नई दिल्ली. वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी के दम पर भारतीय शेयर बाजार ने शुक्रवार को शानदार रिकवरी की. पिछले सत्र की भारी गिरावट से उबरते हुए बेंचमार्क सूचकांकों ने एक बार फिर बढ़त का रुख किया. संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनओ) की बैठक के इतर अमेरिका और ईरान के बीच एक चरणबद्ध परमाणु समझौते की ओर बढ़ने की खबरों ने बाजार की धारणा को सबसे ज्यादा मजबूती दी.
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 315 अंक यानी 0.43 प्रतिशत की तेजी के साथ 73,895 के स्तर पर बंद हुआ. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 77 अंक (0.34 प्रतिशत) जोड़कर 23,140 के स्तर पर सफलतापूर्वक बंद होने में कामयाब रहा. बैंकिंग सेक्टर में भी तगड़ी खरीदारी देखी गई, जिसके चलते निफ्टी बैंक 389 अंक या 0.26 प्रतिशत चढ़कर 55,762 के रिकॉर्ड स्तर पर सेटल हुआ.
कच्चे तेल में गिरावट से मिली बड़ी राहत
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तेजी के पीछे का मुख्य कारण कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट है. पिछले दो सत्रों में 7 प्रतिशत से ज्यादा उछलने के बाद, ब्रेंट क्रूड आज फिसलकर $105.6 प्रति बैरल के करीब आ गया. वहीं, अमेरिकी क्रूड वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट भी $94 प्रति बैरल से नीचे ट्रेड करता दिखा. पश्चिम एशिया से तेल की आपूर्ति फिर से सामान्य होने की उम्मीदों ने भारतीय बाजार को बड़ी राहत दी, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है.
सेक्टोरल प्रदर्शन और व्यापक बाजार की स्थिति
चढऩे वाले सेक्टर : निफ्टी ऑटो, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (0.87%) और रियल्टी (0.70%) इंडेक्स में सबसे ज्यादा मजबूती दर्ज की गई.
दबाव वाले सेक्टर: आईटी, मीडिया, फार्मा और हेल्थकेयर इंडेक्स में बिकवाली का दबाव रहा.
मिडकैप और स्मॉलकैप: व्यापक बाजार में आज अंतर देखने को मिला. जहां निफ्टी मिडकैप 100 में 0.23% की गिरावट आई, वहीं एनएसई स्मॉलकैप 100 सूचकांक 0.17त्न बढ़कर बंद हुआ. निफ्टी नेक्स्ट 50 में भी 0.39% की वृद्धि देखी गई.
विशेषज्ञों का ये है आकलन
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि शुक्रवार की यह रिकवरी किसी बड़े जोखिम सुधार के बजाय मुख्य रूप से लार्ज-कैप शेयरों में चुनिंदा वैल्यू बाइंग की वजह से हुई है. लार्ज-कैप और मिड-कैप के बीच का अंतर यह दर्शाता है कि निवेशक अभी भी बेहद सतर्क हैं और चुनिंदा तौर पर ही पैसा लगा रहे हैं. आने वाले दिनों में बाजार की स्थिरता इस बात पर निर्भर करेगी कि कच्चा तेल स्थिर रहता है या नहीं, और क्या विदेशी निवेशकों की बिकवाली पर ब्रेक लगता है.