लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के जवाब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रस्तावित संबोधन हंगामे के कारण टाल दिया गया। दिनभर चले विरोध, नारेबाजी और बार-बार स्थगन के बाद शाम को जब कार्यवाही फिर से शुरू हुई, तब हालात और बिगड़ गए। इसके बाद कार्यवाही स्थगित कर दी गई।
भाजपा का आरोप, विपक्ष पर गंभीर सवाल
संबोधन टालने पर भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने आरोप लगाया कि यह विरोध पहले से तय योजना के तहत किया गया था। उनका दावा है कि महिला सांसद प्रधानमंत्री की सीट के आसपास घेराव जैसी स्थिति बना रही थीं। उन्होंने कहा कि स्थिति डराने वाली थी और संसदीय कार्य मंत्री कंवल जीत सिंह ढिल्लों की तत्परता से हालात काबू में आए। वहीं, विपक्ष ने इसे लोकतांत्रिक विरोध बताया। धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा अब अगली बैठक में जारी रहने की संभावना है।
मनोज तिवारी ने आगे बताया कि शाम करीब पांच बजे जब सदन फिर से शुरू हुआ और प्रधानमंत्री के जवाब की उम्मीद थी, तभी विपक्ष की कुछ महिला सांसद ट्रेजरी बेंच की सीटों के पास पहुंच गईं। इनमें वर्षा गायकवाड़ और ज्योतिमणि शामिल थीं। उन्होंने 'डू व्हॉट इज राइट' लिखा बड़ा बैनर पकड़ रखा था। यह विरोध एक दिन पहले निलंबित किए गए आठ विपक्षी सांसदों के समर्थन में बताया गया। महिला सांसदों ने प्रधानमंत्री की सीट के आसपास खड़े होकर विरोध जताया।
राहुल गांधी ने क्या कहा?
प्रधानसंत्री के संबोधन न होने पर भी नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वीडियो साझा कर कहा कि जैसा उन्होंने पहले कहा था, पीएम सदन में नहीं आएंगे क्योंकि वे सच्चाई का सामना नहीं करना चाहते। वीडियो में राहुल गांधी दोपहर के समय यह कहते दिखे कि यदि प्रधानमंत्री आते तो वे उन्हें एक किताब देते और उस पर चर्चा की मांग करते।
क्या हुआ सदन में, कैसे बढ़ा हंगामा?
सदन में विवाद की शुरुआत उस मुद्दे से हुई जब विपक्ष ने आरोप लगाया कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को पूर्व सेना प्रमुख की अप्रकाशित किताब का हवाला देने से रोका गया। इसी मुद्दे पर विपक्षी दल लगातार विरोध कर रहे थे। कार्यवाही के दौरान कई बार स्थगन हुआ। दोपहर से ही नारेबाजी और विरोध जारी रहा, जिससे सामान्य कामकाज प्रभावित हुआ।
पीठासीन सभापति ने कार्यवाही स्थगित की
उस समय स्पीकर की जगह पीठासीन सभापति संध्या राय सदन चला रही थीं। उन्होंने व्यवस्था बनाए रखने की अपील की, लेकिन हंगामा जारी रहा। ट्रेजरी बेंच के पास विरोध जारी रहने पर कार्यवाही स्थगित कर दी गई। बाद में कई केंद्रीय मंत्रियों के समझाने पर महिला सांसद वहां से हटीं। लेकिन तब तक प्रधानमंत्री का संबोधन नहीं हो सका और दिन की कार्यवाही खत्म कर दी गई।