नोटिस पर भड़के पटवारी, कहा समय पर किराया देते नहीं, ऊपर से करते हैं बेइज्जती
भोपाल। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के वेयरहाउस को मिले एक नोटिस ने राजधानी भोपाल से लेकर राजनीति में भूचाल ला दिया है। इस कार्रवाई से नाराज पटवारी ने वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन के आला अधिकारी को फोन लगाकर न सिर्फ तीखी आपत्ति दर्ज कराई, बल्कि दो-टूक लहजे में अपना पूरा माल हटाने और वेयरहाउस खाली करने का अल्टीमेटम भी दे दिया। कांग्रेस जहां इसे विपक्ष को जानबूझकर टारगेट करने की बदले की राजनीति बता रही है, वहीं कॉरपोरेशन इसे एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया करार दे रहा है।
वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन के नवनियुक्त अध्यक्ष संजय नगाइच ने हाल ही में जीतू पटवारी के वेयरहाउस का निरीक्षण किया था। अधिकारी से बातचीत के दौरान पटवारी का गुस्सा इसी बात पर फूटा। उन्होंने तल्ख लहजे में कहा कि अभी जो नए-नए अध्यक्ष संजय नगाइच बने हैं, वे हमारे वेयरहाउस पर गए थे और पूछ रहे हैं कि बाहर-अंदर जाले क्यों लगे हैं? अगर भाजपा नेता बदले की भावना से ऐसा घटिया व्यवहार करेंगे, तो यह बर्दाश्त नहीं होगा। हम किसी के कर्जदार नहीं हैं। पटवारी ने कॉरपोरेशन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि एक तरफ तो सरकार समय पर वेयरहाउस का किराया नहीं चुकाती, और दूसरी तरफ विपक्ष को परेशान करने के लिए इस तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। उन्होंने बेहद कड़े शब्दों में कहा कि पहले तो टाइम पे किराया नहीं देते, फिर बेइज्जती करने के लिए नहीं हैं हम। हटाओ इस माल को।
चिट्ठी लिखकर दी चेतावनी, माल की सुरक्षा का भरोसा भी दिया
विवाद बढ़ने के बाद पटवारी ने कॉरपोरेशन को लिखित पत्र भेजकर अपना अनाज वहां से तत्काल खाली करने का आग्रह किया है। उन्होंने अधिकारी से कहा मैंने इंदौर को भी पहले लिखकर दिया था और आज आपको भी चिट्ठी दे दी है। मेहरबानी करके हमारे यहां से अपना माल खाली कर लीजिए, हम पूरी तरह तैयार हैं। पटवारी ने साफ किया कि जब तक सरकार का माल उनके वेयरहाउस में है, वह पूरी तरह सुरक्षित और व्यवस्थित रहेगा। उसमें एक नए पैसे की भी कमी नहीं आएगी और अधिकारी जब चाहें निरीक्षण कर सकते हैं। पटवारी ने स्पष्ट कर दिया कि वे सरकार के किसी भी प्रकार के दबाव में आकर कोई नियम नहीं तोड़ेंगे।
कांग्रेस ने बताया दमनकारी कार्रवाई
इस तीखी बातचीत और पटवारी द्वारा लिखी गई चिट्ठी के सामने आने के बाद प्रदेश की सियासत पूरी तरह गर्मा गई है। कांग्रेस का आरोप है कि यह विपक्ष के नेताओं को डराने और सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग कर टारगेट करने वाली दमनकारी कार्रवाई है। वहीं भाजपा नेताओं का कहना है कियह किसी भी प्रकार की बदले की भावना नहीं, बल्कि नियमों के तहत किया गया एक रूटीन और सामान्य निरीक्षण है।