स्थानीय अधिकारियों ने साधी चुप्पी

खाद्य विभाग के संयुक्त संचालक एचएस परमार मंगलवार को सागर पहुंचे और स्थानीय अधिकारियों के साथ जाकर विभिन्न वेयर हाउसों का रिकॉर्ड देखा। बताया गया कि सागर में ही 1166 टन गेहूं खरीदी के बाद वेयर हाउस नहीं पहुंचा है। स्थानीय अधिकारी मामले में कुछ भी कहने से बच रहे हैं।

माना जा रहा है कि खरीदी और परिवहन के दौरान यह गेहूं गायब हुआ है। फिलहाल जांच एजेंसियां खरीदी केंद्रों, परिवहन रिकॉर्ड और वेयरहाउस में जमा स्टाक का मिलान कर रही हैं। बता दें सागर में ही पिछले महीने गेहूं में 40-50 प्रतिशत तक मिट्टी मिलाकर गोदामों में जमा कराने का मामला सामने आया था।

इस साल 90 लाख टन गेहूं खरीदा

इस साल भोपाल, इंदौर, उज्जैन और नर्मदापुरम संभाग में 10 अप्रैल से और शेष जिलों में 15 अप्रैल से गेहूं की खरीदी शुरू हुई थी। करीब 90 लाख टन गेहूं की खरीदी हुई और किसानों को 18 हजार 707 करोड़ रुपयों का भुगतान किया गया। इसे प्रदेश के इतिहास की सबसे बड़ी खरीदी बताया जा रहा है।

इन जिलों में गायब है गेहूं

जबलपुर - 1433 टन
सागर - 1166 टन
नरसिंहपुर - 804 टन
विदिशा - 694 टन
सतना - 551 टन
आगर मालवा - 518 टन
उज्जैन - 396 टन
राजगढ़ - 330 टन
शाजापुर - 330 टन
रीवा - 308 टन
रायसेन - 253 टन
सिवनी - 220 टन
अशोकनगर - 165 टन

जहां-जहां समर्थन मूल्य पर खरीदे गए गेहूं में शॉर्टेज की शिकायत मिली है, वहां अधिकारियों को जांच के लिए भेजा गया है। अतिरिक्त मुख्य सचिव को भी जांच के निर्देश दिए गए हैं। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- गोविंद सिंह राजपूत, मंत्री, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग