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MP में सुरक्षित होंगे स्टेट हाईवे, AI generated
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी) एक्सीडेंट रिस्पांस सिस्टम (एआरएस) को अद्यतन करने जा रहा है। वर्ष 2014 में शुरू किए गए इस इंटीग्रेटेड सिस्टम के जरिये स्टेट हाईवे पर होने वाली दुर्घटनाओं में टोल फ्री नंबर 1099 के माध्यम से सहायता पहुंचाई जाती है। हर साल इस सिस्टम पर औसतन चार हजार फोन आते हैं। अभी एआरएस 2.0 पर काम किया जा रहा है। इसका नया वर्जन एआरएस 3.0 तैयार होने वाला है।
इसे डायल 112, 108, 100 आदि से एकीकृत किया जाएगा ताकि दुर्घटना होने पर तुरंत ही घायलों को सहायता उपलब्ध कराई जा सके। सिस्टम को अपग्रेड करने में एमपीआरडीसी द्वारा नौ करोड़ 25 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। टेंडर प्रक्रिया शुरू हो गई है। एमपीआरडीसी द्वारा इस सिस्टम से स्टेट हाईवे और मुख्य जिला सड़कों पर होने वाली दुर्घटनाओं में सहायता उपलब्ध कराने के साथ ही पूरा डेटाबेस भी रखा जाता है।
एआरएस का मुख्य कार्य घटनास्थल का पता लगाना है। हाईवे पर लगे कैमरों या एंबुलेंस व पेट्रोलिंग वाहनों में लगे जीपीएस और सेंसर के माध्यम से दुर्घटना की जानकारी प्राप्त की जाती है। सूचना मिलते ही केंद्रीकृत काल सेंटर से कंप्यूटर एडेड डिस्पैच सिस्टम के जरिये दुर्घटनास्थल के सबसे पास मौजूद एंबुलेंस और पुलिस को तुरंत सूचित किया जाता है। इसके बाद सुनिश्चित किया जाता है कि दुर्घटना में घायल हुए व्यक्ति को प्राथमिक उपचार के साथ ही सहायता प्राप्त हो सके।
एआरएस की शुरुआत 28 दिसंबर, 2014 को की गई थी। तीन फरवरी, 2026 तक इस सिस्टम के जरिए सात लाख एक हजार से अधिक दुर्घटनाओं में सहायता उपलब्ध कराई गई है। इस वर्ष एक जनवरी से लेकर तीन फरवरी तक 502 हादसे दर्ज किए गए हैं। एआरएस के काल सेंटर पर इस साल 4117 फोन काल दर्ज किए गए हैं। यदि दुर्घटनाओं की बात की जाए, तो वर्ष 2024 में सबसे ज्यादा हादसे स्टेट हाईवे पर हुए थे। इस वर्ष तीन लाख 85 हजार दुर्घटनाओं की सूचना दर्ज की गई थी।