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मंगलवार को कैबिनेट बैठक में पहुंचते वक्त पत्रकारों से बात करते हुए कार्नी ने आंखें घुमाते हुए कहा मैं बिल्कुल स्पष्ट करना चाहता हूं और यह बात मैंने राष्ट्रपति ट्रंप से भी कही कि दावोस में मैंने जो कहा, उसका वही मतलब था। कार्नी ने बताया कि कनाडा अमेरिका की बदलती व्यापार नीतियों को सबसे पहले समझने वाला देश रहा है और अब वह उसी के मुताबिक प्रतिक्रिया दे रहा है। उन्होंने खुलासा किया कि कनाडा अगले छह महीनों में चार महाद्वीपों पर 12 नए व्यापार समझौते करने की दिशा में काम कर रहा है, ताकि अमेरिका पर निर्भरता कम की जा सके।
दावोस भाषण बना चर्चा का केंद्र
पिछले हफ्ते वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम, दावोस में कार्नी ने बिना ट्रंप का नाम लिए बड़ी शक्तियों द्वारा छोटे देशों पर आर्थिक दबाव डालने की आलोचना की थी। इस भाषण को वैश्विक स्तर पर सराहना मिली और कई लोगों ने इसे ट्रंप पर अप्रत्यक्ष लेकिन तीखा हमला माना।
ट्रंप से क्या हुई बात?
कार्नी ने बताया कि ट्रंप ने खुद उन्हें फोन किया था। कार्नी ने कहा मैंने उन्हें चीन के साथ हमारे सीमित समझौते के बारे में बताया और यह भी समझाया कि हम क्या कर रहे हैं। वह काफी प्रभावित लगे। हालांकि ट्रंप ने हाल ही में चेतावनी दी थी कि अगर कनाडा बीजिंग के साथ बड़ा व्यापार समझौता करता है, तो कनाडाई सामानों पर 100% टैरिफ लगाया जा सकता है। कार्नी ने दोहराया कि कनाडा का चीन के साथ कोई व्यापक व्यापार समझौता करने का इरादा नहीं है।
अमेरिका पर निर्भरता कम करने की रणनीति
फिलहाल कनाडा के 75% से अधिक निर्यात अमेरिका जाते हैं। इसी निर्भरता को कम करने के लिए कार्नी भारत, ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों की यात्रा की योजना बना रहे हैं। उनका लक्ष्य अगले दस वर्षों में गैर-अमेरिकी निर्यात को दोगुना करना है। इस बीच, अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने दावा किया कि कार्नी अपने दुर्भाग्यपूर्ण डेवोस दावोस से पीछे हट रहे थे, जिसे कार्नी ने पूरी तरह गलत बताया।
ग्रीनलैंड और संप्रभुता का मुद्दा
ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने की इच्छा और कनाडा को 51वां राज्य कहने जैसी टिप्पणियों ने दोनों देशों के रिश्तों में और तनाव पैदा किया है। हाल ही में ट्रंप द्वारा सोशल मीडिया पर साझा की गई एक विवादित मैप इमेज ने भी विवाद को हवा दी।