बयान बना विजयवर्गीय के गले की फांस, कांग्रेस पहुंची चुनाव आयोग

हलफनामे में प्रकरण  छिपाने का आरोप, चुनाव शून्य घोषित करने की मांग
भोपाल। प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय अपने ही एक हालिया बयान के कारण गंभीर कानूनी और राजनीतिक संकट में घिरते नजर आ रहे हैं। पश्चिम बंगाल न जाने के पीछे गिरफ्तारी के डर वाले उनके कबूलनामे को हथियार बनाकर कांग्रेस ने अब चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाया है। पार्टी ने मांग की है कि हलफनामे में जानकारी छिपाने के आधार पर विजयवर्गीय का निर्वाचन शून्य घोषित किया जाए।
विवाद की शुरुआत तब हुई जब पिछले दिनों रतलाम प्रवास के दौरान मीडिया ने विजयवर्गीय से पूछा कि इस बार वे पश्चिम बंगाल चुनाव प्रचार के लिए क्यों नहीं जा रहे हैं? इस पर उन्होंने बेबाकी से जवाब देते हुए कहा था कि मेरे खिलाफ बंगाल में कई गिरफ्तारी वारंट हैं और 38 फर्जी केस दर्ज हैं। अगर मैं वहां कदम रखूंगा तो मेरी गिरफ्तारी हो सकती है, इसीलिए पार्टी ने मुझे वहां जाने से मना किया है। विजयवर्गीय के इस सार्वजनिक स्वीकारोक्ति ने विपक्षी दल कांग्रेस को एक बड़ा अवसर दे दिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने मोर्चा संभालते हुए कहा कि यह सीधे तौर पर चुनावी नियमों का उल्लंघन है। कांग्रेस का आरोप है कि विधानसभा चुनाव के दौरान निर्वाचन आयोग को सौंपे गए हलफनामे में विजयवर्गीय ने इन दर्जनों आपराधिक मामलों और वारंट की जानकारी छिपाई थी।
विजयपुर विधायक के मामले का दिया हवाला
कांग्रेस ने अपनी शिकायत में समानता के नियम का तर्क दिया है। मुकेश नायक ने बताया कि जिस तरह जानकारी छिपाने के चलते विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हुई, उसी तर्ज पर कैलाश विजयवर्गीय का निर्वाचन भी तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाना चाहिए।
बढ़ सकती हैं मुश्किलें
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि चुनाव आयोग इन आरोपों की गंभीरता से जांच करता है, तो विजयवर्गीय के लिए अपनी विधानसभा सदस्यता बचाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम ने प्रदेश की सियासत में जीरो टॉलरेंस और चुनावी पारदर्शिता पर एक नई बहस छेड़ दी है।

 

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