India-US Talks: अमेरिका के 12.5% प्रस्तावित शुल्क का भारतीय उद्योग संगठन ने किया विरोध, FICCI-CII ने क्या कहा?

आईएएनएस, वॉशिंगटन Published by: अमन तिवारी Updated Thu, 09 Jul 2026 12:10 AM IST

भारतीय उद्योग संगठनों फिक्की और सीआईआई ने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि से भारतीय आयात पर प्रस्तावित 12.5 प्रतिशत शुल्क हटाने की मांग की है। उनका कहना है कि भारतीय कंपनियां कड़े श्रम नियमों का पालन करती हैं और इस शुल्क से निर्माताओं की लागत बढ़ेगी।

India-US Trade Talks: FICCI and CII Urge USTR to Withdraw Proposed Tariff on Indian Imports

भारत अमेरिका व्यापार समझौता (प्रतीकात्मक) - फोटो : एडॉब स्टॉक

विस्तार

भारत के प्रमुख उद्योग संगठनों ने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) से भारतीय आयात पर प्रस्तावित 12.5 प्रतिशत शुल्क को हटाने की मांग की है। संगठनों का कहना है कि भारतीय कंपनियां पहले से ही कड़े श्रम और पर्यावरण नियमों के तहत काम करती हैं। ऐसे में इस शुल्क से अमेरिकी निर्माताओं की लागत बढ़ेगी और इससे जबरन श्रम को रोकने में कोई मदद नहीं मिलेगी।
यूएसटीआर की धारा 301 के तहत हुई सुनवाई में फिक्की (FICCI) और सीआईआई (CII) के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि भारतीय उद्योग वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जबरन श्रम को खत्म करने के उद्देश्य का पूरा समर्थन करता है। लेकिन भारत पर इस तरह का शुल्क लगाना सही नहीं है।
फिक्की की प्रतिनिधि पूर्णिमा शेनॉय ने कहा कि भारतीय कंपनियों ने जिम्मेदारी से काम करने, आपूर्ति श्रृंखला की जांच, पारदर्शिता और पर्यावरण, सामाजिक एवं कॉर्पोरेट शासन (ईएसजी) नियमों को अपनाने में बड़ा निवेश किया है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित शुल्क का तरीका बहुत व्यापक है। यह सभी क्षेत्रों और उत्पादों पर एक समान लागू होता है, जो सही नहीं है। इसकी जगह जोखिम के आधार पर लक्षित तरीका अपनाना चाहिए।
शेनॉय ने बताया कि भारत का कानूनी ढांचा श्रम कानूनों, निरीक्षणों और अदालती उपायों से श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करता है। अमेरिका को निर्यात करने वाले अधिकांश भारतीय निर्यातक कड़े नियमों के तहत काम करते हैं। अतिरिक्त शुल्क से भारतीय निर्यातकों के साथ-साथ अमेरिकी निर्माताओं, खुदरा विक्रेताओं और उपभोक्ताओं पर भी खर्च का बोझ बढ़ेगा।
 
वहीं, सीआईआई की प्रतिनिधि शुचिता सोनालिका ने कहा कि उनका संगठन 10,500 से अधिक प्रत्यक्ष और 3.65 लाख से अधिक अप्रत्यक्ष सदस्यों का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने कहा कि 12.5 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क सही नहीं है। यह नियमों का पालन करने वाले उद्योगों को सजा देने जैसा है। उन्होंने इसके पक्ष में तीन मुख्य बातें रखीं।

पहली बात, भारत में जबरन श्रम को रोकने के लिए मजबूत कानून हैं। इनमें संविधान के सुरक्षा कवच, बंधुआ श्रम प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम, नए श्रम कोड और अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) के मुख्य समझौतों की मंजूरी शामिल है। भारत अपनी शीर्ष 1,000 सूचीबद्ध कंपनियों के लिए मानवाधिकारों और आपूर्ति श्रृंखला पर रिपोर्ट देना अनिवार्य बनाता है।

दूसरी बात, एल्युमीनियम, कपड़ा, फाउंड्री, फोर्जिंग और कृषि मशीनरी जैसे क्षेत्रों की भारतीय कंपनियां वैश्विक नियमों का पालन करती हैं। भारत से आयात होने वाला कोई भी प्रमुख सामान अमेरिकी मानव तस्करी पीड़ित संरक्षण अधिनियम की सूची में नहीं है।

तीसरी बात, यूएसटीआर की आर्थिक रिपोर्ट यह साबित करने में विफल रही कि भारत की नीतियां अमेरिकी व्यापार को नुकसान पहुंचा रही हैं। सोनालिका ने कहा कि शुल्क लगाने के बजाय सहयोग और बातचीत का रास्ता ज्यादा असरदार होगा। सीआईआई इस दिशा में आईएलओ और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) के साथ मिलकर काम कर रहा है। दोनों संगठनों ने अमेरिका से अपील की कि वे इस शुल्क पर दोबारा विचार करें और मजबूत द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा दें।

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