पीयूष गोयल बोले: FTA भारत के लिए खोल रहे दुनिया के दरवाजे, दवाइयों और मेडिकल टेक्नोलॉजी को मिलेगा बड़ा फायदा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Pavan Updated Mon, 09 Mar 2026 11:11 PM IST

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि भारत को अपने हेल्थकेयर सेक्टर को निर्यात से और अधिक जोड़ना चाहिए। इसके लिए नर्स, केयरगिवर और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षित करना जरूरी है, क्योंकि भारत और विदेश दोनों जगह उनकी मांग तेजी से बढ़ रही है। इससे भारत को न केवल रोजगार और विदेशी मुद्रा मिलेगी, बल्कि भारतीय सेवाओं और उत्पादों की वैश्विक मौजूदगी भी बढ़ेगी।

FTAs opening new markets for pharma, healthcare, and medtech sectors: Piyush Goyal

पीयूष गोयल, केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि भारत द्वारा किए गए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) देश के फार्मास्यूटिकल, हेल्थकेयर और मेडिकल टेक्नोलॉजी सेक्टर के लिए नए अंतरराष्ट्रीय बाजार खोल रहे हैं। उन्होंने बताया कि इन समझौतों के जरिए भारत वैश्विक व्यापार में अपनी स्थिति को और मजबूत बना रहा है। सोमवार को 'सबका साथ, सबका विकास: लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करना' विषय पर आयोजित पोस्ट-बजट वेबिनार में बोलते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले लगभग साढ़े तीन वर्षों में भारत ने कुल नौ मुक्त व्यापार समझौते किए हैं। इनमें से पांच समझौते पिछले एक साल के भीतर ही पूरे हुए हैं। इन समझौतों के कारण अब दुनिया के लगभग दो-तिहाई व्यापारिक बाजार भारत के लिए खुले हैं।
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उन्होंने कहा कि इन समझौतों के तहत भारत को कई देशों में कम आयात शुल्क और बेहतर बाजार पहुंच मिलती है। इससे भारतीय कंपनियों को अपने उत्पादों को विदेशों में बेचने के अधिक अवसर मिलते हैं और निर्यात बढ़ाने का रास्ता खुलता है।                                                                                                                   एफटीए से बड़े उद्योगों के साथ इन्हें भी लाभ
पीयूष गोयल ने यह भी स्पष्ट किया कि मुक्त व्यापार समझौते केवल बड़े उद्योगों के लिए नहीं होते, बल्कि किसानों, मछुआरों, एमएसएमई, छोटे उद्योगों और व्यापारियों को भी इनसे लाभ मिलता है। उन्होंने कहा कि खास तौर पर फार्मा और मेडिकल उपकरण बनाने वाली कंपनियों के लिए ये समझौते काफी फायदेमंद साबित हो सकते हैं। भारत को पहले से ही दुनिया में 'फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड' के रूप में पहचाना जाता है, इसलिए इस क्षेत्र में भारत के पास बड़ी संभावनाएं हैं।                                       'दुनिया में 'ब्रांड इंडिया' की छवि और बेहतर बनेगी'
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार रास्ते और अवसर तो तैयार कर सकती है, लेकिन इनका पूरा फायदा तभी मिलेगा जब उद्योग और संस्थाएं सक्रिय रूप से इन समझौतों का इस्तेमाल करें। उन्होंने जोर दिया कि भारत को एक मजबूत हेल्थकेयर इकोसिस्टम बनाना होगा, जिसमें मैन्युफैक्चरिंग, नवाचार, स्टार्टअप और अस्पताल सभी मिलकर काम करें। उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया में एमएसएमई सेक्टर की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होगी, खासकर गुणवत्ता सुधार के मामले में। अगर भारत अपने उत्पादों की गुणवत्ता और परीक्षण व्यवस्था को मजबूत करता है, तो दुनिया में 'ब्रांड इंडिया' की छवि और बेहतर बनेगी।
कई देशों के साथ हुए एफटीए
पीयूष गोयल ने कहा कि भारत की बातचीत कई बड़े देशों और क्षेत्रों के साथ चल रही है या समझौते हो चुके हैं। इनमें अमेरिका, यूरोपीय संघ, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड शामिल हैं। इसके अलावा यूरोप के चार देशों के समूह ईएफटीए (स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, लिकटेंस्टीन और आइसलैंड) के साथ भी समझौते हुए हैं। खाड़ी क्षेत्र में यूएई और ओमान के साथ समझौते हो चुके हैं और गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल के अन्य देश भी भारत के साथ समझौते में रुचि दिखा रहे हैं।
कनाडा के साथ-साथ इन देशों के साथ बातचीत जारी
उन्होंने यह भी बताया कि कनाडा के साथ बातचीत तेजी से आगे बढ़ रही है, जबकि लैटिन अमेरिका के मर्कोसुर देशों और यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन के साथ भी चर्चा जारी है। गोयल ने कहा कि दुनिया के कई देश भारत के साथ व्यापारिक संबंध मजबूत करना चाहते हैं, जो भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत को दिखाता है। उन्होंने बताया कि भारत की अर्थव्यवस्था अभी करीब 4 ट्रिलियन डॉलर की है और अगले दो से ढाई दशकों में यह करीब 30 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है।

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