पदोन्नति में दोहरे मापदंड को लेकर शिक्षकों में आक्रोश

 जनजातीय विभाग में प्रमोशन, स्कूल शिक्षा में प्रक्रिया ठप
भोपाल। प्रदेश में शिक्षकों की पदोन्नति को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग और जनजातीय कार्य विभाग के बीच जारी प्रशासनिक असमानता का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। समान योग्यता, अर्हता और सेवा शर्तों के आधार पर नियुक्त होने के बावजूद दोनों विभागों के शिक्षकों के साथ अलग-अलग व्यवहार किए जाने पर शासकीय शिक्षक संगठन मध्यप्रदेश ने कड़ा विरोध जताया है। संगठन ने सवाल उठाया है कि जब एक ही राज्य में सेवा शर्तें समान हैं, तो स्कूल शिक्षा विभाग के शिक्षक पदोन्नति के लाभ से वंचित क्यों हैं?
शासकीय शिक्षक संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेन्द्र कौशल के अनुसार, जनजातीय कार्य विभाग में पिछले दो महीनों के भीतर ही 296 शिक्षकों को पदोन्नत किया गया है। इनमें सहायक शिक्षक से उच्च श्रेणी शिक्षक और उच्च श्रेणी शिक्षक से व्याख्याता पद पर पदोन्नति शामिल है। इसके विपरीत, स्कूल शिक्षा विभाग में प्राथमिक, सहायक, माध्यमिक और उच्च श्रेणी शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया लंबे समय से लंबित पड़ी है। संगठन का कहना है कि मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद स्कूल शिक्षा विभाग में पदोन्नति आदेश जारी न होना चिंताजनक है। इससे कर्मचारियों के बीच भारी असंतोष पनप रहा है। इसके अलावा, लगभग दो वर्ष पूर्व जिन्हें उच्च पद का प्रभार सौंपा गया था, उन्हें भी अब तक नियमित पदोन्नति का लाभ नहीं मिल सका है। लंबे समय से उच्च पदों का दायित्व संभाल रहे शिक्षकों को उनका जायज हक न मिलना उनके सेवा हितों के साथ खिलवाड़ है।
ल्ंबित पदोन्नति प्रक्रिया शुरू की जाए
शासकीय शिक्षक संगठन ने राज्य सरकार और स्कूल शिक्षा विभाग से मांग की है कि इस दोहरे रवैये को समाप्त कर लंबित पदोन्नति प्रक्रिया को तत्काल शुरू किया जाए। साथ ही उच्च पद का प्रभार संभाल रहे पात्र शिक्षकों को भी शीघ्र नियमित पदोन्नति दी जाए ताकि शिक्षकों के मन में व्याप्त असंतोष दूर हो सके।
 


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