बीना विधायक निर्मला सप्रे की सदस्यता पर हाईकोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला

भोपाल। प्रदेश के राजनीतिक हलकों में दलबदल मामले को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थामने वाली बीना विधायक निर्मला सप्रे की विधानसभा सदस्यता रद्द करने की मांग वाली याचिका पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई है। गुरुवार को कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
हाईकोर्ट में लंबी बहस के बाद कोर्ट ने निर्णय सुरक्षित रखा है, जिससे सप्रे की विधायकी पर सस्पेंस बढ़ गया है। पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा था कि दलबदल के मामलों में निर्णय के लिए 90 दिनों की समय सीमा तय है, जबकि इस मामले में 720 से अधिक दिन बीत चुके हैं। सरकार की ओर से पैरवी कर रहे वकील ने कोर्ट को सूचित किया कि यह मामला फिलहाल विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) के समक्ष विचाराधीन है और साक्ष्यों की जांच की प्रक्रिया जारी है।
क्या है पूरा मामला
नवंबर 2023 में निर्मला सप्रे कांग्रेस के टिकट पर बीना विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर विधायक बनीं थी।  5 मई 2024 को लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने अचानक मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ मंच साझा किया और भाजपा में शामिल होने का दावा किया गया। इसके बाद 5 जुलाई 2024 को  नेता प्रतिपक्ष ने विधानसभा अध्यक्ष के सामने संविधान की 10वीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून) के तहत सप्रे की सदस्यता रद्द करने की याचिका लगाई। नेता प्रतिपक्ष का तर्क है कि नियमानुसार स्वेच्छा से दल बदलने पर विधानसभा सदस्यता स्वतः ही समाप्त हो जाती है। जब विधानसभा अध्यक्ष के स्तर पर इस मामले में लंबे समय तक कोई ठोस निर्णय नहीं आया, तो याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।


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