प्रदेश के राज्यपाल बने रहेंगे मंगूभाई पटेल?

कार्यकाल विस्तार को लेकर अटकलें तेज, केंद्र के फैसले पर नजर
भोपाल। प्रदेश के राज्यपाल मंगूभाई पटेल का कार्यकाल आगामी 7 जुलाई को समाप्त होने जा रहा है, लेकिन राजभवन के अगले दावेदार को लेकर सियासी गलियारों में अभी तक पूरी तरह सन्नाटा पसरा हुआ है। नए नाम को लेकर किसी भी तरह की सुगबुगाहट न होने से इस बात की चर्चाएं तेज हो गई हैं कि केंद्र सरकार एक बार फिर मंगूभाई पटेल पर ही भरोसा जता सकती है और उन्हें प्रदेश का राज्यपाल बनाए रखा जा सकता है।
मंगूभाई पटेल ने 8 जुलाई 2021 को मध्य प्रदेश के राज्यपाल के रूप में कार्यभार संभाला था। अपने पूरे कार्यकाल के दौरान वह हमेशा विवादों से दूर रहे, जो कि मध्य प्रदेश के राजभवन के इतिहास में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है; क्योंकि इससे पहले कई राज्यपालों के कार्यकाल विवादों के साए में रहे हैं। राज्यपाल पटेल ने अपने मध्यप्रदेष के कार्यकाल में आदिवासी समाज के उत्थान के लिए जमीन पर उतरकर काम किया है। विशेष रूप से जनजातीय क्षेत्रों में सिकल सेल बीमारी को खत्म करने के लिए उनके द्वारा किए गए प्रयासों की तारीफ हुई है। खुद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी आदिवासी समाज के बीच राज्यपाल पटेल के इस अनुकरणीय कार्य की सराहना कर चुके हैं।
इसलिए सेवा विस्तार के मिल रहे संकेत
माना जा रहा है कि केंद्र सरकार मंगूभाई पटेल को दोबारा मध्य प्रदेश की कमान सौंप सकती है। इसके पीछे उत्तर प्रदेश और गुजरात के राज्यपालों के उदाहरण दिए जा रहे हैं। आनंदीबेन पटेल उत्तर प्रदेश में साढ़े आठ साल से राज्यपाल बनी हुई हैं। 2019 से लगातार उत्तर प्रदेष का राज्यपाल बनाया गया। इसी तरह आचार्य देवव्रत गुजरात में पिछले 11 वर्षों से राज्यपाल के पद पर हैं। 2015 में हिमाचल के राज्यपाल बने और 2019 से लगातार गुजरात के गवर्नर की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। जिस तरह केंद्र सरकार ने आनंदीबेन पटेल और आचार्य देवव्रत के अनुभव पर भरोसा जताते हुए उन्हें लंबे समय तक जिम्मेदारी दी है, ठीक उसी तर्ज पर मंगूभाई पटेल को भी प्रदेश में दूसरा कार्यकाल मिलने की संभावना जताई जा रही है।
 


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