मध्य प्रदेश में पोषण आहार व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है, जिसके तहत टेक होम राशन के लिए अब कम अवधि के टेंडर होंगे। वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर तीन माह तक मध्याह्न भोजन तैयार करने वाले स्व-सहायता समूह पैकेट बनाएंग

-प्रतीकात्मक चित्र।
टेक होम राशन के लिए अब कम अवधि के टेंडर।
तीन माह तक स्व-सहायता समूह बनाएंगे पोषण पैकेट।
हर मंगलवार आंगनबाड़ी केंद्रों में मिलेगा गर्म भोजन।
राज् ब्यूरो, भोपाल। प्रदेश में छह माह से तीन वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती एवं धात्री महिलाओं और किशोरी बालिकाओं को दिए जाने वाले टेक होम राशन के लिए अब पहले कम अवधि के टेंडर होंगे। जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती है तब तक मध्याह्न भोजन तैयार करने वाले स्व-सहायता समूहों से दतिया और खिचड़ी के पैकेट तैयार कराए जाएंगे। प्रति मंगलवार को आंगनबाड़ी केंद्रों में गर्म पका हुआ भोजन दिया ज
यह वैकल्पिक व्यवस्था फिलहाल तीन माह के लिए लागू की गई है। आवश्यकता पड़ने पर इसे बढ़ाया भी जा सकेगा। इस पूरी व्यवस्था की निगरानी का जिम्मा कलेक्टरों को दिया गया है।
प्रदेश में पिछले कुछ माह से पूरक पोषण आहार की व्यवस्था गड़बड़ाई हुई है। दरअसल, सरकार ने बार-बार टेक होम राशन की व्यवस्था में परिवर्तन किए। पहले एमपी एग्रो से इसे तैयार करवाया, फिर पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा आजीविका मिशन के अंतर्गत पंजीकृत महिला स्व-सहायता समूहों के परिसंघ द्वारा संचालित संयंत्रों से आपूर्ति की व्यवस्था लागू की।
कमल नाथ सरकार ने फिर ठेकेदारों के हाथों में व्यवस्था दे दी, जिसे शिवराज सरकार ने फिर बदला लेकिन इस बार पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने संयंत्रों के संचालन में लगातार हो रहे घाटे का हवाला देकर महिला एवं बाल विकास विभाग को व्यवस्था लौटाने का प्रस्ताव दे दिया।
तीन-चार माह मंथन चला और फिर कैबिनेट ने पोषण आहार का काम महिला एवं बाल विकास विभाग को दे दिया। साथ ही यह भी निर्णय कर दिया कि पहले किसी भी तरह पोषण आहार की आपूर्ति बहाल कराई जाए। इसमें स्व-सहायता समूहों का उपयोग किया जाए। जब तक दीर्घावधि के लिए टेंडर नहीं हो जाते हैं तब तक कम अवधि के लिए टेंडर करके आपूर्ति की व्यवस्था बनाई जाए।
दरअसल, इस पूरी व्यवस्था में विलंब इसलिए हुआ क्योंकि भारत सरकार टेक होम राशन के लिए दी जाने वाले राशि में वृद्धि की तैयारी में है। संभावना यह है कि अधिकतम साढ़े नौ रुपये प्रति हितग्राही दी जाने वाली 15 रुपये तक की जा सकती है। इसके लिए प्रतीक्षा की जा रही थी लेकिन भारत सरकार के अधिकारियों के साथ बैठक के बाद जब यह स्पष्ट हो गया कि इसमें समय लगेगा तो फिर कम अवधि के लिए टेंडर करने का निर्णय लिया गया।
महिला एवं बाल विकास संचालनालय द्वारा टेंडर निकाले जाएंगे। जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती तब तक व्यवस्था बनाने के लिए मध्याह्न भोजन तैयार करने वाले स्व-सहायता समूहों से टेक होम राशन के पैकेट तैयार कराए जाएंगे। इसके लिए गेहूं, चावल, नमक तो उचित मूल्य की दुकानों से समूहों को मिल जाएगा, बाकी सामग्री की व्यवस्था वे स्वयं करेंगे। उन्हें इसके लिए राशि मिलेगी।
विभाग द्वारा बनाई गई व्यवस्था के अनुसार आंगनबाड़ी से आपूर्ति केंद्र तक जांच होगी। नई व्यवस्था में केवल आहार उपलब्ध कराने पर ही जोर नहीं है, बल्कि उसकी गुणवत्ता, मात्रा, नमूने की जांच, भंडारण, परिवहन और वितरण तक की निगरानी की जाएगी। पोषण आहार के नमूने लिए जाएंगे और उनकी जांच होगी। किसी नमूने के मानक पर खरा नहीं उतरने की स्थिति में संबंधित स्तर पर कार्रवाई होगी। निरीक्षण व्यवस्था में अधिकारियों को केंद्रों पर उपलब्ध स्टाक, वितरण और संबंधित रिकार्ड की जांच करने की जिम्मेदारी दी गई है।
पोषण आहार की पूरी श्रृंखला यानी सामग्री की आपूर्ति, गुणवत्ता, परिवहन, भंडारण, केंद्र तक पहुंच और वितरण को निगरानी के दायरे में रखा गया है। संबंधित अधिकारियों को अपने-अपने स्तर पर निरीक्षण और कार्रवाई की जिम्मेदारी दी गई है।