राम मंदिर : 70 बार कैमरे में कैद हुई चढ़ावा चोरी, 27 अप्रैल से पहले भी हुई गड़बड़ी, SIT रिपोर्ट में खुलासा

नितिन मिश्र, अमर उजाला, अयोध्या Published by: Ishwar Ashish Bhartiya Updated Mon, 06 Jul 2026 10:39 PM IST

अयोध्या के राम मंदिर में लगातार होती रही चढ़ावा चोरी की एसआईटी रिपोर्ट सार्वजनिक कर दी गई है। रिपोर्ट में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आई है और सुरक्षा मानकों की हर स्तर पर अनदेखी हुई।

Ram Mandir: Theft of offerings caught on camera 70 times; irregularities occurred even before April 27

- फोटो : amar ujala

विस्तार

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावा गणना कक्ष में कथित चोरी के मामले में गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट पहली बार सार्वजनिक हुई है। ट्रस्ट की बैठक में प्रस्तुत इस रिपोर्ट में प्रथम दृष्टया माना गया है कि चढ़ावा की गणना प्रक्रिया के दौरान चोरी और गबन की घटनाएं हुईं। रिपोर्ट के अनुसार 27 अप्रैल से पहले भी ऐसी अनियमितताओं के संकेत मिले हैं, लेकिन उस अवधि का सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध न होने से वास्तविक नुकसान का आकलन नहीं किया जा सका

एसआईटी के अनुसार आरोपियों के बयान तथा उनके बैंक खातों में आय से अधिक धनराशि मिलने से इन आशंकाओं को बल मिला है। उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज में गणना कर्मियों द्वारा करीब 70 बार नोटों की गड्डियां और खुले नोट छिपाने जैसी गतिविधियां दर्ज होने का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में ट्रस्ट, बैंक, गणना कक्ष की निगरानी व्यवस्था, सुरक्षा प्रबंधन और प्रशासनिक जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि एसआईटी ने स्पष्ट किया है कि यह केवल प्रारंभिक जांच रिपोर्ट है और विस्तृत जांच अभी जारी है।
रिपोर्ट के अनुसार निर्धारित सुरक्षा उपायों का प्रभावी पालन न होने से अनियमितताओं की गुंजाइश बनी। प्रवेश और निकास पर तलाशी, निर्धारित वेशभूषा, निजी सामान पर प्रतिबंध, हुंडीवार गणना, मूल्यवर्गवार अभिलेखीकरण तथा प्रभावी निगरानी जैसी व्यवस्थाएं व्यवहार में पूरी तरह लागू नहीं थीं। ट्रस्ट और बैंक के प्रतिनिधियों की मौजूदगी के बावजूद कथित अनियमितताएं होती रहीं।
एसआईटी ने बताया कि 20 सितंबर 2024 को ट्रस्ट और बैंक के बीच हुए समझौते में गणना कक्ष में प्रवेश-निकास के लिए सख्त सुरक्षा व्यवस्था तय की गई थी। इसके विपरीत छह फरवरी 2025 को जारी एसओपी में अनिवार्य तलाशी की व्यवस्था को बदलकर नियमित अथवा रैंडम तलाशी कर दिया गया, जिससे सुरक्षा व्यवस्था कमजोर हुई।
रिपोर्ट के आधार पर एसआईटी ने आठ लोगों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने की संस्तुति की है। इसके अलावा गणना कक्ष प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव, गणना कक्ष में तैनात अन्य पर्यवेक्षणीय कर्मियों तथा रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के विरुद्ध भी प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना कराने की सिफारिश की गई है।

डॉ. अनिल मिश्रा की निगरानी पर सवाल, सुभाष को ठहराया जिम्मेदार

रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रस्ट के प्रतिनिधि के रूप में डॉ. अनिल मिश्रा ने बैंक के साथ मिलकर दिशा-निर्देश जारी किए थे। एसओपी लागू होने के बाद उसके अनुपालन की समीक्षा और निगरानी सुनिश्चित करना उनकी जिम्मेदारी थी। एसआईटी के अनुसार सतत पर्यवेक्षण और अनुश्रवण में कमी दिखाई दी। वहीं, गणना कक्ष प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव को सुरक्षा व्यवस्था लागू कराने के लिए प्रमुख रूप से जिम्मेदार माना गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि नियमित तलाशी सुनिश्चित नहीं होने से कथित चोरी की घटनाओं को रोकने में विफलता रही।
रामशंकर उर्फ टिन्नू यादव की भूमिका भी जांच के दायरे में
रिपोर्ट के अनुसार रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के पास मंदिर परिसर की विभिन्न हुंडियों की चाबियां थीं, जबकि इसके लिए कोई औपचारिक या लिखित प्राधिकरण नहीं मिला। एसआईटी ने इसे गंभीर प्रशासनिक चूक माना है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि उन्होंने अपने रिश्तेदार मनीष कुमार यादव की गणना ड्यूटी में सिफारिश की, जिससे उसे कथित गबन का अवसर मिला। एसआईटी ने यह भी कहा कि यदि गणना के दौरान सीसीटीवी फुटेज की प्रभावी निगरानी होती तो इन घटनाओं को रोका जा सकता था। ऑडिट रिपोर्ट में 180 दिन तक सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने की सिफारिश के बावजूद केवल 45 दिन का बैकअप रखा जा रहा था।

बैंक अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल

एसआईटी के अनुसार बैंक की ओर से गणना कर्मियों को निर्धारित वेशभूषा उपलब्ध नहीं कराई गई। बैंक प्रतिनिधि गणना के दौरान मौजूद रहे, लेकिन निगरानी प्रभावी नहीं रही। अधिकारियों के मासिक रोटेशन का भी पालन नहीं किया गया। रिपोर्ट में बैंक स्तर पर भी एसओपी के पालन में कमी की बात कही गई है।
जांच अभी जारी
एसआईटी ने स्पष्ट किया है कि यह प्रारंभिक जांच रिपोर्ट है, जांच अभी जारी है। अंतिम रिपोर्ट में पर्यवेक्षणीय विफलताओं, प्रशासनिक जवाबदेही, संस्थागत खामियों तथा सुधारात्मक उपायों पर विस्तृत निष्कर्ष और सिफारिशें प्रस्तुत की जाएंगी।


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