बदलाव की शुरुआत वर्ष 2009 के बाद हुई, जब पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघ पुनर्स्थापना परियोजना सफल रही। वहां बाघों की संख्या तेजी से बढ़ी तो युवा बाघों ने नए इलाकों की तलाश शुरू की। पन्ना से जुड़े मझगवां, सरभंगा तथा धारकुंडी के जंगल उनके लिए स्वाभाविक कॉरिडोर बन गए।

छत्तीसगढ़-मप्र और उप्र के बीच बनेगा नया बाघ कॉरिडोर

राज्य सरकार भी प्रदेश में बढ़ती बाघों की संख्या के मद्देनजर नए कॉरिडोर को विकसित करने पर विचार कर रही है। पिछले दिनों बांधवगढ़ व संजय टाइगर रिजर्व से लेकर छत्तीसगढ़ के अचानकमार जैसे करीब चार नए कॉरिडोर को लेकर बैठक भी हो चुकी है। पन्ना-सतना, उप्र के रानीपुर टाइगर रिजर्व के बीच नया कॉरिडोर तैयार करने पर भी मंथन चल रहा है।

फैक्ट फाइल

  • -1970 के दशक में चित्रकूट–पाठा–मझगवां क्षेत्र में डकैत गिरोहों का प्रभाव बढ़ा।
  • -22 जुलाई 2007 में कुख्यात डकैत शिव कुमार पटेल उर्फ ददुआ पुलिस मुठभेड़ में मारा गया।
  • -04 अगस्त 2008 में कुख्यात डकैत अंबिका प्रयास पटेल उर्फ ठोकिया के एनकाउंटर के साथ संगठित डकैत गिरोहों का तेजी से पतन हुआ।
  • -2015 के बाद से मझगवां-सरभंगा क्षेत्र में बाघों की स्थायी मौजूदगी दर्ज होना शुरू हुई।

डकैतों की मौजूदगी की वजह से जंगलों में गश्त आदि में दिक्कतें होती थीं। पन्ना में बाघों की संख्या बढ़ी तो बरौंधा व मझगवां रेंज में भी बाघों की संख्या बढ़ रही है।
- राजेंद्र सिंह, डिप्टी रेंजर।