आम आदमी पार्टी (आप) के प्रदेश प्रभारी और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने लखनऊ स्थित प्रदेश मुख्यालय में प्रेसवार्ता कर चढ़ावा चोरी मामले में बड़े खुलासा का दावा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व में गठित एसआईटी की रिपोर्ट का पन्ना नंबर 6 गायब कर दिया गया था। जो अब मिल गया है। आज उन्होंने इसे सार्वजनिक किया।
संजय सिंह ने कहा कि विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता वाली एसआईटी रिपोर्ट से पन्ना नंबर 6 गायब कर दिया गया था, जो अब मिल गया है। इस पन्ने में साफ लिखा है कि डॉ. अनिल मिश्रा ने बैंक के साथ तय नियमों को शिथिल किया। इसके कारण मंदिर में चोरी और गबन की परिस्थितियां पैदा हुईं। रिपोर्ट के मुताबिक 40 दिन में 70 बार चोरी हुई और 81 लाख रुपये की बरामदगी हुई। जब रिपोर्ट सभी पदाधिकारियों को जिम्मेदार मानती है, तो चंपत राय और अनिल मिश्रा को क्लीन चिट कैसे दी जा सकती है?

संजय सिंह ने कहा कि जहां एक ओर 17 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने जांच में देरी पर नाराजगी जताते हुए एसआईटी से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। वहीं उसी दिन आरोपियों को क्लीन चिट मिलने की खबरें चलाई गईं। उन्होंने इसे सुप्रीम कोर्ट की निगरानी का अपमान और दोषियों को बचाने की एक सोची-समझी साजिश करार दिया। सांसद ने वर्तमान एसआईटी अध्यक्ष किरन एस को पत्र लिखकर 26 अहम दस्तावेज देने के लिए मिलने का समय मांगा है
यदि एसआईटी इन पुख्ता सुबूतों के आधार पर निष्पक्ष जांच नहीं की, तो वे खुद सारे कागजात लेकर सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। उन्होंने कहा कि 2 करोड़ की जमीन को 5 मिनट में 18.50 करोड़ में खरीदने के सौदे पर चंपत राय के हस्ताक्षर और अनिल मिश्रा की गवाही भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा सुबूत है।
उन्होंने कहा कि 52 साल तक तिरंगा न फहराने वाले व राष्ट्रगान को एंटरटेनमेंट बताने वाले लोग आज हमें देशभक्ति का पाठ न पढ़ाएं। संजय सिंह ने आरोप लगाया कि प्रभु श्रीराम के नाम पर जो चंदा वसूला गया, उसी पैसे से आज पूरे देश में आरएसएस और भाजपा के आलीशान दफ्तर चमक रहे हैं।