नोएडा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट: 25 साल पहले हुई परिकल्पना, अब पहले चरण का उद्घाटन, जानें क्या खासियत

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: Kirtivardhan Mishra Updated Sat, 28 Mar 2026 12:44 PM IST

साल 2001 में उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह की ओर से जेवर में ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल और एविएशन हब (टीआईएएच) रूप में एयरपोर्ट प्रस्तावित किया गया था। अब 25 साल बाद नोएडा के जेवर में यह एयरपोर्ट उद्घाटन के लिए तैयार है। 

Noida International Airport in Jewar inauguration Uttar Pradesh Major features from History to Connect explain
नोएडा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज (28 मार्च 2026) को गौतमबुद्ध नगर के जेवर में बने नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का उद्घाटन कर दिया। इस मौके पर उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और यूपी के उपमुख्यमंत्री समेत कई नेता और अधिकारी मौजूद रहे। प्रधानमंत्री मोदी ने ही 2021 में इसकी नींव रखी थी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने इस हवाई अड्डे की परिकल्पना की थी। करीब 25 साल के बाद उनकी परिकल्पना धरातल पर उतरने जा रही है।  

ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर नोएडा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट परियोजना क्या है? इसका निर्माण किसने किया है? हवाई अड्डे के लिए जेवर को ही क्यों चुना गया? इसे बनाने की योजना कब से पाइपलाइन में थी? इसके अलावा हर साल इस एयरपोर्ट में कितनी आवाजाही का अनुमान लगाया गया है? इसमें कितना खर्च आएगा? भविष्य में इस एयरपोर्ट के विस्तार की क्या योजना है? आइये जानते हैं...

क्या है नोएडा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट परियोजना?

वर्ष 2001 में उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह की ओर से जेवर में ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल और एविएशन हब (टीआईएएच) रूप में एयरपोर्ट प्रस्तावित किया गया था। तत्कालीन केंद्र की अटल बिहारी सरकार ने अप्रैल 2003 में एयरपोर्ट की स्थापना के लिए तकनीकी-व्यवहार्यता रिपोर्ट को स्वीकार किया था। हालांकि, इसके बाद एयरपोर्ट बनाने की यह योजना ठंडे बस्ते में चली गई। 
नवंबर 2021 में जब इस एयरपोर्ट का उद्घाटन हुआ था, तब यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे पश्चिमी उत्तर प्रदेश और एनसीआर क्षेत्र के लिए महत्वाकांक्षी योजना करार दिया था। माना जाता है कि सरकार ने इस एयरपोर्ट के जरिए आसपास के छोटे शहरों खासकर अलीगढ़, मेरठ, मथुरा और अन्य को बेहतर उड़ान कनेक्टिविटी मुहैया कराने का लक्ष्य रखा है।
इस एयरपोर्ट का निर्माण कौन कर रहा है?
नोएडा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के निर्माण के लिए नीलामी 2019 में की गई थी। इसमें ज्यूरिख एयरपोर्ट ने अदाणी ग्रुप के मुकाबले बेहतर बोली लगाई और निर्माण का कॉन्ट्रैक्ट हासिल किया। अक्तूबर 2020 में यूपी सरकार ने नीलामी जीतने वाले कंपनी से एक विशेष छूट का कॉन्ट्रैक्ट भी साइन किया था।


नोएडा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट लिमिटेड एक साझा वेंचर है, जिसमें उत्तर प्रदेश सरकार का 37.5 फीसदी, नोएडा प्राधिकरण का 37.5 फीसदी, ग्रेटर नोएडा औद्योगिक प्राधिकारण का 12.5 फीसदी और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक प्राधिकरण की 12.5 फीसदी शेयर होल्डिंग है।

कैसी है एयरपोर्ट की कनेक्टविटी?

एयरपोर्ट को यमुना एक्सप्रेस-वे के करीब बनाया गया है, जो कि ग्रेटर नोएडा और आगरा को सीधे जोड़ता है। इस एयरपोर्ट को बल्लभगढ़ के जरिए ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे से जोड़ा जाएगा। इस एक्सप्रेस-वे को बल्लभगढ़ के करीब दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे से जोड़ा जाएगा। वहीं, एयरपोर्ट को खुर्जा-जेवर के बीच एनएच-91, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, नोएडा से नोएडा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट तक प्रस्तावित मेट्रो एक्सटेंशन से भी कनेक्ट किया जाएगा। इसके अलावा दिल्ली-वाराणसी के बीच प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का एक स्टेशन एयरपोर्ट के करीब ही प्रस्तावित है। एक्सप्रेसवे के समानांतर बनी एक 60 मीटर चौड़ी सड़क को 100 मीटर तक चौड़ा किया जाएगा।


नोएडा एयरपोर्ट को गाजियाबाद-जेवर के बीच बनने वाले एक रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम से भी जोड़ा जा रहा है, जो कि 71.1 किमी लंबा होगा। इस मार्ग पर 11 स्टेशन होंगे और इसके निर्माण में 16 हजार करोड़ रुपये का खर्च आने का अनुमान है। इसके अलावा आने वाले समय में हिसार के एयरपोर्ट और नोएडा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट को जोड़ने वाली रेलवे लाइन का निर्माण भी किया जा रहा है।

कब से हो रही थी एयरपोर्ट को बनाने की तैयारी?

नोएडा के करीब एक एयरपोर्ट बनाने की चर्चा करीब 25 साल पुरानी है।

एयरपोर्ट से यूपी को कितने हिस्से को फायदा?

नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों के लिए हवाई सेवा का ट्रांजिट पॉइंट बन सकता है। मसलन, नोएडा, ग्रेटर नोएडा के करीब रहने वाली बड़ी जनसंख्या इस एयरपोर्ट का इस्तेमाल करेगी। इसके अलावा पश्चिमी यूपी के शहर, जैसे अलीगढ़, बुलंदशहर, मेरठ, मथुरा, आगरा समेत अन्य जिलों के लोगों के लिए यह एयरपोर्ट अहम साबित होगा। वहीं, दिल्ली एयरपोर्ट पर ट्रैफिक और भीड़ के मद्देनजर नोएडा एयरपोर्ट दिल्ली और गुरुग्राम के निवासियों के लिए भी अहम ट्रांजिट पॉइंट बनकर उभर सकता है।
नोएडा एयरपोर्ट को पहले फेज में हर वर्ष 1.2 करोड़ यात्रियों की क्षमता वहन करने के हिसाब से तैयार किया जा रहा है। पहले फेज के पूरा होने की टाइमलाइन तीन साल रखी गई थी। यानी एयरपोर्ट निर्माण का पहला फेज 29 सितंबर 2024 तक पूरा किया जाना था। हालांकि, कोरोनावायरस महामारी के चलते इसमें कुछ देरी हुई है और अब इसका उद्घाटन होने जा रहा है।  
हालांकि, इस फेज का उद्घाटन होने के बाद अगले सभी फेज के लिए टाइमलाइन को कम करने का लक्ष्य रखा गया है।

क्या है नोएडा एयरपोर्ट के लिए भविष्य की योजना?

  • नोएडा एयरपोर्ट में हर फेज में एयरपोर्ट की यात्री क्षमता को बढ़ाया जाएगा और चौथे फेज के पूरा होने तक यह हवाई अड्डा हर साल 7 करोड़ यात्री की क्षमता तक पहुंच जाएगा। इसके सभी फेज पूरे होने का समय 30 साल निर्धारित किया गया है।
  • पहले फेज में जेवर एयरपोर्ट को बनाने का खर्च करीब 5730 करोड़ रुपये है, जो कि 30 साल के अंतराल और चार फेज पूरे होने के बाद 29,560 करोड़ तक पहुंच जाएगा।

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