रिपोर्ट के मुताबिक, मोजतबा खामेनेई का अभी तक कोई भी वीडियो या ऑडियो सामने नहीं आया है। उनके आदेश सिर्फ सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बताए जाते हैं या फिर सरकारी टीवी पर पढ़कर सुनाए जाते हैं। एक ईरानी अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि वह जानबूझकर ऐसा कर रहे हैं, ताकि वह अपने पहले सार्वजनिक संबोधन में कमजोर न दिखें। सुरक्षा के इंतजाम कैसे?
सुरक्षा के इंतजाम इतने कड़े हैं कि रिवोल्यूशनरी गार्ड के बड़े कमांडर और सरकार के आला अधिकारी भी उनसे मिलने नहीं जाते। उन्हें डर है कि इस्राइल उनकी लोकेशन को ट्रैक करके मोजतबा खामेनेई की हत्या की साजिश रच सकता है। इसलिए संदेशों को हाथ से लिखकर लिफाफों में बंद किया जाता है और भरोसेमंद दूतों की एक चेन के जरिए उन तक पहुंचाया जाता है। ये दूत मोटरसाइकिल और कारों से राजमार्गों और ग्रामीण रास्तों से होते हुए उनके गुप्त ठिकाने तक पहुंचते हैं। क्या मोजतबा खामेनेई हमले में गंभीर रूप से घायल हुए?
रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया है कि अमेरिकी और इस्राइल के हमलों में मोजतबा गंभीर रूप से घायल हो गए थे। हालांकि, वह मानसिक रूप से पूरी तरह तेज और सक्रिय हैं। कहा जा रहा है कि हमले में उनका चेहरा काफी खराब हो गया है और उन्हें प्लास्टिक सर्जरी की जरूरत है। उनके चेहरे और होंठों पर चोट के कारण उन्हें बोलने में भी काफी परेशानी हो रही है। उनके एक पैर के तीन ऑपरेशन हो चुके हैं और अब नकली पैर लगने का इंतजार है। उनके घायल हाथ की हालत में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है।
उनके इलाज और सुरक्षा की जिम्मेदारी किसके पास?
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, जो खुद एक प्रशिक्षित हार्ट सर्जन हैं, और देश के स्वास्थ्य मंत्री सीधे तौर पर उनके इलाज में शामिल हैं। मोजतबा अपने अज्ञात ठिकाने पर ज्यादातर डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों से घिरे रहते हैं। हालांकि, उनकी सेहत को लेकर किए जा रहे इन दावों पर मोजतबा खामेनेई के एक्स अकाउंट से एक पोस्ट में कड़ी प्रतिक्रिया दी गई है। इस पोस्ट में दुश्मन के मीडिया की आलोचना की गई है और कहा गया है कि ऐसी रिपोर्टें ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा और एकता को कमजोर करने की एक साजिश हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच अभी कैसे हालात हैं?
वर्तमान में, अमेरिका और ईरान के बीच मध्य पूर्व में भारी लड़ाई के बाद एक 'असहज युद्धविराम' लागू है। हालांकि, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अभी भी बड़ा गतिरोध बना हुआ है। कूटनीतिक बातचीत फिर से शुरू करने की कोशिशें भी रुकी हुई हैं। दूसरे दौर की बातचीत शुरू ही नहीं हो पाई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि ईरान ने पाकिस्तान में होने वाली बातचीत में शामिल होने से इनकार कर दिया है, क्योंकि वह अपने परमाणु अधिकारों की मांग पर पूरी तरह से अड़ा हुआ है।