राष्ट्रपति दौरे के बीच छिड़ी आदिवासी बनाम वनवासी की बहस

कांग्रेस ने बताया अस्मिता का अपमान, भाजपा ने कहा बिना तथ्यों के भ्रम फैला रही कांग्रेस
भोपाल। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के मध्यप्रदेश दौरे के बीच  आदिवासी बनाम वनवासी शब्द को लेकर वैचारिक संग्राम छिड़ गया है। कांग्रेस ने वनवासी  शब्द को समुदाय की पहचान और सम्मान से जोड़कर सरकार और भाजपा को घेरा है, तो वहीं भाजपा ने इसे विपक्ष की हताशा और ध्यान भटकाने वाली राजनीति करार दिया है।
विवाद की शुरुआत करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भाजपा की शब्दावली पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आदिवासी समाज को वनवासी कहकर पुकारना उनकी मूल पहचान, समृद्ध संस्कृति और गौरवशाली अस्मिता के साथ सरासर अन्याय है। पटवारी ने कहा कि कांग्रेस हमेशा से आदिवासी समुदाय की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पहचान का सम्मान करने की पक्षधर रही है। स्वयं राष्ट्रपति ने भी अपने संबोधन में आदिवासी पहचान को स्वीकार करते हुए एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है। आज जरूरत इस बात की है कि आदिवासी समाज की शिक्षा, जमीन, रोजगार और उनकी मूल पहचान के मुद्दों पर गंभीरता से विचार किया जाए, न कि उनकी पहचान को बदला जाए। वहीं  विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि आदिवासी केवल एक शब्द नहीं है, बल्कि यह एक जीता-जागता इतिहास, अनूठी संस्कृति, जल-जंगल-जमीन पर सदियों पुराना हक और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ी एक मजबूत पहचान है। उन्होंने दो टूक लहजे में चेतावनी दी कि आदिवासी समाज अपनी अस्मिता और गौरव पर किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं करेगा।
विकास के मुद्दों से ध्यान भटका रही कांग्रेस
कांग्रेस के इन गंभीर आरोपों पर पलटवार करने में सत्ताधारी दल भाजपा ने भी देर नहीं की। प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग ने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे पूरी तरह तथ्यहीन बताया। सारंग ने कहा कि विपक्ष के पास कोई ठोस नीति या मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए वह केवल शब्दों का बतंगड़ बनाकर जनता के बीच भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा है। कांग्रेस को ऐसे संवेदनशील समय पर राजनीति करने के बजाय राष्ट्रपति जैसे सर्वाेच्च संवैधानिक पद की गरिमा का सम्मान करना चाहिए।

2  वन्यजीव अपराधों पर कसेगा शिकंजा, बनेगी राज्य स्तरीय टास्क फोर्स
भोपाल। राज्य टाइगर स्ट्राइक फोर्स की तर्ज पर वनों के संगठित अपराधों पर सख्ती से नियंत्रण पाने के लिए एक राज्य स्तरीय टास्क फोर्स के गठन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही, वन और वन्यजीवों की चौबीसों घंटे निगरानी के लिए वन मुख्यालय स्तर पर एक अत्याधुनिक कमांड एवं कंट्रोल रूम भी स्थापित किया जाएगा।
प्रदेश में वनों और वन्य जीवों की सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में वन संपदा की सुरक्षा और राजस्व वृद्धि को लेकर कई दूरगामी फैसले लिए गए। बैठक में मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि मानव और वन्यजीव संघर्ष को राज्य आपदा घोषित करने के प्रयास किए जाएंगे। इससे ऐसी घटनाओं के वक्त प्रशासन, पुलिस, वन विभाग और आपदा मोचन बल मिलकर एक साथ मोर्चा संभाल सकेंगे।  खनिजों के परिवहन के लिए वन विभाग के परिवहन अनुज्ञा शुल्क (ट्रांजिट फीस) में वृद्धि करने के प्रस्ताव को भी हरी झंडी दे दी गई है, जिससे राज्य के राजस्व में बढ़ोतरी होगी। राज्य स्तरीय टास्क फोर्स के गठन से अब लकड़ी तस्करी, अवैध शिकार और वनों पर कब्जा करने वाले संगठित माफियाओं के खिलाफ त्वरित और सख्त कार्रवाई की जा सकेगी।
 


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