UP: कोर्ट पहुंचा राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला, आज हो सकती है सुनवाई; सीबीआई से जांच पर भी होगा निर्णय

अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: Ishwar Ashish Bhartiya Updated Mon, 22 Jun 2026 12:49 AM IST

याचिका में मामले की जांच सीबीआई या किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराने और चढ़ावे का ऑडिट नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) से कराने की मांग की गई है।

UP: Ram Mandir offering theft case reaches court; hearing on Monday; decision to be taken on CBI probe.
 
राम मंदिर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अयोध्या में श्रीराम मंदिर के चढ़ावे की चोरी के आरोपों वाले मामले में दाखिल जनहित याचिका (पीआईएल) पर सोमवार (22 जून) को सुनवाई संभावित है। याचिका में मामले की जांच सीबीआई या किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराने और चढ़ावे का ऑडिट नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) से कराने की मांग की गई है।
सोमवार की वादसूची में न्यायमूर्ति पंकज भाटिया और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की ग्रीष्म अवकाश कालीन खंडपीठ के समक्ष पीआईएल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है। याचिकाकर्ता अधिवक्ता मोहित अशोक ने बताया की वह सोमवार को इस अहम मामले की शीघ्र सुनवाई किए जाने का अनुरोध कोर्ट से करेगा। इसी 19 जून को समय की कमी के कारण अदालत इस पर सुनवाई नहीं कर सकी थी और अब इसपर 22 जून को सुनवाई हो सकती है।
याचिका में अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे में आने वाले धन के कथित गबन की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराने का अनुरोध किया गया है। इसके साथ ही कैग से पूरे मामले का ऑडिट कराए जाने की भी मांग की गई है।

140 पन्नों की जांच रिपोर्ट तैयार की गई

गबन प्रकरण की जांच कर रही एसआईटी शनिवार देर रात अयोध्या से लखनऊ के लिए रवाना हो गई। सूत्रों के अनुसार जांच रिपोर्ट लगभग 140 पन्नों की तैयार की गई है, जिसमें मामले से जुड़े विभिन्न तथ्यों और साक्ष्यों का विस्तृत उल्लेख किया गया है। हालांकि एसआईटी  के करीब 20 सहयोगी सदस्य अभी भी राम जन्मभूमि परिसर में मौजूद हैं और जांच से जुड़ी सूचनाएं एकत्र कर प्रक्रिया को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।
सूत्रों के मुताबिक राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव से भी एक बार फिर पूछताछ की गई। बंद कमरे में करीब तीन घंटे तक चली इस पूछताछ की वीडियोग्राफी भी कराई गई।
जांच से जुड़े सूत्रों का दावा है कि रिपोर्ट के आधार पर कई लोगों पर कार्रवाई की गाज गिर सकती है। दानपात्र मामले में लापरवाही अथवा अनियमितता पाए जाने पर कुछ सेवादारों की सेवाएं समाप्त किए जाने की भी संभावना जताई जा रही है।


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