अयोध्या: चढ़ावा चोरी मामले में चंपत ने तोड़ी चुप्पी, कहा- SIT की अंतिम रिपोर्ट के बाद दूंगा हर आरोप का जवाब

अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या Published by: रोहित मिश्र Updated Tue, 07 Jul 2026 06:17 PM IST

 राम मंदिर के दानपात्र से चढ़ावा चोरी के मामले में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने पहली बार अपनी चुप्पी तोड़ी है।

Ayodhya: Champat Rai spoke for the first time in the offering theft case, saying,

चंपत राय ने लिखा पत्र। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

 राम मंदिर के दानपात्र से चढ़ावा चोरी के मामले में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने पहली बार अपनी चुप्पी तोड़ी है। ट्रस्ट की बैठक में उनका इस्तीफा स्वीकार किए जाने के एक दिन बाद मंगलवार को उन्होंने रामभक्तों के नाम एक पत्र जारी कर अपनी बात रखी।


अपने पत्र में चंपत राय ने कहा कि 7 जून 2026 को राम मंदिर परिसर के दानपात्र की गणना के दौरान हुई चोरी की घटना के बाद तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं और उन पर व्यक्तिगत रूप से अनेक निराधार आरोप लगाए गए हैं। इसी कारण उन्होंने अब तक मौन धारण किया था।                                                                                                                                                 उन्होंने कहा कि 6 जुलाई को हुई ट्रस्ट की बैठक में एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, जो अब सार्वजनिक हो चुकी है। हालांकि यह रिपोर्ट "परम गोपनीय" थी। उन्होंने रामभक्तों को आश्वस्त करते हुए कहा कि एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद उनके खिलाफ लगाए जा रहे सभी आरोपों और उठाए गए हर बिंदु पर क्रमवार जवाब देंगे। उनका दावा है कि अंतिम रिपोर्ट के बाद पूरा सच सामने आ जाएगा।
पत्र में चंपत राय ने अपने सार्वजनिक जीवन का भी उल्लेख किया। उन्होंने लिखा कि अक्टूबर 1991 में उन्हें संगठन द्वारा अयोध्या भेजा गया था और उनका प्रचारक जीवन 45 वर्षों का रहा है। उन्होंने कहा कि जहां-जहां उन्होंने कार्य किया, उनका जीवन एक खुली पुस्तक की तरह रहा है। अंत में उन्होंने सभी को आदरपूर्वक नमन किया।

संतों ने माना इस्तीफा स्वीकार्य करना उचित फैसला

 श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर रामनगरी के संतों ने मिश्रित प्रतिक्रिया व्यक्त की। संतों ने कहा कि जो भी निर्णय हुआ, वह परिस्थितियों के अनुरूप उचित है। साथ ही उन्होंने चंपत राय को पूरी तरह निर्दोष बताते हुए कहा कि उनका इस्तीफा नैतिकता के आधार पर दिया गया कदम है, जिसका स्वागत किया जाना चाहिए।
संतों ने कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट द्वारा प्रबंधन व्यवस्था को और अधिक सशक्त एवं पारदर्शी बनाने की दिशा में जो नई व्यवस्था की जा रही है, उसका भी स्वागत है। हालांकि उन्होंने मांग उठाई कि मंदिर की व्यवस्थाओं की निगरानी के लिए एक स्वतंत्र निगरानी समिति का गठन किया जाए, जिसमें अयोध्या के वरिष्ठ संतों को प्रमुखता से शामिल किया जाए।
संतों का कहना था कि यदि अयोध्या के संतों की भागीदारी नहीं बढ़ाई गई तो भविष्य में भी इस प्रकार के विवाद और कलंक लगते रहेंगे। उन्होंने यह भी मांग की कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में रामानंदाचार्य परंपरा का समुचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए। संतों ने कहा कि जहां संतों का मार्गदर्शन और सहभागिता होती है, वहां धर्म की स्थापना और व्यवस्थाओं में पारदर्शिता बनी रहती है। संतों ने यह भी कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देवगिरी अपनी जिम्मेदारियां से बच रहे हैं। यदि चढ़ावा चोरी मामले में चंपत राय की लापरवाही है तो कहीं ना कहीं गोविंद देव गिरी की भी लापरवाही है ऐसे में इस्तीफा केवल चंपत राय से ही क्यों लिया गया।

एसआईटी की रिपोर्ट में यह बातें हुईं साफ , 70 बार चोरी कैमरे में कैद

 श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के भेंट/चढ़ावा गणना कक्ष में हुई चोरी के मामले में गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट पहली बार सार्वजनिक हुई है। यह रिपोर्ट श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में प्रस्तुत की गई। एसआईटी ने प्रथम दृष्टया माना है कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के भेंट/चढ़ावा की गणना प्रक्रिया के दौरान चोरी और गबन की घटनाएं हुईं। 27 अप्रैल से पहले भी चोरी और गबन होता रहा, लेकिन उस अवधि का सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध न होने के कारण वास्तविक नुकसान का आकलन संभव नहीं हो सका।
आरोपियों के बयान और बैंक खातों में मिली आय से अधिक धनराशि से यह संकेत मिले हैं। उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज में गणना कर्मियों की ओर से करीब 70 बार नोटों की गड्डियां और खुले नोट छिपाने की घटनाएं दर्ज मिलीं। रिपोर्ट में न केवल चोरी और गबन की घटनाओं की पुष्टि की गई है, बल्कि ट्रस्ट, बैंक, गणना कक्ष की निगरानी व्यवस्था, सुरक्षा प्रबंधन और प्रशासनिक जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। एसआईटी ने स्पष्ट किया है कि यह केवल प्रारंभिक जांच रिपोर्ट है, जबकि विस्तृत जांच अभी जारी है।
एसआईटी ने पाया कि चोरी इसलिए संभव हुई क्योंकि निर्धारित सुरक्षा उपायों का प्रभावी पालन नहीं किया गया। प्रवेश और निकास पर तलाशी, निर्धारित वेशभूषा, निजी सामान पर प्रतिबंध, हुंडीवार गणना, मूल्यवर्गवार अभिलेखीकरण और प्रभावी निगरानी जैसी व्यवस्थाएं व्यवहार में लागू नहीं थीं। ट्रस्ट और बैंक दोनों के प्रतिनिधि मौजूद रहते थे, फिर भी अपराध लगातार होता रहा। रिपोर्ट में कहा गया है कि 20 सितंबर 2024 को ट्रस्ट और बैंक के बीच हुई सहमति में गणना कक्ष में आने-जाने वालों के लिए सख्त व्यवस्था थी। लेकिन छह फरवरी 2025 को जारी एसओपी में अनिवार्य तलाशी की व्यवस्था बदलकर नियमित अथवा रैंडम तलाशी कर दी गई।
एसआईटी ने जांच रिपोर्ट के आधार पर आठ लोगों पर एफआईआर की संस्तुति की थी। इसके अलावा एसआईटी ने गणना कक्ष प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव, गणना कक्ष में मौजूद अन्य पर्यवेक्षणीय कर्मियों तथा रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के विरुद्ध भी प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना की संस्तुति की है।


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