पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव ने भारत में एलपीजी (LPG) और तेल आपूर्ति को लेकर गहरी चिंता पैदा कर दी है। ईरान की होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की चेतावनी ने वैश्विक स्तर पर हड़कंप मचा दिया है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% एलपीजी इसी समुद्री मार्ग से आयात करता है। हालांकि, सरकार और प्रशासन लगातार यह दावा कर रहे हैं कि देश में गैस की कोई कमी नहीं है और लोगों को पैनिक बाइंग (घबराहट में खरीदारी) नहीं करनी चाहिए।
सरकार के दावों में कितनी सच्चाई है? देश के अलग-अलग शहरों में कैसे हालात हैं, अमर उजाला ने सात राज्यों के 20 शहरों से अपने 20 संवाददाताओं के जरिए जमीनी हालात समझने की कोशिश की...
रामपुर
ग्रामीण इलाकों में स्थिति और भी दयनीय है। गैस की कमी के कारण एनजीओ ने स्कूलों में मिड-डे मील की आपूर्ति बंद कर दी।
पीलीभीत
तीन दिनों से ऑनलाइन बुकिंग बंद है और ग्रामीण क्षेत्रों में होम डिलीवरी व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है।
गोरखपुर
लोग रात 3 बजे से कतारों में लग रहे हैं और प्रशासन ने कालाबाजारी के आरोप में दो गैस एजेंसियों को सीज भी किया है।
अमरोहा
5 लाख उपभोक्ताओं के लिए स्थिति कष्टप्रद है और कतारें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं।
लुधियाना
भारी मांग के कारण बुकिंग पोर्टल तक प्रभावित हो रहे हैं और छोटे रेहड़ी-पटरी संचालकों का काम बंद होने की कगार पर हैं।
देहरादून
सप्लाई से अधिक डिमांड होने के कारण दोपहर तक ही एजेंसियों पर 'गैस खत्म' के बोर्ड टंग जाते हैं।
शिमला
घरेलू गैस तो मिल रही है, लेकिन कमर्शियल गैस की कमी से पर्यटन व्यवसाय प्रभावित हो रहा है।
पटना
लोग सुबह 5 बजे से ही सड़क पर सिलिंडर लेकर अपनी बारी का इंतजार करते हैं, जो सरकार के 'सब ठीक है' के दावे के विपरीत है।
इंदौर
कमर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई पर रोक लगने से होटल और प्रसिद्ध '56 दुकान' जैसे खानपान के केंद्र गहरे संकट में हैं। स्थिति यह है कि कई व्यंजनों को मेनू से ही हटा दिया गया है।
भोपाल
राजधानी में कमर्शियल सिलिंडरों की कमी और कालाबाजारी के कारण छोटे व्यापारियों ने अपनी दुकानें बंद करना शुरू कर दिया है।
जयपुर
एलपीजी फिलिंग स्टेशनों पर ऑटो-रिक्शा की 3-3 किलोमीटर लंबी लाइनें लगी हैं। ₹1500 का कमर्शियल सिलिंडर ब्लैक में ₹4000 तक बेचा जा रहा है।