Crude Oil: ईरान जंग शुरू होने के बाद 40% तक बढ़े कच्चे तेल के दाम, आने वाले दिनों को लेकर क्या अनुमान?

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Riya Dubey Updated Sat, 14 Mar 2026 12:20 PM IST

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 15 दिनों में 40 फीसदी से ज्यादा बढ़ गई हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट के चलते वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ी है, जिससे एशियाई बाजारों समेत दुनिया भर में महंगाई और अस्थिरता का खतरा गहरा गया है।

Crude oil prices increased by 40% after the Iran war started, what are the predictions for the coming days?
कच्चे तेल की कीमतों पर असर - फोटो : Amar Ujalla

विस्तार

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बीते 15 दिनों के भीतर 40 फीसदी से अधिक की तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच जारी युद्ध के चलते पश्चिम एशिया में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर गंभीर चिंताएं बढ़ गई हैं। खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रभावित होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार, विशेषकर एशियाई देशों पर दबाव बढ़ा है।

क्या कहते हैं आंकड़े?

  • युद्ध शुरू होने से पहले 27 फरवरी को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल करीब 73 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। 
  • वहीं शनिवार तक इसकी कीमत बढ़कर लगभग 103 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई। 
  • इस तरह महज 15 दिनों में तेल की कीमत में 30 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी हुई, जो करीब 41.1 फीसदी के उछाल के बराबर है।

28 फरवरी से जारी तनाव

बताया जा रहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा सैन्य टकराव 28 फरवरी से तेज हुआ, जब अमेरिकी और इस्राइलों बलों ने ईरान के सैन्य ठिकानों और शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाते हुए व्यापक हमले किए। इस संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बाजारों की चिंता और बढ़ा दी है।

बाजार को लेकर क्या है विशेषज्ञों की राय?

विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर आने वाले दिनों में भी वैश्विक बाजारों पर साफ दिखाई देगा। एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने कहा कि आने वाला सप्ताह बेहद उतार-चढ़ाव भरा रह सकता है, क्योंकि निवेशकों की नजरें पूरी तरह इस संघर्ष से जुड़े घटनाक्रम पर टिकी रहेंगी।

उन्होंने कहा कि आने वाले सप्ताह में बाजार की दिशा काफी हद तक पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से जुड़े घटनाक्रम पर निर्भर करेगी। निवेशक इस बात पर करीबी नजर रखेंगे कि संबंधित देशों के सरकारी अधिकारी और वैश्विक पक्षकार तनाव बढ़ाने या कूटनीतिक समाधान की दिशा में क्या संकेत देते हैं।

पोनमुडी आर के मुताबिक, इस संघर्ष का असर केवल कच्चे तेल की कीमतों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक बॉन्ड यील्ड, मुद्रा बाजार और निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता पर भी पड़ेगा। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर विशेष फोकस बना रहेगा, क्योंकि इसे दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा आपूर्ति मार्गों में गिना जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल और गैस की आवाजाही लंबे समय तक बाधित रहती है, तो इससे वैश्विक तेल आपूर्ति और सख्त हो सकती है। इसका असर एशिया में महंगाई की उम्मीदों पर पड़ेगा और वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता व दबाव का माहौल बना रह सकता है।


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