लंबित राजस्व मामलों के निपटारे में आएगी तेजी
भोपाल। राजधानी में प्रशासनिक कामकाज में कसावट लाने और जनता की समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए जिला प्रशासन एक बार फिर एसडीएम और तहसीलदारों की ग्रेडिंग परफॉर्मेंस प्रणाली शुरू करने जा रहा है। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने हाल ही में अधिकारियों के साथ हुई बैठक में इस नवाचार को फिर से लागू करने के संकेत दिए हैं। माना जा रहा है कि अगले माह से जिले के प्रशासनिक अफसरों के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड तैयार होना शुरू हो जाएगा।
उल्लेखनीय है कि पिछले दो वर्षों से अत्यधिक व्यस्तता और अन्य प्रशासनिक कारणों से यह प्रक्रिया ठप पड़ी थी। हाल ही में जबलपुर जिला प्रशासन द्वारा अपनाई गई कार्यप्रणाली से प्रेरणा लेते हुए भोपाल में भी इसे फिर से शुरू करने की योजना बनी है। वर्तमान में जिले में करीब 8 हजार राजस्व मामले लंबित हैं। ग्रेडिंग सिस्टम शुरू होने से अफसरों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, जिससे फाइलों की पेंडेंसी खत्म होने की उम्मीद है। इन मानकों पर मिलेगी रेटिंग (ए,बी,सी और डी ग्रेड) अधिकारियों की रिपोर्ट तैयार करने के लिए कड़े मानक तय किए गए हैं। इनमें मुख्य रूप से एक वर्ष से अधिक पुराने मामलों की स्थिति, राजस्व संग्रहण के लक्ष्य की प्राप्ति, कार्यालय की स्वच्छता और रिकॉर्ड का रख-रखाव और क्षेत्र में किए गए नए और सकारात्मक कार्य शामिल हैं। प्रशासन का मानना है कि ग्रेडिंग सिस्टम का सबसे बड़ा लाभ आम जनता को मिलता है। ए, बी, सी और डी ग्रेड के साथ ही इसमें माइनस मार्किंग का भी प्रावधान है। खराब ग्रेडिंग से बचने के लिए अफसर आवेदकों की शिकायतों और आवेदनों पर तुरंत एक्शन लेते हैं। इससे न केवल कार्यप्रणाली पारदर्शी होती है, बल्कि दफ्तरों के चक्कर काट रहे लोगों को राहत मिलती है।
अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के अंक जोड़ने की मांग
विभागीय सूत्रों के अनुसार, पिछली बार कई अधिकारियों ने ग्रेडिंग प्रणाली पर सवाल उठाते हुए मांग की थी कि अतिक्रमण विरोधी मुहिम को भी मूल्यांकन में शामिल किया जाए। अफसरों का तर्क है कि वे फील्ड में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में घंटों व्यस्त रहते हैं, जिसके कारण ऑफिस के रूटीन काम पिछड़ जाते हैं और उनकी ग्रेडिंग गिर जाती है। ऐसे में इस बार इस बिंदु को भी शामिल किया जा सकता है।