MP By Election: दतिया में नरोत्तम मिश्रा की जगह नया चेहरा, BJP के चौंकाने वाले फैसले के क्या हैं सियासी मायने?

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: दिनेश शर्मा Updated Fri, 10 Jul 2026 08:09 PM IST

भाजपा ने दतिया उपचुनाव में डॉ. नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाकर नए नेतृत्व, संगठनात्मक पृष्ठभूमि और स्थानीय समीकरणों पर भरोसा जताया है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार 2023 की हार, एंटी-इनकम्बेंसी और संगठन के फीडबैक के चलते यह फैसला लिया गया, जबकि नरोत्तम को नई जिम्मेदारी मिल सकती है।

New face replaces Narottam Mishra in Datia, what are the political implications of BJP's shocking decision?

दतिया में भाजपा ने इस बार नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी पर भरोसा जताया है। - फोटो : अमर उजाला

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दतिया उपचुनाव में भाजपा ने पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि हाल ही में जनता से माफी मांगकर राजनीतिक वापसी की कोशिश करने वाले नरोत्तम मिश्रा को पार्टी ने टिकट क्यों नहीं दिया।
दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए भाजपा ने आशुतोष तिवारी के नाम पर मुहर लगाकर कई राजनीतिक संदेश एक साथ दिए हैं। शिवराज सरकार में सबसे प्रभावशाली मंत्रियों में शामिल रहे डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटना प्रदेश भाजपा की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है। खास बात यह है कि मिश्रा ने उपचुनाव के लिए नामांकन पत्र भी खरीदा था और इससे पहले उन्हें राज्यसभा भेजे जाने की भी चर्चाएं चली थीं। इसके बावजूद पार्टी ने नए चेहरे पर भरोसा जताया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा केवल दतिया ही नहीं, बल्कि कई क्षेत्रों में पुराने चेहरों की जगह नए नेतृत्व को आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है। ऐसे में आशुतोष तिवारी को मौका देना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। इससे पार्टी लंबे समय से एक ही चेहरे पर निर्भर रहने की बजाय नए नेतृत्व को स्थापित करने का संदेश देना चाहती है।
पुराने चेहरे की जगह नए नेतृत्व को मौका 
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा दतिया में लंबे समय से एक ही चेहरे पर निर्भर रहने की रणनीति बदलना चाहती है। नरोत्तम मिश्रा 2008, 2013 और 2018 में लगातार चुनाव जीतकर मंत्री बने, लेकिन 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के राजेंद्र भारती से हार गए। माना जा रहा है कि इस हार के बाद पार्टी ने स्थानीय नेतृत्व और चुनावी रणनीति की नए सिरे से समीक्षा की। जानकारों का कहना है कि भाजपा अब पुराने चेहरों की जगह नई पीढ़ी के नेताओं को आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। दतिया में पार्टी एक ही चेहरे के भरोसे रहने के बजाए नए नेतृत्व को आगे बढ़ाने पर काम कर रही है।  

New face replaces Narottam Mishra in Datia, what are the political implications of BJP's shocking decision?

दतिया उपचुनाव के लिए भाजपा ने आशुतोष पर लगाया दांव - फोटो : अमर उजाला
स्थानीय स्तर पर नाराजगी 
यह चर्चा भी है कि 2023 की हार ने पार्टी को उम्मीदवार चयन पर दोबारा सोचने के लिए मजबूर किया। कुछ जानकारों का मानना है कि लंबे समय तक एक ही चेहरे के साथ चुनाव लड़ने से स्थानीय स्तर पर एंटी-इनकम्बेंसी का असर बढ़ा था। जनता के साथ ही स्थानीय संगठन में भी नरोत्तम को लेकर नाराजगी की बात सामने आई थी। पार्टी को विजयपुर विधानसभा के उपचुनाव में हार का सामना करना पड़ा था। इस बार पार्टी कोई भी जोखिम नहीं लेना चाहती, जिससे कोई नेगेटिव मैसेज जनता के बीच जाए। 

अब नरोत्तम मिश्रा के सामने क्या विकल्प?
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, डॉ. नरोत्तम मिश्रा के सामने फिलहाल यह संभावनाएं हैं कि वह पार्टी के स्टार प्रचारक के रूप में दतिया और मध्य प्रदेश के क्षेत्रों में प्रचार की जिम्मेदारी निभाएं। उनको पार्टी प्रदेश संगठन या राष्ट्रीय स्तर पर नई भूमिका दे सकता है। उनकी केंद्रीय नेतृत्व से करीबी मानी जाती हैं। यहां फिर सरकार या संगठन में किसी अन्य महत्वपूर्ण दायित्व की जिम्मेदारी भी दी जा सकती है।

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दतिया में भाजपा ने प्रत्याशी घोषित कर दिया है, कांग्रेस प्रत्याशी का नाम आना बाकि - फोटो : अमर उजाला
संगठन से जुड़े चेहरे पर भरोसा
आशुतोष तिवारी लंबे समय तक भाजपा संगठन और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि से जुड़े रहे हैं। वे शिवराज सरकार के दौरान ग्वालियर क्षेत्र के संगठन मंत्री रहे, मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष भी रह चुके हैं और मूल रूप से दतिया जिले के भांडेर क्षेत्र से आते हैं। राजनीतिक जानकार इसे संगठनात्मक पृष्ठभूमि वाले नेतृत्व को प्राथमिकता देने के संकेत के रूप में भी देख रहे हैं। हालांकि इस संबंध में भाजपा या संघ की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है। 

ब्राह्मण वोट बैंक को साधा 
दतिया में नरोत्तम मिश्रा के स्थान पर आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाकर भाजपा ने जातीय समीकरण में बड़ा बदलाव नहीं किया। दोनों ही ब्राह्मण समाज से आते हैं। ऐसे में राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी ने नया चेहरा देने के साथ-साथ ब्राह्मण वोट बैंक को भी अपने साथ बनाए रखने की कोशिश की है।

पार्टी के सामने चुनौतियां कम नहीं 
वरिष्ठ पत्रकार देवश्री माली का कहना है कि भाजपा इस उपचुनाव में किसी तरह का राजनीतिक जोखिम नहीं लेना चाहती। विजयपुर उपचुनाव के अनुभव के बाद पार्टी ऐसा कोई फैसला नहीं करना चाहती, जिससे नकारात्मक संदेश जाए। उनके अनुसार, आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाकर भाजपा ने एक तरफ नया चेहरा सामने रखा, वहीं दूसरी ओर ब्राह्मण वोट बैंक को भी साधने का प्रयास किया है। लेकिन पार्टी की चुनौती यहीं खत्म नहीं होती। देवश्री माली का कहना है कि दतिया में डॉ. नरोत्तम मिश्रा का वर्षों से मजबूत राजनीतिक और संगठनात्मक नेटवर्क रहा है। बूथ स्तर तक उनके समर्थक सक्रिय रहे हैं। ऐसे में नए उम्मीदवार के पक्ष में उसी नेटवर्क को सक्रिय बनाए रखना भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी।

नरोत्तम को मिल सकती है संगठन में भूमिका 
वरिष्ठ पत्रकार प्रभु पटैरिया का कहना है कि भाजपा उम्मीदवारों का चयन व्यापक फीडबैक और संगठनात्मक प्रक्रिया के आधार पर करती है। यदि पार्टी ने नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं दिया है तो संभव है कि उनकी आगे की भूमिका पर भी विचार किया गया हो। उनके अनुसार, डॉ. मिश्रा को भविष्य में प्रदेश या राष्ट्रीय संगठन में नई जिम्मेदारी मिल सकती है। वहीं टिकट नहीं मिलने के पीछे 2023 की चुनावी हार, स्थानीय स्तर पर उनके खिलाफ मिले नाराजगी के फीडबैक और पार्टी के आंतरिक सर्वे वजह हो सकती है।

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