अन्ना हजारे के रोने का वीडियोः मौन आंदोलन के दौरान फफक-फफक कर रो पड़े, तबीयत ठीक नहीं होने के बावजूद Protest में शामिल हुए

                                       Ravi Ranjan24 Jul 2026, 11:48 AM ट्रेंडिंग

Anna Hazare Cried Video: नीट पेपर लीक के विरोध और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी पिछले 34 दिन से दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना दे रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों के समर्थन में गुरुवार को अहिल्यानगर में दो घंटे का ‘मौन आंदोलन’ किया। मौन आंदोलन के दौरान अन्ना हजारे फफक-फफकर रोने लगे। अन्ना हजारे की तबीयत ठीक नहीं थी फिर वो इसमें शरीक हुए। वो यहां कुछ देर रुके और फिर चले गए। अन्ना हजारे के रोने का वीडियो का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

 

अन्ना ने अहिल्यानगर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास सुबह 11 बजे अपना विरोध प्रदर्शन शुरू किया और दोपहर एक बजे इसे समाप्त किया। इसके बाद वह इसी जिले में स्थित अपने गांव रालेगण सिद्धि के लिए रवाना हो गए। 

जाने-माने सोशल एक्टिविस्ट अन्ना हजारे ने दिल्ली में चल रहे स्टूडेंट्स के आंदोलन के सपोर्ट में वाडिया पार्क में गांधी मेमोरियल पर साइलेंट प्रोटेस्ट में हिस्सा लिया।तबीयत खराब होने के बावजूद, हजारे स्टूडेंट्स को अपना मोरल सपोर्ट देने के लिए प्रोटेस्ट में शामिल हुए, लेकिन हेल्थ प्रॉब्लम की वजह से थोड़ी देर बाद ही वे वहां से चले गए। स्टूडेंट्स के साथ सॉलिडैरिटी दिखाते हुए वे इमोशनल भी हो गए। उनके जाने के बाद भी साइलेंट प्रोटेस्ट जारी है 

अन्ना न सिर्फ मौन आंदोलन में शामिल हुए बल्कि इससे पहले बुधवार (22 जुलाई) को उन्होंने छात्रों के मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी खत लिखा। इससे पहले बुधवार को अपनी चिट्ठी में उन्होंने लिखा- हिंसा और पुलिस कार्रवाई की खबरें बेहद पीड़ादायक हैं। उन्होंने पत्र में कहा था कि प्रदर्शनकारियों के असंतोष को ‘‘कानून-व्यवस्था की समस्या के रूप में नहीं, बल्कि समाज की पीड़ा और अपेक्षाओं के रूप में देखा जाना चाहिए। अन्ना हजारे ने लिखा था कि यदि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा देने को कहा जाता है तो इससे  सरकार नहीं गिरेगी, बल्कि उसकी कार्यप्रणाली अधिक जवाबदेह और प्रभावी बनेगी।

हिंसा एवं पुलिस कार्रवाई को दुखद बताया
अन्ना हजारे ने प्रदर्शन के दौरान हिंसा एवं पुलिस कार्रवाई को दुखद बताते हुए कहा कि लोकतंत्र में हर स्थिति में हिंसा,  सरकारी संपत्तियों को नुकसान तथा अत्यधिक बल प्रयोग से बचा जाना चाहिए। गांधीवादी विचारक ने कहा कि देश के लाखों युवा परीक्षा के पेपर लीक होने, भर्ती प्रक्रिया में देरी और बेरोज़गारी जैसे मुद्दों को लेकर चिंतित हैं 


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