नौ साल बाद खुलेगा पदोन्नति का रास्ता, 4.5 लाख कर्मचारियों को मिलेगा फायदा

सरकार ने 29 को बुलाई उच्च स्तरीय बैठक, फाइनल ड्राफ्ट पर लगेगी मुहर
भोपाल। प्रदेश में साल 2016 से थमी हुई पदोन्नति की प्रक्रिया अब दोबारा रफ्तार पकड़ने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की घोषणा के बाद सरकार ने इस दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं, जिससे प्रदेश के करीब 4.5 लाख अधिकारी-कर्मचारियों का सालों लंबा इंतजार खत्म होगा। आगामी 29 जून को इस संबंध में एक अत्यंत महत्वपूर्ण उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई है, जिसमें पदोन्नति की अंतिम रूपरेखा (ड्राफ्ट) को मंजूरी दी जाएगी।
सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा आयोजित इस अहम बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव सहित सभी विभागों के प्रमुख अधिकारी शामिल होंगे। बैठक का मुख्य एजेंडा पदोन्नति प्रक्रिया के फाइनल ड्राफ्ट को हरी झंडी देना है। इसके तुरंत बाद सभी विभागों में औपचारिक रूप से प्रमोशन प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। सरकार का उद्देश्य इस लंबे समय से लंबित मामले को सुलझाकर प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक चुस्त-दुरुस्त बनाना है। गौरतलब है कि बीते 17 जून को हुई कैबिनेट की बैठक में राज्य सरकार ने मध्यप्रदेश लोकसेवा पदोन्नति नियम 2025 को अपनी मंजूरी दे दी थी। नए नियम लागू होने से न केवल विभागों में खाली पड़े उच्च पदों को भरा जा सकेगा, बल्कि कर्मचारियों को समय पर उनका हक भी मिल सकेगा। इससे प्रशासनिक कामकाज की गति में भी काफी तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार के अवसर
सरकार के इस फैसले का एक बड़ा फायदा प्रदेश के बेरोजगार युवाओं को भी मिलने जा रहा है। प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे ही वरिष्ठ कर्मचारी प्रमोट होकर उच्च पदों पर जाएंगे, वैसे ही निचले स्तर पर लगभग 2 लाख पद खाली हो जाएंगे। इन रिक्त पदों को भरने के लिए सरकार भविष्य में नई भर्तियां करेगी, जिससे प्रदेश के युवाओं के लिए सरकारी नौकरी के नए अवसर पैदा होंगे। सरकार का यह फैसला न केवल पिछले 9 वर्षों से अपनी तरक्की की राह देख रहे शासकीय सेवकों के चेहरे पर खुशी लाएगा, बल्कि रोजगार की तलाश कर रहे युवाओं के लिए भी स्वर्णिम अवसर लेकर आएगा।
 


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