तांबे की कीमतों ने तोड़ा ऑल-टाइम हाई रिकॉर्ड, जानें भारतीय अर्थव्यवस्था पर क्या पड़ेगा असर

नई दिल्ली. वैश्विक कमोडिटी बाजार में तांबे की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है और इसके दाम ऐतिहासिक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं. अमेरिका के बाहर वैश्विक स्तर पर तांबे की आपूर्ति में भारी कमी की आशंका और डॉलर की कमजोरी के बीच निवेशकों व ट्रेडर्स की जोरदार खरीदारी ने कीमतों को नई ऊंचाइयों पर धकेल दिया है. जानकारों का मानना है कि यदि वैश्विक आपूर्ति की स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो आने वाले दिनों में यह तेजी कई अन्य औद्योगिक क्षेत्रों को भी अपनी चपेट में ले सकती है.

लंदन मेटल एक्सचेंज पर नया कीर्तिमान, $14,539 के पार पहुंचा भाव

लंदन मेटल एक्सचेंज पर बेंचमार्क कॉपर की कीमतें $14,533 प्रति मीट्रिक टन के सर्वकालिक उच्च स्तर को छू गईं, जिसने जनवरी में बने $14,527.50 के पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया. इसके बाद सुबह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉपर 1.17 फीसदी की और बढ़त के साथ 14,539.65 डॉलर प्रति मीट्रिक टन पर कारोबार करता दिखा. जानकारों के अनुसार, अमेरिकी टैरिफ नीतियों को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण उत्पादक और ट्रेडर्स भारी मात्रा में कॉपर अमेरिका भेज रहे हैं, जिससे वैश्विक बाजार में इसकी किल्लत पैदा हो गई है और दाम आसमान छू रहे हैं.

भारत में बढ़ेगी मैन्युफैक्चरिंग लागत, इलेक्ट्रॉनिक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट होंगे महंगे

तांबे की रिकॉर्ड तोड़ महंगाई का सीधा और बड़ा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पडऩे की आशंका है. भारत अपनी रिफाइंड कॉपर की अधिकांश जरूरतों को पूरा करने के लिए विदेशी आयात पर निर्भर है. ग्लोबल मार्केट में आई इस तेजी के चलते घरेलू बाजार में कॉपर फ्यूचर्स के भाव 1,379 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर को पार कर गए हैं. तांबे के महंगे होने से देश का व्यापार घाटा बढऩे का खतरा पैदा हो गया है. इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, बिजली उपकरण और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की लागत में भारी इजाफा होगा, जिसका अंतिम बोझ आम जनता की जेब पर महंगाई के रूप में पड़ सकता है.


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