नए मतदाता पर फोकस, तीन साल चलेगा अभियान

 

कार्यकर्ता की उदासीनता बढ़ा दी भाजपा की चिंता
भोपाल। प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान में अपेक्षित सफलता न मिलने के बाद भाजपा संगठन अब डैमेज कंट्रोल की तैयारी में है। पार्टी ने आगामी तीन वर्षों तक नए वोटर्स पर फोकस करने के लिए एक विशेष कार्ययोजना तैयार की है। वहीं कार्यकर्ताओं की उदासीनता ने भी भाजपा की चिंता को बढ़ा दिया है।
दरअसल, संगठन की सबसे बड़ी चिंता उन लाखों नामों को लेकर है जो मतदाता सूची से कट गए हैं, लेकिन उन्हें दोबारा जुड़वाने में बूथ स्तर पर वैसी सक्रियता नहीं दिखी जैसी भाजपा की पहचान रही है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, कार्यकर्ताओं की इस उदासीनता के पीछे सत्ता और संगठन के बीच का असंतोष एक बड़ी वजह माना जा रहा है। सरकार गठन के दो साल बीत जाने के बाद भी निगम-मंडल, आयोगों और समितियों में नियुक्तियां अटकी हुई हैं। एल्डरमैन जैसे पदों पर नियुक्तियां न होने से जमीनी कार्यकर्ता खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं, जिसका सीधा असर मतदाता सूची अपडेट करने के काम पर पड़ा है।
बदल सकते हैं जीत-हार के समीकरण
पार्टी के भीतर इस बात को लेकर गहरी चिंता है कि हर विधानसभा सीट पर हजारों की संख्या में वोट कटे हैं। कम अंतर (मार्जिन) से जीती गई सीटों पर यह स्थिति आगामी चुनावों में बड़ा उलटफेर कर सकती है। इसी गंभीर विषय पर राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने हालिया बैठक में कड़ी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कटे हुए नामों को न जुड़वा पाना संगठन की बड़ी चूक है।
कटे नामों को जुड़वाने का किया जाएंगा काम
एसआईआर (एसआईआर) अभियान की औपचारिकताओं से असंतुष्ट भाजपा हाईकमान ने अब तीन साल की लंबी अवधि की रणनीति बनाई है। इसके तहत अगले तीन साल तक लगातार नए मतदाताओं को जोड़ने का काम चलेगा। मंडल और शक्ति केंद्र के पदाधिकारियों की सक्रियता की सीधे मॉनिटरिंग की जाएगी।  कटे हुए नामों की सूची तैयार कर उन्हें दोबारा फॉर्म-6 भरवाकर जुड़वाया जाएगा।


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