सरकार ने जारी की गाइडलाइन, अदालत तय करेगी काम और अवधि
भोपाल। प्रदेश सरकार ने छोटे और कम गंभीर अपराधों में दोषी पाए जाने वाले लोगों को जेल भेजने के बजाय समाजोपयोगी कार्यों से जोड़ने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इसके तहत ऐसे दोषियों को परिस्थितियों और अपराध की प्रकृति के आधार पर सामुदायिक सेवा (कम्युनिटी सर्विस) की सजा दी जा सकेगी। गृह विभाग ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के प्रावधानों के तहत इसके क्रियान्वयन के लिए विस्तृत नियम और आधिकारिक गाइडलाइन जारी की है।
नई व्यवस्था में अदालत दोषी को सार्वजनिक हित से जुड़े विभिन्न कार्य सौंप सकती है। सजा का स्वरूप तय करते समय अदालत दोषी की उम्र, शारीरिक क्षमता, पारिवारिक परिस्थितियों और अपराध से जुड़े तथ्यों को ध्यान में रखेगी। अदालत सामुदायिक सेवा का आदेश जारी करते समय उसकी अवधि, कार्य का स्थान और किए जाने वाले काम का स्पष्ट उल्लेख करेगी। दोषी की क्षमता और अपराध की प्रकृति के अनुरूप उसे अलग-अलग प्रकार के समाजोपयोगी कार्य दिए जा सकेंगे। इनमें सरकारी जमीन या सार्वजनिक स्थलों पर पौधरोपण और पौधों की देखरेख, सरकारी अस्पतालों, स्कूलों, पुलिस थानों, पंचायत भवनों और नगरीय निकायों के परिसरों में सफाई व्यवस्था में सहयोग जैसे काम शामिल हैं। इसके अलावा सरकारी पुस्तकालयों में अभिलेखों को व्यवस्थित करने और सरकारी संपत्तियों की देखरेख जैसे कार्य भी कराए जा सकते हैं।
महिला सुरक्षा और गरिमा का विशेष ध्यान
सरकार की गाइडलाइन में सामुदायिक सेवा के दौरान महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं। दोषियों के साथ किसी भी तरह का अमानवीय या प्रताड़नापूर्ण व्यवहार नहीं किया जा सकेगा। पूरी प्रक्रिया के दौरान उनके साथ मानवीय और गरिमापूर्ण व्यवहार करना अनिवार्य होगा।
निगरानी अधिकारी रखेगा रोजाना का रिकॉर्ड
सामुदायिक सेवा की निगरानी के लिए प्रत्येक मामले में एक निगरानी अधिकारी नियुक्त किया जाएगा। अधिकारी दोषी की रोजाना उपस्थिति और किए गए कार्य का रिकॉर्ड रखेगा तथा निर्धारित प्रारूप में इसकी रिपोर्ट संबंधित अदालत को सौंपेगा। यदि दोषी सामुदायिक सेवा करने से इनकार करता है, काम में लापरवाही बरतता है या निर्धारित नियमों का उल्लंघन करता है, तो निगरानी अधिकारी इसकी सूचना अदालत को देगा। नियमों के उल्लंघन की स्थिति में अदालत सामुदायिक सेवा की सजा निरस्त कर आगे की कानूनी कार्रवाई कर सकती है, जिसमें जेल भेजे जाने का प्रावधान भी लागू हो सकता है।
इन छह अपराधों में मिलेगा सामुदायिक सेवा का विकल्प
भारतीय न्याय संहिता के तहत शुरुआती चरण में छह तरह के मामलों में सामुदायिक सेवा का विकल्प रखा गया है। इनमें 5,000 रुपये से कम की चोरी, जिसमें आरोपी पहली बार पकड़ा गया हो और चोरी की रकम या सामान लौटाने को तैयार हो। नशे की हालत में सार्वजनिक स्थल पर हुड़दंग या शांति भंग करना। छोटे स्तर के मानहानि से जुड़े मामले। कानून के विरुद्ध किसी लोक सेवक का व्यापारिक गतिविधियों में लिप्त होना। किसी लोक सेवक को उसके कर्तव्य के निर्वहन से रोकने या अनुचित दबाव बनाने के उद्देश्य से आत्महत्या का प्रयास करना, अदालत की उद्घोषणा या समन के बावजूद निर्धारित समय पर न्यायालय में उपस्थित न होना हैं।
सात अधिकारियों को आईपीएस अवॉर्ड, 2016 बैच हुआ अलॉट
भोपाल। मध्यप्रदेश पुलिस सेवा के सात वरिष्ठ अधिकारियों को भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) में पदोन्नत किया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने चयन सूची 2025 के आधार पर इन अधिकारियों को मध्यप्रदेश कैडर आवंटित करते हुए इनका आईपीएस बैच वर्ष 2016 निर्धारित कर दिया है।
गृह मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, इन सभी अधिकारियों की वरिष्ठता का निर्धारण आईपीएस वरिष्ठता विनियमन नियम, 1988 के तहत किया गया है। पदोन्नत होने वाले अधिकारियों में निमिषा पांडे, मलय जैन, अमित सक्सेना, मनीषा पाठक सोनी, सुमन गुर्जर, सव्यसाची सराफ और समर वर्मा के नाम शामिल हैं। चयन सूची 2025 में शामिल इन अधिकारियों को आईपीएस कैडर मिलने के बाद अब विभागीय स्तर पर नई जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी।
बिना इजाजत जल संसाधन मंत्री से नहीं मिल सकेंगे अधिकारी-कर्मचारी
उल्लंघन पर होगी अनुशासनात्मक कार्रवाई
भोपाल। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की मनमर्जी से मंत्री से मिलने की आदत पर अब पूरी तरह ब्रेक लग गया है। जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट की कड़ी आपत्ति के बाद विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए बिना पूर्व अनुमति मंत्री से मुलाकात पर रोक लगा दी है। अब यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी बिना इजाजत मंत्री से मिलता पाया गया, तो इसे शिष्टाचार का उल्लंघन मानते हुए उसके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
यह निर्देश जल संसाधन विभाग के प्रमुख अभियंता कार्यालय के अधीक्षण यंत्री (प्रशासन) आशीष महाजन द्वारा जारी किए गए हैं। दरअसल, मंत्री सिलावट ने एक पत्र के जरिए बिना अनुमति मिलने पहुंचने वाले विभागीय अमले पर गहरी नाराजगी जताई थी। उन्होंने इस अव्यवस्था को तत्काल नियंत्रित करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद विभाग ने सभी मुख्य अभियंताओं और परियोजना संचालकों को अपने-अपने अधीनस्थ कार्यालयों में इस आदेश का सख्ती से पालन कराने के निर्देश जारी कर दिए हैं।
कर्मचारी नेताओं ने बताया तुगलकी फरमान’
विभाग के इस नए फरमान के सामने आते ही कर्मचारी संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि जब विभागीय स्तर पर समस्याओं और शिकायतों की सुनवाई नहीं होती, तभी कोई कर्मचारी अंतिम उम्मीद के साथ मंत्री के पास पहुंचता है। कर्मचारी प्रतिनिधियों ने इस आदेश को तुगलकी फरमान करार देते हुए सवाल उठाया है कि यदि कर्मचारी अपनी जायज विभागीय समस्याएं बताने के लिए भी अपने ही मंत्री तक नहीं पहुंच सकेंगे, तो उनकी सुनवाई कहां होगी? कार्रवाई की चेतावनी से कर्मचारियों में डर और असंतोष का माहौल है।
चिकित्सा महाविद्यालयों की मेस में अलग-अलग किचन के निर्देश
भोपाल। आगामी धार्मिक पर्वों को ध्यान में रखते हुए चिकित्सा महाविद्यालयों की मेस में शाकाहारी एवं मांसाहारी भोजन के लिए अलग-अलग किचन रखने के निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य सभी विद्यार्थियों की धार्मिक भावनाओं एवं आस्थाओं का सम्मान सुनिश्चित करना तथा किसी की भावनाएं आहत न हों, यह सुनिश्चित करना है। संचालक चिकित्सा शिक्षा के द्वारा जारी निर्देश में कहा गया है कि जिन चिकित्सा महाविद्यालयों की मेस में मांसाहारी भोजन बनाया जाता है, वहां शाकाहारी एवं मांसाहारी भोजन के लिए अलग-अलग किचन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
श्रीनिवास तिवारी के विधानसभा संचालन संबंधी अनेक प्रसंग आज भी प्रेरणादायी
मुख्यमंत्री ने पूर्व विधानसभा अध्यक्ष की जयंती पर किया नमन
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पूर्व विधानसभा अध्यक्ष स्व. श्रीनिवास तिवारी की जयंती पर मध्यप्रदेश विधानसभा के सेन्ट्रल हॉल में उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सार्वजनिक जीवन और लोकतांत्रिक परंपराओं में उनके योगदान को स्मरण किया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्रद्धेय श्रीनिवास तिवारी का स्मरण करते हुए कहा कि तिवारी ने विद्यार्थी जीवन में स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया। सन् 1952 में वे समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी के रूप में विंध्य प्रदेश विधानसभा के सदस्य निर्वाचित हुए। मध्यप्रदेश राज्य की राजनीति में उनका लंबा कार्यकाल रहा। तिवारी 1993 से 2003 तक मध्यप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष रहे। इससे पहले मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह मंत्रिमण्डल में भी उन्होंने मंत्री पद के दायित्व का निर्वाहन किया। तिवारी सफेद शेर के नाम से प्रसिद्ध रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विधानसभा परिसर में मीडिया से चर्चा में यह विचार व्यक्त किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सर्वाेच्च स्थान विधानसभा का है। तिवारी ने अपनी प्रशासनिक दक्षता, लोकतांत्रिक परम्पराओं और विधायिनी प्रक्रियाओं के ज्ञान के आधार पर विधानसभा के मान-सम्मान का विशेष ध्यान रखा। विधानसभा संचालन से संबंधित उनके अनेक प्रसंग आज भी प्रेरणादायी है। ऐसे नेता का स्मरण कर हम सब गौरवान्वित हैं।
खाद्य तेल की खपत घटाने की अपील के बीच 100 करोड़ दीये जलाने पर उठाए सवाल
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता का आरोप, दीप प्रज्वलन से बढ़ेगा 200 करोड़ का आयात बोझ
भोपाल। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता अभय दुबे ने केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए खाद्य तेल की खपत और सरकारी स्तर पर आयोजित दीप प्रज्वलन कार्यक्रम को लेकर हमला बोला है। मीडिया से चर्चा करते हुए दुबे ने प्रधानमंत्री द्वारा 11 मई 2026 को देशवासियों से खाद्य तेल की खपत में 10 प्रतिशत की कटौती करने की अपील का स्मरण कराया। उन्होंने कहा कि एक तरफ आयात बिल कम करने के लिए जनता से खान-पान की आदतें बदलने को कहा जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ बड़े पैमाने पर तेल की खपत वाले आयोजन किए जा रहे हैं।
कांग्रेस प्रवक्ता ने बताया कि मध्य प्रदेश में नगर निगम, नगरपालिका और नगर परिषदों के प्रत्येक वार्ड सहित ग्राम पंचायतों के सांस्कृतिक व महत्वपूर्ण स्थलों पर शाम 7 बजे दीप प्रज्वलित करने के सरकारी निर्देश जारी किए गए हैं। दुबे ने मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए दावा किया कि देशभर में लगभग 100 करोड़ दीये जलाए जाने की योजना है। यदि एक दीये में औसतन 15 मिलीलीटर तेल का उपयोग होता है, तो कुल 1.5 करोड़ लीटर खाद्य तेल खर्च होगा। मौजूदा बाजार दरों के अनुसार इसका वित्तीय भार 200 करोड़ रुपये से अधिक रहेगा। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि इस आयोजन से लगभग 39 हजार टन कार्बन उत्सर्जन होगा, जिससे पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
बच्चों की अकाल मौत और बाढ़ पीड़ितों की सहायता की मांग
प्रदेश में हाल ही में घटी दुखद घटनाओं का उल्लेख करते हुए दुबे ने कहा कि सागर में जहरीली शराब, बालाघाट में आदिवासी बच्चों की अकाल मृत्यु, इंदौर में दूषित पानी और कफ सिरप कांड से प्रभावित परिवारों को उत्सव के बजाय सहायता की जरूरत है। भाजपा नेता नितिन नवीन के मध्य प्रदेश दौरे और उनके गृह राज्य बिहार में आई बाढ़ का जिक्र करते हुए दुबे ने कहा कि दीप प्रज्वलन पर खर्च होने वाली राशि को बिहार के बाढ़ पीड़ितों या मध्य प्रदेश की त्रासदियों के प्रभावित परिवारों की मदद में लगाया जाना चाहिए था।
शिक्षक भर्ती, अभ्यर्थियों ने खून से पत्र लिखकर मांगी इच्छामृत्यु की अनुमति
भोपाल। राजधानी के डीपीआई कार्यालय के सामने वर्ग-2 और वर्ग-3 शिक्षक भर्ती में पद बढ़ाने की मांग को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन आज 28वें दिन भी जारी रहा। इस बीच, सात दिन से निर्जला अनशन पर बैठे ब्यावरा (राजगढ़) निवासी अभ्यर्थी नरेंद्र राजपूत की हालत लगातार गंभीर होती जा रही है। अभ्यर्थियों के अनुसार, निर्जला व्रत के कारण वे बुधवार रात कई बार बेहोश हुए।
प्रशासनिक उपेक्षा से आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने अपने खून से पत्र लिखकर प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, राज्यपाल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से इच्छामृत्यु की अनुमति मांगी है। अस्पताल जाने से इनकार कर रहे नरेंद्र राजपूत को सीने में दर्द और उच्च रक्तचाप की शिकायत है। उन्होंने आरोप लगाया कि तबीयत बिगड़ने के बावजूद गुरुवार सुबह तक कोई डॉक्टरी टीम जांच के लिए नहीं पहुंची। पुलिस अधिकारियों से चिकित्सीय सहायता की गुहार लगाने के बाद भी सुनवाई नहीं हुई।
उपहार में मांग रहे अपनी मौत
अनशनकारी नरेंद्र राजपूत ने प्रधानमंत्री के जन्मदिन का उल्लेख करते हुए कहा कि लंबे समय से बेरोजगारी झेल रहे अभ्यर्थी उन्हें कोई उपहार देने की स्थिति में नहीं हैं, इसलिए वे उपहार स्वरूप अपनी मौत मांग रहे हैं। अभ्यर्थियों का स्पष्ट कहना है कि जब तक पदों में वृद्धि का ठोस आश्वासन नहीं मिलता, उनका प्रदर्शन और अनशन जारी रहेगा।
पीड़ित को त्वरित राहत देना पुलिस की प्राथमिकता, थानों का करें औचक निरीक्षण
डीजीपी ने एसडीओपी की भूमिका को बताया पुलिस व्यवस्था की अहम कड़ी
भोपाल। मध्यप्रदेश पुलिस मुख्यालय में हाल ही में प्रशिक्षण पूरा कर चुके 10 सहायक पुलिस अधीक्षकों (आईपीएस) ने महानिदेशक (डीजीपी) कैलाश मकवाणा से सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर डीजीपी ने नए अधिकारियों से संवाद करते हुए पुलिस नेतृत्व, मैदानी कार्यप्रणाली और पर्यवेक्षण के गुर साझा किए।
डीजीपी मकवाणा ने एसडीओपी को पुलिसिंग का पहला और महत्वपूर्ण पर्यवेक्षण स्तर करार दिया। उन्होंने कहा कि जनता की शिकायतों का समयबद्ध समाधान हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी है। पीड़ित की समस्या को प्रथम चरण में ही समझकर उसके निराकरण का प्रयास किया जाना चाहिए ताकि आमजन को त्वरित न्याय मिल सके। कार्यप्रणाली में पारदर्शिता पर बल देते हुए डीजीपी ने अधिकारियों को निर्देष दिए कि थानों का नियमित और औचक निरीक्षण करें ताकि जमीनी हकीकत सामने आए, किसी भी व्यक्ति को अनावश्यक रूप से निरुद्ध न रखा जाए, थानों में लगे सीसीटीवी कैमरे हर हाल में कार्यशील स्थिति में रहने चाहिए, अनुशासित बल के लिए थाना परेड को नियमित रूप से आयोजित किया जाए।
तकनीक और संवेदनशील नेतृत्व पर जोर
अपराध अनुसंधान में आधुनिक तकनीकी संसाधनों के प्रभावी उपयोग का आह्वान करते हुए उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे वरिष्ठों के निरीक्षण का हिस्सा बनकर व्यावहारिक पुलिसिंग सीखें। उन्होंने नेतृत्व को परिभाषित करते हुए कहा कि एक सफल अधिकारी समस्याओं को टालने के बजाय उनकी जड़ तक पहुंचता है और अधीनस्थों का मार्गदर्शन कर संगठन में विश्वास का वातावरण निर्मित करता है।