ईडी की कार्रवाई, फर्जी खातों और दस्तावेजों के जरिए सरकारी राशि हड़पने का आरोप
भोपाल। मुख्यमंत्री कन्या विवाह एवं शादी सहायता योजना में करीब 30 करोड़ रुपये के कथित फर्जीवाड़े और धन शोधन के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने सिरोंज जनपद पंचायत के तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) शोभित त्रिपाठी को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत गिरफ्तार किया है। विशेष अदालत ने आरोपी अधिकारी को 9 सितंबर तक ईडी की हिरासत में भेज दिया है।
यह मामला भोपाल आर्थिक अपराध अनुसंधान ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आधार पर आगे बढ़ा। जांच के अनुसार, मुख्यमंत्री कन्या विवाह एवं शादी सहायता योजना के तहत पंजीकृत निर्माण श्रमिकों की पात्र पुत्रियों के विवाह के लिए 51 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। आरोप है कि सिरोंज में वर्ष 2019 से नवंबर 2021 तक पदस्थ रहने के दौरान शोभित त्रिपाठी ने अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर कूटरचित प्रकरण तैयार कर करीब ’’30.18 करोड़ रुपये की सरकारी राशि स्वीकृत और जारी’’ की।
फर्जी पहचान और बैंक खातों का इस्तेमाल
जांच एजेंसी के मुताबिक, सरकारी राशि के कथित गबन के लिए फर्जी पहचान पत्र और दस्तावेजों के आधार पर बैंक खाते खोले गए। इसके अलावा अन्य लोगों के बैंक खातों का कथित रूप से दुरुपयोग कर सहायता राशि स्थानांतरित की गई और बाद में रकम नकद निकाली गई। ईडी अब इन लेन-देन की पूरी कड़ी और रकम के अंतिम लाभार्थियों का पता लगाने में जुटी है।
लॉकडाउन में भी अपात्रों को भुगतान का आरोप
जांच में यह भी सामने आने की बात कही गई है कि कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान भी बड़ी संख्या में संदिग्ध और अपात्र हितग्राहियों के खातों में योजना की सहायता राशि ट्रांसफर की गई। इससे पूरे मामले में फर्जी हितग्राहियों और दस्तावेजों के इस्तेमाल को लेकर जांच का दायरा बढ़ गया है।
छापेमारी में मिले थे डिजिटल साक्ष्य
मामले में ईडी ने 3 अक्टूबर 2025 को कई ठिकानों पर छापेमारी कर महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए थे। अब तत्कालीन सीईओ को हिरासत में लेकर एजेंसी करीब 30 करोड़ रुपये की कथित राशि के मनी ट्रेल की जांच कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि रकम किन-किन बैंक खातों में पहुंची और कथित घोटाले में अन्य कौन से अधिकारी, कर्मचारी और बिचौलिए शामिल थे।
मंडी के गेट पर ही होगी उपज की परख, अनाज की गुणवत्ता का मिलेगा रिपोर्ट कार्ड
सही दाम न मिलने पर मुख्य द्वार से ही फसल वापस ले जा सकेंगे किसान
भोपाल। प्रदेश की कृषि उपज मंडियों में अपनी फसल बेचने आने वाले किसानों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है। राज्य सरकार ने मंडियों में उपज की गुणवत्ता जांचने वाली असेइंग लैब को अब अंदर के बजाय सीधे मंडी के प्रवेश द्वार (गेट) पर ही स्थापित करने का निर्णय लिया है। इस बदलाव से किसान मंडी परिसर के भीतर प्रवेश करने से पहले ही अपने अनाज की गुणवत्ता और संभावित कीमत का सटीक आकलन कर सकेंगे।
वर्तमान में प्रदेश की ई-नाम योजना से जुड़ी 139 कृषि उपज मंडियों में असेइंग लैब अंदरूनी हिस्सों में स्थित हैं। लैब के उपयुक्त स्थान पर न होने के कारण किसानों को फसल बिक्री से पहले गुणवत्ता परीक्षण का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा था। व्यापारियों द्वारा सही मूल्य न दिए जाने की स्थिति में भी किसानों के लिए मंडी के अंदर से ट्रॉलियां वापस ले जाना व्यावहारिक रूप से बेहद कठिन और खर्चीला साबित होता था। इसी समस्या को दूर करने के लिए राज्य कृषि विपणन बोर्ड ने सभी आंचलिक कार्यालयों के संयुक्त संचालकों और कार्यपालन यंत्रियों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि सभी असेइंग लैब को तत्काल प्रभाव से मंडी के प्रवेश द्वार अथवा किसी अन्य सुलभ स्थान पर स्थानांतरित किया जाए। साथ ही, इस नई व्यवस्था का किसानों के बीच व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि वे इस सुविधा का अधिक से अधिक लाभ उठा सकें।
प्रवेश से पहले ही सटीक जानकारी
किसान को मंडी में ट्रॉली ले जाने से पहले ही अपनी उपज की गुणवत्ता की जांच रिपोर्ट और बाजार के अनुसार संभावित दाम की जानकारी मिल जाएगी। यदि किसान को मंडी में अनाज के सही दाम मिलते न दिखें, तो वह मुख्य द्वार से ही ट्रॉली वापस ले जा सकेगा। इससे अंदर लगने वाले जाम, समय की बर्बादी और अतिरिक्त भाड़े के खर्च से बचत होगी।
विकल्प चुनने की आजादी
गुणवत्ता रिपोर्ट के आधार पर यदि किसान को लगता है कि किसी अन्य मंडी में उसकी फसल का बेहतर मूल्य मिल सकता है, तो वह तुरंत दूसरी मंडी का रुख कर सकता है या दाम बढ़ने तक फसल को रोक सकता है।
नर्सिंग कॉलेज की मान्यता पर उठे सवाल, सीबीआई जांच की मांग
निर्माणाधीन भवन में 120 सीटों की मान्यता पर सवाल
भोपाल। प्रदेश के बहुचर्चित नर्सिंग कॉलेज मामले के बीच सीधी जिले की कुसमी तहसील के भादौरा स्थित आयुष्मान कॉलेज ऑफ नर्सिंग एवं पैरामेडिकल कॉलेज की मान्यता को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं। एनएसयूआई ने कॉलेज की मान्यता प्रक्रिया, भवन, फैकल्टी के अनुभव प्रमाण-पत्र और संचालन से जुड़े दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए सीबीआई के भोपाल स्थित संयुक्त निदेशक, मुख्यमंत्री और संबंधित विभागीय अधिकारियों को शिकायत दी है।
एनएसयूआई प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार का आरोप है कि कॉलेज को उस समय मान्यता दी गई, जब उसका भवन निर्माणाधीन था। शिकायत के अनुसार कॉलेज ने बीएससी नर्सिंग की 60 और जीएनएम नर्सिंग की 60, कुल 120 सीटों के लिए मान्यता का आवेदन किया था। परमार ने सवाल उठाया कि यदि निरीक्षण के दौरान भवन, प्रयोगशालाएं और अन्य जरूरी सुविधाएं निर्धारित मानकों के अनुरूप उपलब्ध नहीं थीं, तो निरीक्षण दल ने कॉलेज को मान्यता के योग्य किस आधार पर पाया। शिकायत में कॉलेज के संचालन और प्रबंधन से जुड़े लोगों की भूमिका की भी जांच की मांग की गई है। परमार ने भाजपा सांसद के बेटे अनुप मिश्रा और बहू बीना मिश्रा समेत अन्य लोगों के कॉलेज संचालन से जुड़े होने का आरोप लगाया है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
फैकल्टी के प्रमाण-पत्र भी जांच के घेरे में
एनएसयूआई ने कॉलेज द्वारा प्रस्तुत फैकल्टी के अनुभव प्रमाण-पत्रों की सत्यता पर भी सवाल उठाए हैं। संगठन का आरोप है कि कुछ प्रमाण-पत्र फर्जी हो सकते हैं और इन्हें संबंधित अस्पतालों व संस्थानों से सीधे सत्यापित कराया जाना चाहिए। संगठन ने मांग की है कि कॉलेज के स्वामित्व, आर्थिक लेन-देन, मान्यता संबंधी दस्तावेज, भवन व प्रयोगशालाओं का भौतिक सत्यापन तथा निरीक्षण दल और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की स्वतंत्र जांच हो। एनएसयूआई ने कहा कि जांच के दौरान विद्यार्थियों के शैक्षणिक भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और अनियमितता या फर्जी दस्तावेज साबित होने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाए।
दिग्विजय ने जूस पिलाकर तुड़वाया चययनित शिक्षको का अनशन
शिक्षा मंत्री से फोन पर बात कर मंगलवार तक समाधान का दिया आश्वासन
भोपाल। राजधानी के नीलम पार्क में पदवृद्धि और स्थायी नियुक्ति की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठे चयनित शिक्षकों (वर्ग 2 और वर्ग 3) का आंदोलन आज शनिवार को खत्म हो गया। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की मध्यस्थता और आश्वासन के बाद आंदोलनकारियों ने अपनी भूख हड़ताल वापस ले ली।
दिग्विजय सिंह ने धरना स्थल से ही प्रदेश के शिक्षा मंत्री से दूरभाष पर चर्चा की और आगामी मंगलवार तक मांगों के सकारात्मक निराकरण का भरोसा दिलाते हुए शिक्षकों को जूस पिलाकर अनशन समाप्त कराया। धरना स्थल पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार की नीतियों पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि देश और विशेष रूप से भाजपा शासित राज्यों में शिक्षकों के साथ अन्याय हो रहा है। प्रदेष सरकार को टीईटी की अनिवार्यता से जुड़ा फैसला तत्काल वापस लेना चाहिए।
विभाग में 1.41 लाख पद खाली, तुरंत हों नियुक्तियां
पूर्व मुख्यमंत्री ने शिक्षा व्यवस्था के आंकड़े साझा करते हुए कहा कि शिक्षा विभाग में वर्तमान में 1 लाख 41 हजार से अधिक पद रिक्त पड़े हैं। सरकार यदि इच्छाशक्ति दिखाए तो वर्ग 2 और 3 के 43 हजार खाली पदों पर आज ही भर्ती की जा सकती है, जिसमें से आधे पद सीधी भर्ती और शेष आधे प्रमोशन से भरे जाने चाहिए। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि 99 प्रतिशत तक अंक हासिल करने वाले योग्य अभ्यर्थियों और अतिथि शिक्षकों को नियुक्तियों के लिए भटकना पड़ रहा है।
शांत नहीं हुए तो चला जाऊंगा
कार्यक्रम के दौरान उस समय असहज स्थिति बन गई जब धरना स्थल पर पहुंचे दिग्विजय सिंह के सामने ही कुछ आंदोलनकारी नारेबाजी करने लगे। इस पर उन्होंने सख्त नाराजगी जाहिर करते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि आप लोग शांत नहीं होंगे तो मैं यहां से चला जाऊंगा। पूर्व मुख्यमंत्री के इस कड़े रुख के बाद आंदोलनकारी तुरंत शांत हो गए और इसके पश्चात कार्यक्रम सुचारू रूप से संपन्न हुआ।
जीतू बोले आप लड़ो, हम साथ खड़े हैं
दिग्विजय सिंह के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी भी नीलम पार्क पहुंचे। उन्होंने आंदोलन कर रहे शिक्षक अभ्यर्थियों से मुलाकात की और उनकी मांगों का समर्थन किया। पटवारी ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि शिक्षक दिवस के मौके पर शिक्षक अभ्यर्थी राजधानी में 16 दिन से भूखे बैठे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार शिक्षा व्यवस्था को लगातार कमजोर कर रही है। उन्होंने कहा,आप अपनी लड़ाई लड़ो, हम आपके साथ खड़े हैं। मुख्यमंत्री वर्ग-2 और वर्ग-3 शिक्षक भर्ती में पद बढ़ाइए और इन अभ्यर्थियों को न्याय दीजिए। पटवारी ने कहा कि त्योहार के समय भी महिला अभ्यर्थी अपने घर नहीं जा सकीं और भूख हड़ताल पर बैठी रहीं। उन्होंने सरकार से तत्काल पद बढ़ाने की मांग की।
8 सितंबर की बैठक पर टिकी नजर
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह से फोन पर चर्चा की। शिक्षा मंत्री ने बताया कि अभ्यर्थियों की मांगों से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को अवगत कराया जा चुका है। बातचीत के बाद मंगलवार, 8 सितंबर को वर्ग-2 और वर्ग-3 के अभ्यर्थियों के प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक करने पर सहमति बनी। अब आंदोलनकारियों और सरकार के बीच 8 सितंबर को होने वाली बैठक महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसमें वर्ग-2 और वर्ग-3 के प्रतिनिधि अपनी मांगें रखेंगे। दिग्विजय सिंह भी अभ्यर्थियों के साथ बैठक में शामिल होंगे।