भोपाल। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा के बीच लंबे समय से चला आ रहा मानहानि का विवाद अब पूरी तरह सुलझ गया है। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों के बीच हुए इस ’सौहार्दपूर्ण समझौते’ को रिकॉर्ड पर लेते हुए मामले का निपटारा कर दिया।
जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और एन.के. सिंह की पीठ भाजपा नेताओं (शिवराज सिंह चौहान, वी.डी. शर्मा और भूपेंद्र सिंह) द्वारा दायर उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें तन्खा द्वारा दर्ज आपराधिक मानहानि की कार्यवाही को चुनौती दी गई थी।
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने कोर्ट को बताया पार्टियों ने संसद में मुलाकात के बाद अपने मतभेद सुलझा लिए हैं। विवेक तन्खा अब सिविल और आपराधिक, दोनों तरह की शिकायतें वापस लेंगे। मामले को बंद करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राजनीति में बढ़ती संवेदनशीलता पर मौखिक रूप से महत्वपूर्ण टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में राजनेताओं को मोटी चमड़ी वाला होना चाहिए। राजनेताओं से उच्च स्तर की सहनशीलता की उम्मीद की जाती है। अदालत ने कहा कि अलग-अलग तरह की भाषा और बयानबाजी उनके काम का हिस्सा है, इसलिए उन्हें अधिक संवेदनशील होने से बचना चाहिए। बेंच ने दोनों पक्षों द्वारा विवाद को आपसी सहमति से खत्म करने के कदम की सराहना की।
क्या था विवाद
यह पूरा विवाद मध्य प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान दिए गए कुछ बयानों से शुरू हुआ था, जिसके बाद विवेक तन्खा ने भाजपा नेताओं के खिलाफ मानहानि का केस दर्ज कराया था। 11 नवंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने भाजपा नेताओं को अंतरिम राहत देते हुए जमानत वारंट पर रोक लगा दी थी। अब समझौते के बाद सभी लंबित विवाद और कानूनी कार्यवाही समाप्त घोषित कर दी गई है।