आनंद विभाग देगा सार्वभौमिक मानवीय मूल्य विषय पर प्रशिक्षण

                 

Rajendra Parasar

महाविद्यालय के अधिकारियों को 7 सितंबर से दिया जाएगा प्रशिक्षण
भोपाल। प्रदेश शासन के आनंद विभाग, भोपाल द्वारा प्रदेश के शासकीय महाविद्यालयों में कार्यरत अधिकारियों के लिए ‘सार्वभौमिक मानवीय मूल्य’ विषय पर छह दिवसीय आवासीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम आयोजित किया जा रहा है। प्रशिक्षण कार्यक्रम 7 से 12 सितंबर तक केंद्रीय पुलिस प्रशिक्षण अकादमी, कान्हासैया, कोकता, भोपाल में आयोजित होगा।
प्रशिक्षण में शामिल होने वाले अधिकारियों को 6 सितंबर को अपराह्न में केंद्रीय पुलिस प्रशिक्षण अकादमी में अपनी उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। कार्यक्रम में चयनित अधिकारियों की सूची के अनुसार सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। प्रशिक्षणार्थियों को संबंधित महाविद्यालयों द्वारा नियमानुसार यात्रा भत्ता (टीए) एवं दैनिक भत्ता (डीए) भी प्रदान किया जाएगा। प्रशिक्षण में इस बात पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा कि विद्यार्थी पूरे पाठ्यक्रम के दौरान अपने सहपाठियों एवं संकाय सदस्यों के साथ सकारात्मक संबंध विकसित कर सकें। साथ ही उन्हें व्यापक उद्देश्य, आत्म-अन्वेषण और संस्थागत मूल्यों की समझ विकसित करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। संस्थागत नीतियों, प्रक्रियाओं एवं कार्यप्रणाली से परिचित कराकर विद्यार्थियों के समग्र व्यक्तित्व विकास में महाविद्यालय की भूमिका को प्रभावी बनाने का प्रयास किया जाएगा।
विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर जोर
फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का उद्देश्य महाविद्यालयीन वातावरण में विद्यार्थियों को सहज एवं सामंजस्यपूर्ण ढंग से स्थापित करने के साथ संस्थान की संस्कृति, लोकाचार, नीतियों और मूल्यों से परिचित कराना है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को नई भूमिकाओं एवं वातावरण के अनुरूप ढलने में सहायता देने पर जोर दिया जाएगा।
शिकायतें दूर करने दूरदराज जिलों में पहुंचेंगे अफसर
मुख्य सचिव के निर्देश, शिकायतकर्ता से सीधे बात कर जानें हकीकत
भोपाल। सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे लोगों की शिकायतों पर अब राजधानी में बैठकर सिर्फ कागजी कार्रवाई नहीं चलेगी। वरिष्ठ अधिकारियों को खुद दूरस्थ जिलों में पहुंचकर शिकायतों की हकीकत जाननी होगी और मौके पर ही उनके समाधान की पहल करनी होगी। मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को यह स्पष्ट निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शिकायतों के पीछे के कारण तलाशे जाएं और ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जिससे एक ही समस्या को लेकर बार-बार शिकायत करने की जरूरत न पड़े।
मंत्रालय में हुई बैठक में मुख्य सचिव ने सीएम हेल्पलाइन की लंबित शिकायतों के निराकरण को लेकर अधिकारियों को समय-सीमा का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ अधिकारी कुछ शिकायतकर्ताओं से स्वयं फोन पर बात करें और यह सुनिश्चित करें कि शिकायत का निराकरण केवल रिकॉर्ड में नहीं, बल्कि वास्तव में हुआ है। विभागों में लगातार सामने आ रही शिकायतों के कारणों की पहचान कर स्थायी समाधान निकालने पर भी जोर दिया गया।
रोज 55 हजार कॉल, 15 हजार शिकायतें
बैठक में सामने आया कि सीएम हेल्पलाइन पर रोजाना करीब 55 हजार कॉल पहुंच रहे हैं। इनमें लगभग 15 हजार शिकायतें होती हैं। अधिकारियों ने बताया कि अब तक करीब 80 प्रतिशत शिकायतें शिकायतकर्ता की संतुष्टि के बाद बंद कराई जा चुकी हैं। शेष शिकायतों के निराकरण की प्रक्रिया जारी है। वहीं, लोक सेवा गारंटी अभियान के तहत 8 लाख से अधिक आवेदनों का निराकरण किया जा चुका है। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को भारत सरकार से प्राप्त पत्रों के जवाब अनिवार्य रूप से 15 दिन के भीतर देने के निर्देश दिए। उन्होंने मुख्यमंत्री की फ्लैगशिप योजनाओं की जानकारी अद्यतन रखने और आगामी मुख्य सचिव कॉन्फ्रेंस की तैयारियां समय पर पूरी करने को भी कहा।
योजनाओं की जमीनी हकीकत परखी
समीक्षा के दौरान विभागवार योजनाओं की प्रगति की जानकारी ली गई। राजस्व विभाग से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना और खाद्य विभाग से राशन कार्ड तथा राशन दुकानों में खाद्यान्न की उपलब्धता की स्थिति जानी गई। महिला एवं बाल विकास विभाग से प्रधानमंत्री मातृ वंदना, लाड़ली बहना और लाड़ली लक्ष्मी योजना, स्वास्थ्य विभाग से प्रसूति सहायता तथा ऊर्जा विभाग से बिजली आपूर्ति की जानकारी ली गई।
332 करोड़ के बालाघाट प्रोजेक्ट को रफ्तार
बैठक में 332 करोड़ रुपये के बालाघाट विकास प्रोजेक्ट की भी समीक्षा हुई। मुख्य सचिव ने प्रस्तावित कार्यों को गति देते हुए उन्हें शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए। ऊर्जा, स्वास्थ्य, स्कूल शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, जल संसाधन, कौशल विकास, आयुष, खाद्य, मत्स्य, कृषि, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, पशुपालन एवं डेयरी, उद्यानिकी और जनजातीय कार्य विभाग से जुड़े कार्यों की प्रगति पर चर्चा हुई।
मंथन और कलेक्टर कॉन्फ्रेंस की तैयारी के लिए कमेटी
मुख्य सचिव ने विभागीय कार्यों की समीक्षा के आधार पर होने वाले मंथन कार्यक्रम और कलेक्टर कॉन्फ्रेंस की तैयारियों के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की समिति गठित करने के निर्देश दिए। समिति विभागों की प्रगति, लंबित मामलों और आगामी कार्ययोजना को लेकर तैयारियां करेगी।
 व्यापारियों, रहवासियों का सुप्रीम कोर्ट में मजबूती से पक्ष रखेगी सरकार
मुख्यमंत्री ने दिया व्यापारियों को आश्वासन
भोपाल।  राजधानी के प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों में लंबे समय से सीलिंग की कार्रवाई से परेशान व्यापारियों और स्थानीय निवासियों को जल्द ही इस बड़ी मुसीबत से निजात मिल सकती है। मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार पूरी तरह एक्शन मोड में आ गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने साफ किया है कि प्रदेश सरकार व्यापारियों के हितों से कोई समझौता नहीं करेगी और सर्वाेच्च न्यायालय में राज्य का पक्ष पूरी मजबूती के साथ प्रस्तुत किया जाएगा।
त्योहारों के इस माहौल में मुख्यमंत्री के इस आश्वासन से भोपाल के कारोबारी जगत में राहत की नई किरण दिखाई देने लगी है। मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने संकेत दिए कि सरकार इस जटिल और सालों पुरानी कानूनी उलझन का एक स्थायी व सर्वस्वीकार्य हल खोजने की दिशा में काम कर रही है। जनता और व्यापारियों को आश्वस्त करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि पर्व और त्योहारों की खुशियों के बीच हमारी सरकार अपनी हर जिम्मेदारी के प्रति पूरी तरह सजग और प्रतिबद्ध है। भोपाल में सीलिंग से जुड़ी हर एक व्यावहारिक कठिनाई को हम सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रख रहे हैं। सर्वाेच्च न्यायालय के मार्गदर्शन में जो भी सर्वाेत्तम और जनहितैषी फैसला होगा, हम उसे लागू करने के लिए तत्पर हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार व्यापारियों और आम जनता, दोनों के हितों का संतुलन बनाकर सभी पहलुओं पर विचार कर रही है। सुप्रीम कोर्ट में प्रभावी पैरवी कर इस पुरानी समस्या को हमेशा के लिए समाप्त करने का प्रयास किया जाएगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समस्त प्रदेशवासियों को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं भी दीं।
  बंद होते स्कूलों के बीच 10 हजार अतिरिक्त शिक्षक कहां गए?
पटवारी ने सरकारी स्कूलों के विलय पर उठाए तीखे सवाल, मुख्यमंत्री को लिखा पत्र
भोपालं। प्रदेश में सरकारी स्कूलों की घटती संख्या और बच्चों के शिक्षा से दूर होने के मुद्दे पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डा मोहन यादव को पत्र लिखा है। पटवारी ने इसे सामान्य पत्राचार न बताते हुए राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर एक ‘प्रश्न-पत्र’ करार दिया है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि स्कूलों को बंद करने या उनका विलय (मर्ज) करने से शिक्षा की सुलभता पर पड़े प्रभावों पर स्थिति स्पष्ट की जाए।
कांग्रेस नेता ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2024-25 में राज्य में 1,22,120 स्कूल थे, जो 2025-26 में घटकर 1,19,694 रह गए। एक साल में 2,426 स्कूलों की कमी पर सवाल उठाते हुए उन्होंने पूछा कि इनमें से कितने स्कूल पूरी तरह बंद हुए और कितने मर्ज किए गए। इसका सबसे अधिक असर ग्रामीण, गरीब और दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों पर पड़ रहा है। पटवारी ने पूछा कि दूरी बढ़ने के कारण क्या बच्चों के लिए सुरक्षित परिवहन की कोई व्यवस्था की गई है या इसके चलते ड्रॉपआउट दर बढ़ी है?
यूडीआईएसई प्लस के आंकड़ों का जिक्र करते हुए पटवारी ने 15 लाख बच्चों के पढ़ाई से दूर होने के दावे पर सरकार से प्रमाणित जिलावार रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने एक बड़ा प्रशासनिक विरोधाभास रेखांकित कियाकृजहां एक तरफ 2,426 स्कूल कम हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ शिक्षकों की संख्या 6,82,492 से बढ़कर 6,92,820 हो गई है। पटवारी ने सवाल किया कि जब स्कूल घट रहे हैं, तो अतिरिक्त 10 हजार से अधिक शिक्षकों की तैनाती किस आधार पर की गई?
सोशल ऑडिट कराने की मांग
पत्र के अंत में पटवारी ने बंद हुए स्कूलों के संसाधनों के उपयोग का ब्योरा और हर बंद स्कूल का सार्वजनिक सोशल ऑडिट कराने की मांग रखी। उन्होंने मुख्यमंत्री से यह गारंटी मांगी कि अगले तीन वर्षों में ऐसा कोई स्कूल बंद या मर्ज नहीं किया जाएगा, जिससे बच्चों को पढ़ाई के लिए अधिक दूरी तय करनी पड़े।
 पद वृद्धि की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे अभ्यर्थियों को सीजेपी का समर्थन
अभिजीत दीपके बोले आप अकेले नहीं हैं
भोपाल। वर्ग-2 और वर्ग-3 शिक्षक पदों में वृद्धि की मांग को लेकर राजधानी भोपाल के नीलम पार्क में 21 अगस्त से जारी अभ्यर्थियों की भूख हड़ताल को अब सीजेपी के अभिजीत दीपके का समर्थन मिला है। उन्होंने आंदोलनरत महिला अभ्यर्थियों और छात्र अभ्यर्थियों के संघर्ष के प्रति एकजुटता जताते हुए कहा कि उनकी तकलीफ और संघर्ष को पूरी तरह समझा जा सकता है।
अभिजीत दीपके ने कहा कि नीलम पार्क में बैठी बहनें और छात्र अभ्यर्थी लंबे समय से अपने अधिकार और रोजगार की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह सोचना गलत होगा कि आंदोलनकारियों की आवाज केवल धरना स्थल तक सीमित है या बाहर बैठे लोग सिर्फ बातें कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सीजेपी की हमारी टीम जमीन पर लगातार इस पूरे आंदोलन की हर छोटी-बड़ी अपडेट ले रही है। हम स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और हर तरीके से आप सभी के साथ जुड़े हुए हैं।”
दीपके ने आंदोलनकारियों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि भोपाल में चल रहा यह संघर्ष अकेले अभ्यर्थियों का नहीं है, बल्कि उनकी आवाज को मजबूती से उठाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आंदोलन में शामिल बहनों और सभी अभ्यर्थियों को उनका संगठन हर संभव सहयोग और समर्थन देने के लिए उनके साथ खड़ा है। उन्होंने अपील करते हुए कहा कि आप हमसे दूर नहीं हैं। आपकी यह लड़ाई हमारी अपनी लड़ाई है। उन्होंने आगे कहा कि आंदोलनकारियों को खुद को अकेला नहीं समझना चाहिए। उनकी आवाज को सरकार और शिक्षा मंत्री तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास किए जाएंगे।
गौरतलब है कि वर्ग-2 और वर्ग-3 शिक्षक पदों में वृद्धि की मांग को लेकर अभ्यर्थी 21 अगस्त से भोपाल के नीलम पार्क में भूख हड़ताल पर बैठे हैं। आंदोलनकारियों की मांग है कि शिक्षक भर्ती में अधिक पद बढ़ाए जाएं, ताकि पात्र अभ्यर्थियों को रोजगार के अवसर मिल सकें। अब सीजेपी के अभिजीत दीपके के समर्थन से आंदोलन को सामाजिक स्तर पर भी समर्थन मिलने की उम्मीद है।
शिवराज सिंह का रोका काफिला, सौंपा ज्ञापन
वर्ग-1 चयन परीक्षा 2023 के अभ्यर्थियों ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान का नीलम पार्क के पास काफिला रोककर उन्हें ज्ञापन सौंपा। वर्ग-1 के अभ्यर्थियों ने शिवराज सिंह चौहान से कहा कि यह आपके समय की भर्ती है, आपको आना होगा। अभ्यर्थियों का कहना है कि वे वर्ग-1 चयन परीक्षा 2023 में पद बढ़ाने की मांग को लेकर पिछले तीन साल से संघर्ष कर रहे हैं। नीलम पार्क में वर्ग-1 के अभ्यर्थी पिछले 12 दिन से भूख हड़ताल पर हैं।
  शिक्षक  पात्रता परीक्षा की ऑनलाइन आवेदन की तारीख बढ़ी
कंप्यूटर से अनजान शिक्षकों को ऑफलाइन परीक्षा का भी मिलेगा विकल्प
भोपालं।  उच्चतम न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में आयोजित की जा रही विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा में शामिल होने वाले प्रदेश के लगभग डेढ़ लाख अध्यापकों को बड़ी राहत मिली है। अभ्यर्थियों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाकर 18 सितंबर कर दी गई है। इसके साथ ही, कंप्यूटर संचालन में असहज वरिष्ठ शिक्षकों के लिए ऑनलाइन परीक्षा के साथ-साथ पारंपरिक ऑफलाइन परीक्षा का विकल्प देने पर भी सहमति बन गई है।
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत आवेदन की समयावधि 21 अगस्त से 4 सितंबर तय की गई थी। हालांकि, 3 सितंबर की मध्यरात्रि तक प्रदेश भर से मात्र 12 हजार के करीब ही आवेदन प्राप्त हो सके थे। शिक्षकों की कुल संख्या की तुलना में आवेदनों के इस कम आंकड़े को देखते हुए स्कूल शिक्षा विभाग और मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल ने आपसी सहमति से तिथियों का विस्तार करने का निर्णय लिया। संशोधित समय-सारणी जल्द ही एमपी आनलाइन और ईएसबी के आधिकारिक पोर्टल पर जारी कर दी जाएगी। फॉर्म में संशोधन और त्रुटि सुधार के लिए 20 सितंबर तक का समय दिया जाएगा।
वरिष्ठ शिक्षकों की मांग पर मिला ऑफलाइन विकल्प
विभिन्न शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधिमंडलों ने हाल ही में स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह और लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह से मुलाकात कर परीक्षा पद्धति में व्यावहारिक ढील देने की मांग की थी। संगठनों का तर्क था कि वर्ष 1998 से 2009 के बीच नियुक्त कई वरिष्ठ शिक्षक डिजिटल प्रणाली और कंप्यूटर उपयोग में सहज नहीं हैं। उच्च स्तरीय बैठक के बाद विभाग ने कंप्यूटर आधारित परीक्षा के साथ ऑफलाइन विकल्प भी उपलब्ध कराने का निर्णय लिया।
नियुक्ति की निरंतरता के लिए परीक्षा अनिवार्य
उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा मई 2026 में सुनाए गए फैसले के तहत 1998 से 2009 के दौरान नियुक्त शिक्षकों और अध्यापकों के लिए सेवा में निरंतरता बनाए रखने हेतु पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य किया गया है। इसी आदेश के परिपालन में ईएसबी के माध्यम से इस परीक्षा का आयोजन किया जा रहा है।
एक हजार परीक्षा शुल्क पर जताई आपत्ति
प्रक्रिया में शामिल हो रहे शिक्षकों ने 1,000 रुपये के आवेदन शुल्क पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। शिक्षक संघों का कहना है कि यह परीक्षा किसी नई भर्ती के लिए नहीं, बल्कि अदालती आदेश के तहत ली जा रही है। इसलिए इसका पूरा वित्तीय भार सरकार को उठाना चाहिए और आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह निशुल्क होनी चाहिए। हालांकि, शुल्क माफी को लेकर शासन की ओर से फिलहाल कोई निर्णय नहीं आया है।
 भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण से भारत की वैश्विक पहचान, प्रमुख लीला स्थल बनेंगे भव्य तीर्थ
मुख्यमंत्री निवास में मनी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, मयूर नृत्य और मलखंभ के करतबों से भक्तिरस में सराबोर हुए दर्शक
भोपाल। भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण भारत की वैश्विक अस्मिता और गौरवशाली सनातन संस्कृति के प्रतीक हैं। राज्य सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रदेश में प्रभु राम और श्रीकृष्ण के चरण कमलों से पवित्र हुए सभी स्थलों को भव्य तीर्थ के रूप में विकसित करने के लिए पूरी तरह संकल्पित है। यह बात मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज मुख्यमंत्री निवास में आयोजित श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व के अवसर पर कही। समारोह की शुरुआत में मुख्यमंत्री ने बाल गोपाल का विधिवत पूजन व जलाभिषेक किया। इसके बाद मटकी फोड़कर राधा-कृष्ण की वेशभूषा में आए नन्हें बच्चों को माखन खिलाया और उपहार बांटे।
संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने श्रीकृष्ण पाथेय योजना का उल्लेख करते हुए बताया कि उज्जैन के महर्षि सांदीपनि आश्रम, जानापाव और महिदपुर सहित अन्य संबंधित स्थानों को जीवंत तीर्थ स्थल बनाया जा रहा है। साथ ही चित्रकूट धाम को भी भव्य स्वरूप दिया जा रहा है। उन्होंने सांदीपनि आश्रम से जुड़े ऐतिहासिक प्रसंगों, सुदर्शन चक्र एवं पांचजन्य शंख की प्राप्ति और श्रीकृष्ण-सुदामा की अमर मित्रता का उल्लेख करते हुए जीवन में शिक्षा, धैर्य और संयम के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि तत्कालीन समय में गुजरात के प्रभाषपाटण (वर्तमान में द्वारिका) क्षेत्र में जम जाति के आक्रांताओं का आतंक फैला था। जब आचार्य सांदीपनि ने उनके बच्चों को शिक्षा देने के इनकार कर दिया तो आक्रांताओं ने उनके पुत्र को बंधक बना लिया। इसके बाद महर्षि सांदीपनि उज्जैन लौट आए और इस कठिन काल में भी 11 वर्षों तक विद्यार्थियों को शिक्षित करते रहे। भगवान श्रीकृष्ण और बलराम ने शिक्षा पूर्ण होने पर मथुरा जाकर जरासंध से युद्ध किया। आचार्य सांदीपनि के बताने पर श्रीकृष्ण जानापाव गए और भगवान परशुराम से सुदर्शन चक्र प्राप्त किया। श्रीकृष्ण ने तभी निश्चय कर लिया था कि गुरु के बेटे को जम आक्रांताओं से मुक्त कर उन्हें गुरु दक्षिणा के रूप में सकुशल लौटाएंगे।
वैश्विक मंच पर आर्थिक रूप से मजबूत हो रहा भारत
विश्व पटल पर भारत की बढ़ती साख का जिक्र करते हुए डॉ. यादव ने कहा कि वैश्विक स्तर पर तनाव और युद्ध के हालातों के बीच भी भारत 7.8 प्रतिशत की विकास दर से आगे बढ़ रहा है। भारत ने आर्थिक वृद्धि के मामले में अमेरिका, चीन और जापान जैसे देशों को पीछे छोड़ दिया है।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियां रहीं आकर्षण का केंद्र
आख्यान पर्व में जबलपुर के जुगलकिशोर नामदेव और उनके साथियों ने मनमोहक मयूर नृत्य एवं भजनों की प्रस्तुति से पूरे माहौल को कृष्णमय कर दिया। वहीं उज्जैन से आए खिलाड़ियों ने भारत सिंह पालीवाल के निर्देशन में मलखंभ पर हैरतअंगेज करतब दिखाकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री को वैदिक घड़ी भी भेंट की गई।
माटी गणेश-सिद्ध गणेश अभियान का किया शुभारंभ
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद एवं नर्मदा समग्र के संयुक्त तत्वावधान में माटी गणेश-सिद्ध गणेश अभियान का शुभारंभ किया। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा अभियान की संकल्पना पर केन्द्रित पोस्टर का विमोचन भी किया। परिषद द्वारा पर्यावरण संरक्षण की नवाचारी पहल करते हुए ष्माटी गणेश-सिद्ध गणेशष् अभियान चलाया जायेगा। अभियान में पर्यावरण हितैषी संस्थान नर्मदा समग्र द्वारा प्रशिक्षण के माध्यम से प्रदेश के समस्त 313 विकासखण्ड में परषिद के नेटवर्क से जुड़ी नवांकुर सखियों को प्रशिक्षित किया जायेगा। प्रशिक्षित सखियों द्वारा पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से अपने ग्रामों में स्थानीय महिलाओं को प्रेरित-प्रशिक्षित कर मिट्टी के 10 लाख गणेण की घर-घर स्थापना करायी जायेगी।
 

 
 
 
 
 
 
 
 
 

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