूने मकान को भी चोरों ने निशाना बनाया था। लगातार हो रही इन वारदातों से क्षेत्र के निवासियों में भारी आक्रोश और असुरक्षा का माहौल है। पुलिस का कहना है कि आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। जल्द ही गिरोह को पकड़ने का दावा किया जा रहा है, लेकिन हाई-प्रोफाइल जोन में हुई इस वारदात ने पुलिस की रात्रिकालीन गश्त पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
 वरिष्ठों के नए तालमेल से सरकार को घेरने का तैयार होगा रोडमैप
कांग्रेस की पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी की बैठक आज
भोपाल।  राजधानी भोपाल में मंगलवार को होने जा रही कांग्रेस की पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी की बैठक केवल एक संगठनात्मक चर्चा न होकर, प्रदेश में विपक्ष की राजनीति का नया मोड़ तय करने जा रही है। प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक में दिग्विजय सिंह, प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी, पीसीसी चीफ जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार समेत सभी प्रमुख नेता एक साथ रणनीति बनाएंगे।
विधानसभा चुनाव के बाद बदले सांगठनिक समीकरणों के बीच कमलनाथ की सक्रियता और वरिष्ठों की मौजूदगी यह साफ संदेश देती है कि पार्टी अब अंदरूनी तालमेल मजबूत कर मैदानी संघर्ष के लिए पूरी तरह तैयार है। बैठक का मुख्य एजेंडा प्रदेश सरकार के खिलाफ एक व्यापक और आक्रामक जनआंदोलन का रोडमैप तैयार करना है। पार्टी ने जिला प्रभारियों, जिलाध्यक्षों और विधानसभा प्रभारियों से स्थानीय स्तर की जनसमस्याओं और मुद्दों का ब्योरा जुटाया है। इन स्थानीय मुद्दों को संकलित कर पीएसी की बैठक में राज्यस्तरीय आंदोलन से जोड़ने की योजना पर अंतिम मुहर लगेगी। जीतू पटवारी के नेतृत्व में सरकार पर हमलों को और तीखा करते हुए रणनीति को ब्लॉक और जिला स्तर तक ले जाया जाएगा।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के साथ जुड़ेंगे कमलनाथ
बैठक में कांग्रेस के तमाम बड़े नेताओं के शामिल होने का दावा किया गया है। हालांकि जानकारी के मुताबिक पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ बैठक में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं रहेंगे। वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक में शामिल होंगे। वहीं सभी की नजर नकुलनाथ की मौजूदगी पर भी रहेगी। दूसरी तरफ भाजपा ने कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान पर निशाना साधते हुए पार्टी में आपसी विरोध और गुटबाजी बढ़ने के आरोप लगाए हैं। भाजपा का कहना है कि दतिया की जीत के बाद कांग्रेस में जश्न से ज्यादा अंदरूनी विवाद सामने आ रहा है।
भितरघातियों पर हो सकती है कार्रवाई
दतिया की जीत के बाद कांग्रेस संगठन भले ही इसे अपने लिए संजीवनी के तौर पर देख रहा हो, लेकिन जीत के तुरंत बाद पार्टी के भीतर ही कार्रवाई और संगठन में कसावट की मांग तेज हो गई है। बिना एजेंडा बैठक बुलाए जाने पर उठ रहे सवाल, भितरघातियों पर कार्रवाई की मांग और जीतू पटवारी के खिलाफ पार्टी के एक धड़े की नाराजगी ये सभी मुद्दे कल की बैठक में हावी रह सकते हैं। ऐसे में अब नजर इस बात पर है कि पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी की बैठक कांग्रेस के भीतर चल रही खींचतान को खत्म करती है या नए विवाद को जन्म देती है।


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