भोपाल। नगरीय विकास एवं आवास राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी को कथित फर्जी जाति प्रमाण पत्र मामले में राज्य स्तरीय छानबीन समिति से बड़ी राहत मिली है। समिति ने एक विस्तृत जांच के बाद उनके जाति प्रमाण पत्र को पूरी तरह वैध और प्रमाणिक पाते हुए उनके खिलाफ दर्ज शिकायत को खारिज कर दिया है।
सूत्रों के मुताबिक, समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि उपलब्ध दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर राज्य मंत्री के खिलाफ लगाए गए आरोप प्रमाणित नहीं होते हैं। हालांकि, इस फैसले का आधिकारिक आदेश जल्द ही जारी होने की संभावना है। यह पूरा विवाद तब राजनीतिक गलियारों में गरमाया था, जब मध्य प्रदेश कांग्रेस अनुसूचित जाति (एससी) विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने मंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र को चुनौती देते हुए एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता का आरोप था कि प्रतिमा बागरी अनुसूचित जाति वर्ग से ताल्लुक नहीं रखतीं, बल्कि वे राजपूत (सामान्य वर्ग) समाज से हैं। आरोप में यह भी कहा गया था कि उन्होंने आरक्षित सीट से विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए गलत जाति प्रमाण पत्र का सहारा लिया।
430 पन्नों के दस्तावेज बनाम मंत्री की दलीलें
मामले की गंभीरता को देखते हुए छानबीन समिति ने दोनों पक्षों को अपना रुख स्पष्ट करने का मौका दिया था। सुनवाई के दौरान राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी ने समिति के समक्ष उपस्थित होकर अपना पक्ष रखा और अपनी जाति की प्रामाणिकता साबित करने वाले कई महत्वपूर्ण शासकीय दस्तावेज प्रस्तुत किए। दूसरी ओर, शिकायतकर्ता प्रदीप अहिरवार ने भी अपने आरोपों के समर्थन में करीब 430 पन्नों के दस्तावेज समिति को सौंपे थे। उन्होंने वर्ष 1950 के भारत सरकार के गजट सहित विंध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के कुछ ऐतिहासिक व प्रशासनिक अभिलेखों का हवाला देते हुए बागरी समाज की जातिगत स्थिति पर सवाल उठाए थे।
जांच के बाद आई क्लीन चिट
समिति ने दोनों पक्षों द्वारा पेश की गई दलीलों, ऐतिहासिक संदर्भों और राजस्व दस्तावेजों की गहनता से समीक्षा की। विस्तृत जांच-पड़ताल के बाद राज्य स्तरीय छानबीन समिति इस निष्कर्ष पर पहुंची कि शिकायत में लगाए गए आरोपों का कोई ठोस आधार नहीं है। समिति ने मंत्री के प्रमाण पत्र को पूरी तरह वैध माना है।