भोपाल। प्रदेश कांग्रेस कमेटी में संगठनात्मक फेरबदल और नई नियुक्तियों की प्रक्रिया का औपचारिक आगाज हो चुका है। पार्टी ने बड़ा कदम उठाते हुए धर्मेंद्र सिंह चौहान को एक बार फिर मध्य प्रदेश किसान कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। प्रकोष्ठ के सभी पदों को भंग किए जाने के दो महीने बाद आई इस पहली आधिकारिक नियुक्ति से पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों में खासा उत्साह देखा जा रहा है।
गौरतलब है कि करीब दो महीने पहले प्रदेश संगठन में कसावट लाने और नए सिरे से गठन की कवायद के तहत कांग्रेस ने अपने सभी प्रकोष्ठों (विभागों) को भंग कर दिया था। इस एकतरफा फैसले के कारण धर्मेंद्र सिंह चौहान को भी अपना पद छोड़ना पड़ा था। हालांकि, संगठन के प्रति उनकी सक्रियता और सांगठनिक अनुभव को देखते हुए पार्टी ने उन पर एक बार फिर भरोसा जताया है। राजनीतिक गलियारों में इस नियुक्ति को आगामी चुनावी और राजनीतिक रणनीतियों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
जल्द हो सकती है अन्य प्रकोष्ठों में घोषणाएं
किसान कांग्रेस की कमान दोबारा धर्मेंद्र सिंह चौहान को सौंपे जाने के बाद अब सियासी हलकों में यह चर्चा तेज हो गई है कि कांग्रेस पार्टी जल्द ही अन्य विभागों और प्रकोष्ठों में भी नए पदाधिकारियों की घोषणा कर सकती है। पार्टी के इस कदम से राज्य में संगठन को जमीनी स्तर पर और अधिक मजबूत करने की उम्मीद जताई जा रही है।
जनता के पैसे की बर्बादी, श्वेत पत्र जारी करे सरकार
भोपाल। प्रदेश कांग्रेस ने राज्य सरकार द्वारा लगभग 575 करोड़ रुपये की लागत से नए जेट विमान और हेलीकॉप्टर की खरीदी पर गंभीर सवाल उठाए हैं। प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने इसे जनता के धन की फिजूलखर्ची करार देते हुए सरकार से खरीद प्रक्रिया, प्रारंभिक और अंतिम लागत तथा इंटीरियर पर हुए खर्च का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक करने की मांग की है।
कांग्रेस का आरोप है कि एक ओर जहां सरकार पर भारी कर्ज का बोझ है और सामाजिक सुरक्षा पेंशन, महिला समूहों के मानदेय तथा ठेकेदारों के भुगतान लंबित हैं, वहीं दूसरी ओर विलासिता पर पानी की तरह पैसा बहाया जा रहा है। नायक ने सतना और मैहर की नल-जल योजना (लगभग 3200 करोड़ रुपये) में भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए कहा कि भारी राशि निकालने के बावजूद गांवों तक पानी नहीं पहुंचा है। इसके अलावा, विमान खरीदी में कथित तौर पर 100 करोड़ रुपये के कमीशन और लागत में आए भारी अंतर की पारदर्शी जांच की मांग की गई है। कांग्रेस ने दो टूक कहा है कि जनता के टैक्स का पैसा वीआईपी शौक के बजाय राज्य की बुनियादी समस्याओं, कुपोषण, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी प्राथमिकताओं पर खर्च होना चाहिए।
भोजताल कैचमेंट एरिया और प्रस्तावित भू-उपयोग बदलाव के खिलाफ किसान
भोपाल। राजधानी भोपाल में भोजताल कैचमेंट एरिया और प्रस्तावित भू-उपयोग (लैंड यूज़) परिवर्तन को लेकर किसानों का विरोध और तेज हो गया है। भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में आज शुक्रवार को 78 से अधिक गांवों के सैकड़ों किसान शाहपुरा स्थित नगर तथा ग्राम निवेश (टी एंड सीपी) कार्यालय पहुंचे और प्रदर्शन किया। किसानों का आरोप है कि प्रस्तावित नए नियमों और बदलावों से उनकी निजी ज़मीनें और पारंपरिक खेती पूरी तरह प्रभावित हो जाएगी। प्रदर्शनकारी किसानों ने अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर ज़मीन का भू-उपयोग कृषि ही बनाए रखने की पुरज़ोर मांग की है।
भारतीय किसान संघ की हुजूर तहसील इकाई के बैनर तले दोपहर में टी एंड सीपी कार्यालय पहुंचे किसानों का कहना है कि कैचमेंट एरिया से जुड़े कड़े नियमों का सीधा असर उनकी ज़मीन के अधिकारों और आजीविका पर पड़ेगा। हुजूर तहसील अध्यक्ष अखिलेश मीणा ने कहा कि कैचमेंट एरिया और भू-उपयोग में बदलाव के कारण किसानों के अधिकारों का हनन हो रहा है। प्रशासन को कोई भी नया प्रावधान लागू करने से पहले प्रभावित किसानों की आपत्तियों और धरातल की वास्तविक स्थिति का गंभीरता से संज्ञान लेना चाहिए। किसानों ने अधिकारियों को ज्ञापन सौंपते हुए याद दिलाया कि वर्ष 1995 के मास्टर प्लान और वर्ष 2031 के ड्राफ्ट प्लान में उनकी ज़मीनों का भू-उपयोग स्पष्ट रूप से कृषि दर्ज था। अब प्रस्तावित बदलावों के बाद खेती-किसानी पर कई तरह के प्रतिबंध लगने की आशंका है।
किसान संघ की एकजुटता की अपील
भारतीय किसान संघ की हुजूर तहसील इकाई ने क्षेत्र के सभी किसानों से एकजुट रहकर अपने अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज़ उठाने का आह्वान किया है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि किसानों की मांगें पूरी नहीं की गईं और भू-उपयोग कृषि नहीं रखा गया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
वीआईटी भोपाल के नाम और लोकेशन के भ्रम पर मानवाधिकार आयोग सख्त
राज्य सरकार से मांगा जवाब
भोपाल। वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (वीआईटी) के नाम और उसकी वास्तविक लोकेशन को लेकर उपजे विवाद में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर अतिरिक्त रिपोर्ट और कार्रवाई प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। इसके लिए 29 नवंबर की समय-सीमा तय की गई है।
यह पूरा मामला नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार की शिकायत पर आधारित है। शिकायत में कहा गया था कि विश्वविद्यालय का नाम वीआईटी भोपाल है, जबकि इसका मुख्य परिसर भोपाल में न होकर सीहोर जिले के कोठरी कलां में स्थित है। इस विरोधाभास के कारण प्रवेश लेने वाले छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है।
बीते 22 अक्टूबर को हुई सुनवाई के दौरान आयोग ने राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट का अध्ययन किया। आयोग ने यह माना कि विश्वविद्यालय का नाम मध्य प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2007 के प्रावधानों के तहत तय किया गया है। हालांकि, मुख्य चिंता वैधानिकता से अधिक इस बात की है कि क्या इस नामकरण से दूर-दराज से आने वाले विद्यार्थियों को लोकेशन को लेकर गलतफहमी हो सकती है या नहीं। आयोग ने पाया कि पूर्व में भेजी गई रिपोर्ट में इस बिंदु पर स्पष्ट स्थिति स्पष्ट नहीं की गई थी। इसके साथ ही, आयोग ने संस्थान की प्रचार सामग्रियों, आधिकारिक वेबसाइट और विज्ञापनों में परिसर की वास्तविक स्थिति को प्रदर्शित करने के तौर-तरीकों पर भी सवाल उठाए हैं। शिकायत में वीआईटी परिसर में कथित तौर पर नदंनजीवतप्रमक क्लीनिक के संचालन और अतीत में हुई अशांति की घटनाओं का भी जिक्र था। आयोग ने निर्देश दिए हैं कि राज्य सरकार अपनी आगामी रिपोर्ट में इन सभी गंभीर बिंदुओं और उन पर की गई जांच की अद्यतन स्थिति को भी स्पष्ट करे।
पंचायत चुनावों की आहट, पंचायत राज व्यवस्था में दिखेंगे बदलाव
नवंबर तक नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी में सरकार
भोपाल। प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों की आहट के साथ ही प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। राज्य सरकार ने समय पर चुनाव संपन्न कराने के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। प्रदेश की लगभग 23 हजार ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने से पहले अप्रैल-मई 2027 में चुनाव कराए जाने की योजना है। खास बात यह है कि इस बार चुनाव से पूर्व राज्य की पंचायत राज व्यवस्था में कई ऐतिहासिक संशोधन किए जा रहे हैं, जो ग्रामीण शासन की दिशा और दशा दोनों बदल देंगे।
बालाघाट जिले की ग्राम पंचायत गर्रा में आयोजित सरपंच सम्मेलन में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल ने इन बदलावों पर मुहर लगाई। उन्होंने बताया कि सरकार नवंबर तक नई व्यवस्था लागू करने के लिए तेजी से काम कर रही है। नए प्रावधानों के तहत ग्राम सभा की अनिवार्यता बनी रहेगी, लेकिन उसके कई प्रमुख अधिकार अब पंचायत समितियों को हस्तांतरित किए जाएंगे। इस संबंध में प्रशासनिक स्तर पर नियम बदलने की प्रक्रिया जारी है और अगले एक महीने में आधिकारिक अधिसूचना जारी हो सकती है।
आत्मनिर्भर बनेंगी पंचायतें, स्थानीय स्तर पर लगा सकेंगी कर
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने और पंचायतों को वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से सरकार उन्हें नगरपालिकाओं की तर्ज पर स्थानीय स्तर पर टैक्स वसूलने का अधिकार देने जा रही है। पंचायतें किन-किन मदों में कर लगा सकेंगी और उनकी दरें क्या होंगी, इसका विस्तृत ढांचा जल्द सार्वजनिक किया जाएगा। मंत्री पटेल ने स्पष्ट किया कि समय से पहले चुनाव कराने का मुख्य ध्येय नई पंचायतों को सुचारू रूप से कार्यभार सौंपना है।
जून-जुलाई 2022 में हुए थे पिछले चुनाव
राज्य में पिछला चुनाव जून-जुलाई 2022 में संपन्न हुआ था। इस बार चुनाव के लिए आयोग द्वारा नामांकन/मतदाता सूची 1 जनवरी 2027 की स्थिति के आधार पर मतदाता सूची तैयार की जाएगी। मतदान की तारीखों की घोषणा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा बाद में किए जाने की संभावना है।
नई मत्स्य नीति से दोगुना होगा उत्पादन, प्रदेश बनेगा मत्स्य निर्यात का प्रमुख केंद्र
मत्स्य पालन को फूड प्रोसेसिंग और एमएसएमई से जोड़ेगी सरकार
भोपाल। मध्यप्रदेश की नदियों, जलाशयों और तालाबों की समृद्ध जल संपदा अब प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति देने का माध्यम बनेगी। राज्य सरकार मत्स्य पालन को पारंपरिक गतिविधि से आगे बढ़ाकर निवेश, आधुनिक तकनीक, खाद्य प्रसंस्करण और निर्यात से जोड़ने की तैयारी में है। इसी दिशा में नई एकीकृत मत्स्योद्योग नीति-2026 के तहत प्रदेश में मछली उत्पादन दोगुना करने और एक लाख नए केज कल्चर स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इससे मत्स्य पालकों, विक्रेताओं, परिवहनकर्ताओं और इस क्षेत्र से जुड़े उद्यमियों के लिए रोजगार एवं आय के नए अवसर सृजित करने की योजना है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय सभागार में आयोजित नेशनल फिशरीज इन्वेस्टर्स एंड एक्सपोर्टर्स कॉन्क्लेव-2026 में यह बात कही। केंद्रीय पंचायती राज, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह और केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल की मौजूदगी में कॉन्क्लेव का शुभारंभ किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की जल संपदा को बेहतर प्रबंधन के जरिए बहुउद्देशीय संसाधन बनाया जाएगा, जिससे पेयजल, सिंचाई, पशुपालन, मत्स्य उत्पादन, जल पर्यटन और जलीय जीवों के संरक्षण को एक साथ बढ़ावा मिल सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि नई नीति के तहत मत्स्य उद्योग को फूड प्रोसेसिंग और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र से जोड़ा जाएगा। मछली उत्पादन के बाद प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, पैकेजिंग और विपणन जैसी गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाएगा। निवेशकों को भूमि आवंटन, तकनीकी सहायता और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की भी योजना है। सरकार का उद्देश्य उत्पादन बढ़ाने के साथ मत्स्य उत्पादों की बाजार पहुंच और निर्यात क्षमता का विस्तार करना है।
योजना को प्रशासकीय स्वीकृति
उन्होंने बताया कि रायसेन जिले के बारना जलाशय में निजी निवेश और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत स्थापित 500 केज कल्चर का शुभारंभ किया गया। कॉन्क्लेव में मध्यप्रदेश मत्स्य पालन निवेश एवं निर्यात मार्गदर्शिका-2026 और एक्सपोर्ट पोर्टल की मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का विमोचन भी हुआ। इसके अलावा जलाशयों और अमृत सरोवरों के एकीकृत विकास की योजना को प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई।
सिंचाई का रकबा 100 लाख हेक्टेयर करने का लक्ष्य
डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में सिंचाई का रकबा बढ़कर 69 लाख हेक्टेयर हो गया है, जिसे 100 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य है। केन-बेतवा लिंक और पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी जोड़ो परियोजनाओं से जल उपलब्धता बढ़ने के साथ मत्स्य उत्पादन को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत जल स्रोतों के पुनरुद्धार और संरक्षण के लिए 10 हजार करोड़ रुपये के कार्य किए गए हैं। संरक्षित वन क्षेत्रों में भी बड़े तालाब विकसित करने की योजना है, ताकि वन्यजीवों को पानी उपलब्ध होने के साथ भूजल स्तर सुधारने में मदद मिले। मुख्यमंत्री ने जलीय जैव विविधता के संरक्षण पर जोर देते हुए नदियों में जलीय जीवों की उपलब्धता बढ़ाने की जरूरत बताई।
भारत के मत्स्य उत्पादन में 106 प्रतिशत वृद्धिः केंद्रीय मंत्री
केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कहा कि भारत वर्ष 2014 के 95.7 लाख टन मत्स्य उत्पादन से बढ़कर लगभग 198 लाख टन के स्तर पर पहुंच गया है। उनके अनुसार, इस अवधि में उत्पादन में 106 प्रतिशत वृद्धि हुई है और भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मत्स्य उत्पादक देश बन चुका है। उन्होंने मध्यप्रदेश की एकीकृत मत्स्योद्योग नीति-2026 को अंतर्देशीय मत्स्य उत्पादन और निर्यात विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। कॉन्क्लेव में निवेशकों, निर्यातकों और स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करने के साथ हितग्राहियों को लाभ वितरित किए गए तथा मत्स्य क्षेत्र के विकास पर केंद्रित फिल्में भी प्रदर्शित की गईं।
कांग्रेस देश में अराजकता फैलाने का कर रही प्रयास
‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान से भाजपा बेनकाब करेगी विपक्ष की नीतियां
भोपाल। भाजपा के प्रदेश संगठन महामंत्री चंद्रशेखर ने अनूपपुर जिला कार्यालय में आयोजित बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस ने अपनी राजनीतिक कार्यशैली से देश को लगातार नुकसान पहुंचाया है। आज विपक्ष आंदोलनों की आड़ में देश में अराजकता की नींव रख रहा है। लोकतंत्र बचाने का ढोंग कर संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल खड़े करना कांग्रेस की राजनीति का मुख्य हिस्सा बन चुका है। भाजपा इस दुर्भावनापूर्ण राजनीति के खिलाफ ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान चलाकर जनता के बीच सच्चाई उजागर करेगी।
प्रदेश संगठन महामंत्री ने कहा कि कांग्रेस ने स्वतंत्रता के बाद से ऐसे राजनीतिक मॉडल पर काम किया जिससे समाज में भेदभाव को बढ़ावा मिला। आज चुनावी हार के बाद ईवीएम और संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आतंकवाद, नक्सलवाद और घुसपैठ के खिलाफ हो रही सख्त कार्रवाई का विरोध कर विपक्ष अपनी नकारात्मक मानसिकता का परिचय दे रहा है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे इन सभी मुद्दों पर जनता के बीच जाकर तथ्यात्मक संवाद करें। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार का मुख्य उद्देश्य केवल राजनीतिक लाभ कमाना नहीं, बल्कि राष्ट्रहित और समाज कल्याण है। डिजिटल तकनीक का विस्तार, राष्ट्रीय सुरक्षा और गरीब कल्याणकारी योजनाएं सरकार की प्राथमिकता हैं।