MP News: जीतू पटवारी बोले-जल संसाधन विभाग में कुछ कंपनियों को बार-बार मिल रहा टेंडर, CBI में करेंगे शिकायत

न्यूज डेस्क,अमर उजाला भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Wed, 11 Mar 2026 07:12 PM IST

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने जल संसाधन विभाग में टेंडर को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि कई सिंचाई परियोजनाएं ठप हैं और कुछ कंपनियों को ही बार-बार ठेके मिल रहे हैं। कांग्रेस ने सरकार को 15 दिन का अल्टीमेटम देते हुए कार्रवाई नहीं होने पर सीबीआई जांच की मांग करने की चेतावनी दी है।

MP News: Jitu Patwari said – some companies are repeatedly getting tenders in the Water Resources Department,

पीसीसी चीफ जीतू पटवारी - फोटो : अमर उजाल

विस्तार

मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने जल संसाधन विभाग की टेंडर प्रक्रिया और सिंचाई परियोजनाओं को लेकर प्रदेश सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। भोपाल में बुधवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में पटवारी ने कहा कि विभाग में टेंडर सिंडिकेट, फर्जी बैंक गारंटी और ठेकेदारी नेटवर्क का खेल चल रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 15 दिनों के भीतर सरकार ने इस मामले में कार्रवाई नहीं की तो कांग्रेस इस पूरे मामले की जांच के लिए सीबीआई को आवेदन देगी। पटवारी ने कहा कि प्रदेश सरकार ने इस साल को कृषि वर्ष घोषित किया है, लेकिन जमीन पर हालात इसके विपरीत हैं। कई सिंचाई परियोजनाएं ठप पड़ी हैं और किसान पानी के लिए परेशान हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर सिंचाई परियोजनाएं ही नहीं चल रहीं, तो इसे कृषि वर्ष कैसे कहा जा सकता है। उनके मुताबिक यह कृषि वर्ष नहीं बल्कि ठेकेदारी और कमीशन का वर्ष बनता नजर आ रहा है।
कुछ कंपनियों पर टेंडरों का कब्जा
कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि जल संसाधन विभाग के बड़े टेंडरों में बार-बार वही कंपनियां सामने आती हैं। कई मामलों में वही कंपनियां कभी एल-1, कभी एल-2 और कभी एल-3 बनती दिखाई देती हैं। उन्होंने कहा कि यह स्वस्थ प्रतिस्पर्धा नहीं बल्कि टेंडर रोटेशन सिस्टम का संकेत देता है। पटवारी ने दावा किया कि बड़े टेंडरों में विशेष रूप से दो कंस्ट्रक्शन के नाम लगातार सामने आते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर सरकार इन कंपनियों पर इतनी मेहरबान क्यों है।
 
बाहरी लोगों पर क्यों है मेहरबानी 
पटवारी ने यह भी कहा कि विभागीय गतिविधियों में बाहरी लोग भी शामिल है उन्होंने दो लोगों का नाम लिया और कहा कि यह लोग आखिर इस टेंडर प्रक्रिया में क्या करते हैं उनका नाम बार-बार सामने क्यों आता है। जबकि वह सरकारी अधिकारी नहीं है। उन्होंने दावा किया कि इन लोगों के कुछ ठेकेदारों के साथ व्यावसायिक संबंध बताए जा रहे हैं, जिसकी जांच होना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि इस नेटवर्क से जुड़े कुछ लोगों के दुबई में व्यापारिक संबंध होने की जानकारी सामने आई है, जिससे पूरे मामले में वित्तीय लेनदेन और मनी ट्रेल की आशंका भी बनती है।
 
सस्ती पाइप लगाकर महंगी का भुगतान 
कांग्रेस अध्यक्ष ने कुछ सिंचाई परियोजनाओं में तकनीकी अनियमितताओं का आरोप भी लगाया। उनके मुताबिक शिकायतें मिली हैं कि कई जगह जमीन पर एचडीपीई पाइप लगाई गई, लेकिन भुगतान डीआई पाइप के नाम पर निकाला गया। उन्होंने कहा कि यदि यह सही है तो यह किसानों के साथ तकनीकी और आर्थिक दोनों तरह की धोखाधड़ी है।
फर्जी बैंक गारंटी का भी मामला उठाया
पटवारी ने कहा कि जल निगम में फर्जी बैंक गारंटी का मामला सामने आने के बाद दिसंबर 2024 में ई-बैंक गारंटी लागू करने का आदेश जारी हुआ था, लेकिन जल संसाधन विभाग और एनवीडीए में अब तक यह व्यवस्था लागू नहीं की गई है। उनका आरोप है कि कुछ कंपनियां फर्जी बैंक गारंटी के आधार पर टेंडर लेकर एडवांस भुगतान निकाल रही हैं और काम में देरी कर रही हैं।

केन-बेतवा और पार्वती-सिंध परियोजना पर भी सवाल
उन्होंने केन-बेतवा रिवर लिंक परियोजना का मुद्दा उठाते हुए कहा कि यह परियोजना फिलहाल ठप पड़ी है और इससे पन्ना टाइगर रिजर्व के क्षेत्र और आदिवासी जमीनों पर असर पड़ने की आशंका है। उन्होंने सरकार से यह भी स्पष्ट करने को कहा कि परियोजना का लाभ मध्यप्रदेश को कितना और उत्तर प्रदेश को कितना मिलेगा।इसी तरह पार्वती-सिंध परियोजना के टेंडर लंबित रहने को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए और कहा कि इसमें देरी के पीछे ठेकेदारों के साथ किसी तरह की सांठगांठ की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

15 दिन का दिया अल्टीमेटम
पटवारी ने मुख्यमंत्री से मांग की कि जल संसाधन विभाग में जमा सभी बैंक गारंटियों की जांच कराई जाए, विभाग में ई-बैंक गारंटी प्रणाली लागू की जाए और 2023-24 में लगाए गए टेंडरों की न्यायिक जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि यदि 15 दिनों के भीतर सरकार ने इन मांगों पर कार्रवाई नहीं की तो कांग्रेस दस्तावेजों के साथ सीबीआई कार्यालय में जाकर पूरे मामले की जांच की मांग करेगी।

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