भाजपा ने निकाली जन आक्रोश यात्रा, कांग्रेस पर बरसे मुख्यमंत्री
भोपाल। लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पारित न हो पाने के विरोध में मध्य प्रदेश भाजपा द्वारा राजधानी भोपाल में जन आक्रोश महिला पदयात्रा निकाली गई। एमवीएम कॉलेज ग्राउंड से शुरू हुई इस पदयात्रा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल सहित प्रदेश सरकार के मंत्री, सांसद और हजारों की संख्या में महिला कार्यकर्ता शामिल हुईं।
सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस और डीएमके पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि नारी सब कुछ भूल सकती है, लेकिन अपना अपमान कभी नहीं भूलती। संसद में बहनों के हक पर डाका डालने का जो काम किया गया है, उसके खिलाफ आज भोपाल की सड़कों पर बहनें अपने स्वाभिमान की लड़ाई लड़ने आई हैं। मुख्यमंत्री ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि राजा राममोहन राय, ज्योतिबा फुले और डॉ. भीमराव अंबेडकर जैसे महापुरुषों ने हमेशा नारी समानता की वकालत की है। उन्होंने कांग्रेस नेत्री प्रियंका गांधी पर निशाना साधते हुए पूछा कि लड़की हूं, लड़ सकती हूं का नारा देने वाली नेता आज महिलाओं के अधिकार छीने जाने पर चुप क्यों हैं?
विधानसभा का विशेष सत्र और निंदा प्रस्ताव
मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे पर आक्रामक रुख अपनाते हुए घोषणा की है कि महिलाओं के सम्मान में जल्द ही मध्य प्रदेश विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र बुलाया जाएगा। प्रदेश के सभी नगरीय निकायों और विधानसभा सत्र में विपक्ष के इस कृत्य के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया जाएगा। इस आक्रोश को पंचायत स्तर से लेकर शहरों तक ले जाया जाएगा ताकि जनता विपक्ष के मंसूबों को समझ सके।
विपक्ष ने तोड़ा बहनों का सपनाः हेमंत खंडेलवाल
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि सैकड़ों वर्षों के संघर्ष के बाद महिलाओं को अपना अधिकार मिलने वाला था, जिसे विपक्ष ने दुर्भावनापूर्ण तरीके से रोकने का प्रयास किया है। उन्होंने आह्वान किया कि इस विश्वासघात का जवाब प्रदेश की हर महिला आने वाले समय में देगी।
अब याचना नहीं, रण होगा : परांजपे
भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष अश्वनी परांजपे ने कहा कि कांग्रेस नेताओं ने संसद में महिला आरक्षण बिल को गिराकर जिस तरह से जश्न मनाया, वह देश की आधी आबादी के अपमान का जीता-जागता सबूत है। उन्होंने राष्ट्रकवि दिनकर की पंक्तियों को दोहराते हुए कहा कि अब याचना नहीं, रण होगा, जीवन या कि मरण होगा। परांजपे ने चेतावनी दी कि भारत की मातृशक्ति इस अपमान का जवाब आने वाले समय में लोकतांत्रिक तरीके से देगी।
संसद के दरवाजे बंद करने की साजिशः वानखेड़े
सांसद लता वानखेड़े ने विपक्ष की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम केवल एक कानून नहीं, बल्कि महिलाओं के लिए पंचायत से लेकर पार्लियामेंट तक की राह आसान करने वाला दरवाजा था। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और इंडी गठबंधन ने इस दरवाजे को बंद कर अपनी महिला विरोधी मानसिकता का परिचय दिया है। वानखेड़े के अनुसार, विपक्ष चाहता है कि महिलाएं केवल रैलियों में भीड़ का हिस्सा बनी रहें और तालियां बजाती रहें, लेकिन नेतृत्व उनके हाथ में न आए।
पदयात्रा और शक्ति प्रदर्शन
भाषण के पश्चात एमवीएम कॉलेज ग्राउंड से भव्य पदयात्रा शुरू हुई। इसमें बड़ी संख्या में महिला सांसदों और मंत्रियों ने शिरकत की। हाथों में तख्तियां लिए महिला कार्यकर्ताओं ने विपक्ष विरोधी नारे लगाए और एकजुटता का प्रदर्शन किया। यात्रा के दौरान पूरी राजधानी ’नारी शक्ति’ के नारों से गूंज उठी।