जबलपुर. एमपी के जबलपुर में आज रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने व्हीकल फैक्ट्री में टी-72 टैंक ओवरहॉल परियोजना का भूमिपूजन किया. करीब 472 करोड़ रुपए की इस परियोजना के तहत जबलपुर में भारतीय सेना के ञ्ज-72 टैंकों के ओवरहॉल, मरम्मत और तकनीकी अपग्रेड के लिए आधुनिक सुविधा विकसित की जाएगी. कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित रक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे.
इस मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यह परियोजना देश की औद्योगिक आत्मनिर्भरता और रक्षा क्षेत्र की बढ़ती क्षमता का नया प्रतीक है. उन्होंने मध्य प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की दूरदर्शिता की सराहना करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश रक्षा विनिर्माण और निवेश के क्षेत्र में महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहा है. राजनाथ सिंह ने आधुनिक युद्ध शैली का जिक्र करते हुए कहा कि आज ड्रोन और मिसाइल का दौर है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि टैंकों की भूमिका खत्म हो गई है. टैंकों को आधुनिक तकनीक, बेहतर सेंसर और नई क्षमताओं से लैस कर बदलते युद्धक्षेत्र के अनुरूप तैयार करने की जरूरत है.
जबलपुर में बढ़ेगी टैंकों के ओवरहॉल की क्षमता-
रक्षा मंत्री ने बताया कि भारतीय सेना को हर साल बड़ी संख्या में टैंकों के पुनरुद्धार और रखरखाव की जरूरत होती है. जबलपुर की नई परियोजना इस जरूरत को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी. ताजा उपलब्ध जानकारी के मुताबिक परियोजना के पहले चरण में ङ्कस्नछ्व में हर साल 12 टी-72 टैंकों का पूर्ण ओवरहॉल और अपग्रेड किया जाएगा. इसके लिए आधुनिक प्लांट के साथ टैंकों के रखरखाव, मरम्मत और परीक्षण के लिए टेस्टिंग ट्रैक भी विकसित किया जाएगा. अभी टी-72 टैंकों के ओवरहॉल की मुख्य जिम्मेदारी आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड की हैवी व्हीकल्स फैक्ट्री, आवड़ी, चेन्नई के पास है. जबलपुर में नई सुविधा विकसित होने से देश में टैंकों के ओवरहॉल की उपलब्ध क्षमता बढ़ेगी और सेना को जरूरत के अनुसार टैंकों को जल्द ऑपरेशनल स्थिति में लाने में मदद मिलेगी.
पायलट प्रोजेक्ट में दो टी-72 टैंक किए ओवरहॉल-
नई परियोजना से पहले व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर ने टी-72 टैंकों के ओवरहॉल की दिशा में पायलट प्रोजेक्ट पर काम किया था. फैक्ट्री ने दो टी-72 टैंकों का ओवरहॉल पूरा कर उन्हें भारतीय सेना को सौंपा. इस दौरान सेना की तकनीकी स्पेसिफिकेशन और निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुसार टैंकों की जांच, मरम्मत और जरूरी पुर्जों को बदलने का काम किया गया. पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद जबलपुर में इस क्षमता को स्थायी रूप से विकसित करने का रास्ता साफ हुआ. अब नई परियोजना के जरिए ङ्कस्नछ्व को टैंकों के ओवरहॉल और तकनीकी उन्नयन के क्षेत्र में बड़ी जिम्मेदारी मिलने जा रही है.
रक्षा उत्पादन 46 हजार करोड़ से बढ़कर 1.80 लाख करोड़-
रक्षा मंत्री ने देश में बढ़ते रक्षा उत्पादन का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में देश का घरेलू रक्षा उत्पादन करीब 46 हजार करोड़ रुपए था, जो अब बढ़कर करीब 1.80 लाख करोड़ रुपए हो गया है. इसी अवधि में रक्षा निर्यात भी करीब 1,000 करोड़ रुपए से बढ़कर लगभग 39 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच गया है. उन्होंने कहा कि सरकार ने वर्ष 2028-29 तक रक्षा निर्यात को 50 हजार करोड़ रुपए से अधिक करने का लक्ष्य रखा है. आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया के तहत देश में रक्षा उपकरणों के निर्माण के साथ-साथ मरम्मत, रखरखाव और अपग्रेडेशन की क्षमताओं को भी बढ़ाया जा रहा है.
जबलपुर बन रहा रक्षा उत्पादन का बड़ा केंद्र-
जबलपुर लंबे समय से रक्षा उत्पादन से जुड़ी प्रमुख निर्माणियों का केंद्र रहा है. यहां व्हीकल फैक्ट्री सहित अन्य रक्षा निर्माण इकाइयां सेना के लिए विभिन्न उपकरण और प्रणालियां तैयार करती हैं. वित्त वर्ष 2025-26 में जबलपुर की चार प्रमुख रक्षा निर्माणियों ने मिलकर 4,622 करोड़ रुपए का रिकॉर्ड उत्पादन किया था. इनमें व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर का उत्पादन करीब 1,056 करोड़ रुपए रहा था. नई टी-72 ओवरहॉल परियोजना से जबलपुर की रक्षा क्षेत्र में भूमिका और मजबूत होने की उम्मीद है. इससे टैंकों की मरम्मत और तकनीकी उन्नयन की क्षमता बढऩे के साथ रक्षा क्षेत्र से जुड़े स्थानीय उद्योगों और तकनीकी मानव संसाधन के लिए भी अवसर बढ़ सकते हैं.