
personUpdesh Awasthee 9/17/2026 01:16:00 PM2 minute read
भोपाल, 17 सितंबर 2026: इतिहास गवाह है, अहंकार हमेशा हानिकारक होता है, लेकिन फिर भी प्रत्येक सत्तारूढ़ व्यक्ति को अहंकार जरूर होता है। अपने आप को मध्य प्रदेश का सबसे ईमानदार, सभ्य और शालीन मंत्री जताने वाले इंदर सिंह परमार, अहंकार में इतने डूब गए हैं कि उन्होंने, निवेदन करने आए अतिथि विद्वानों को उनके खिलाफ चुनाव लड़ने की चुनौती दे डाली।
प्रदर्शन का असर दिखाई देने लगा है
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में अतिथि विद्वानों ने अपनी पुरानी मांग को लेकर नया प्रदर्शन शुरू कर दिया है। वह सब उच्च शिक्षा मंत्री के बंगले के बाहर जाकर बैठ गए हैं। लगातार प्रदर्शन चल रहा है और उनके प्रदर्शन का असर भी दिखाई देने लगा है। मंत्री इंदर सिंह परमार सहित उनके तमाम रणनीतिकार, जिनके फीडबैक के आधार पर मंत्री महोदय को अहंकार हुआ है, तनाव में दिखाई दे रहे हैं। अतिथि विद्वानों का कहना है कि 20-20 साल सेवा देने के बावजूद उन्हें सेवाओं से हटाया जा रहा है और नियमितीकरण के नाम पर वादाखिलाफी हुई है। उनका कहना है कि कई अतिथि विद्वान UGC के मानकों को पूरा करने वाले और PhD धारक हैं। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि स्पष्ट नीति बनने तक किसी भी अतिथि विद्वान को सेवा से अलग न किया जाए।
यहां उल्लेख करना जरूरी है कि अतिथि विद्वानों को साल 2018 में नियमितीकरण का वादा किया गया था। कांग्रेस और भाजपा दोनों की ओर से अतिथि विद्वानों को आश्वासन दिया गया था। राहुल गांधी, ज्योतिरादित्य सिंधिया, कमलनाथ और शिवराज सिंह चौहान सबने एक ही बात दोहराई थी, लेकिन आज तक आश्वासन पूरा नहीं हुआ। आश्वासन पूरा होना तो दूर की बात, आश्वासन पूरा करने के लिए कोई प्रक्रिया भी शुरू नहीं हुई है। लेकिन इस बार अतिथि विद्वानों ने बिल्कुल सही दिशा में कदम उठाया है। उच्च शिक्षा मंत्री के बंगले के बाहर प्रदर्शन, एक ऐसी लोकेशन है जो हर किसी को नोटिस में आ रही है।