राजधानी भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में आयोजित ब्रिक्स संस्कृति सम्मेलन में भारत की सांस्कृतिक विरासत, ज्ञान परंपरा और समुद्री सभ्यता को प्रदर्शित करती तीन विशेष प्रदर्शनियां आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। प्रोजेक्ट मौसम, वृहत्तर भारत और ज्ञान भारतम् विषय पर आधारित इन प्रदर्शनियों में भारत और ब्रिक्स देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों, प्राचीन ज्ञान और साझा विरासत को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। इन प्रदर्शनियों को सात और नौ अगस्त को आम नागरिकों के लिए भी खोला जाएगा।
दुनिया के साथ भारत के सांस्कृतिक संबंधों की जीवंत झलक - फोटो : अमर उजाला
'प्रोजेक्ट मौसम' प्रदर्शनी हिंद महासागर क्षेत्र से जुड़े देशों के बीच सदियों पुराने समुद्री व्यापार और सांस्कृतिक संबंधों को दर्शाती है। इसमें डिजिटल तकनीक, इमर्सिव फिल्म, इंटरेक्टिव डिस्प्ले और ग्राफिक्स के माध्यम से बताया गया है कि किस तरह मानसूनी हवाओं ने समुद्री व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया। प्रदर्शनी में यूनेस्को की बहुराष्ट्रीय विश्व धरोहर नामांकन की अवधारणा और विरासत संरक्षण की प्रक्रिया को भी सरल तरीके से समझाया गया है।
'वृहत्तर भारत' प्रदर्शनी भारत और एशिया, अफ्रीका सहित दुनिया के कई देशों के बीच हजारों वर्षों से चले आ रहे सांस्कृतिक और बौद्धिक संबंधों की झलक प्रस्तुत करती है। इसमें सम्राट अशोक, नालंदा विश्वविद्यालय, इंडोनेशिया, थाइलैंड, वियतनाम और सिल्क रूट से जुड़े ऐतिहासिक उदाहरणों के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक विरासत और उसके वैश्विक प्रभाव को दर्शाया गया है। संगीत, नृत्य, स्थापत्य कला और प्राचीन पांडुलिपियों के जरिए साझा सांस्कृतिक विरासत को भी प्रदर्शित किया गया है।
भारतीय ज्ञान परंपरा और पांडुलिपि विरासत का डिजिटल संरक्षण - फोटो : अमर उजाला
'ज्ञान भारतम्' प्रदर्शनी भारतीय ज्ञान परंपरा और प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण तथा डिजिटलीकरण पर केंद्रित है। इसमें अब तक 1.19 करोड़ से अधिक पांडुलिपियों के दस्तावेजीकरण की जानकारी दी गई है। प्रदर्शनी में 'लीलावती', 'रेखागणित', 'निरुक्त' और सिलिकॉन वेफर पर संरक्षित 'श्रीमद्भगवद्गीता' जैसी दुर्लभ पांडुलिपियां भी प्रदर्शित की गई हैं, जो भारतीय गणित, दर्शन, साहित्य और भाषा-विज्ञान की समृद्ध परंपरा को दर्शाती हैं।
सम्मेलन में मध्य प्रदेश पवेलियन भी विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। सांची स्तूप के मुख्य तोरण द्वार की प्रतिकृति पर आधारित इस पवेलियन में खजुराहो, भीमबेटका, मांडू, ग्वालियर, ओरछा, महेश्वर, टाइगर रिजर्व, राष्ट्रीय उद्यान और प्रदेश की लोक एवं जनजातीय कला का प्रदर्शन किया गया है। गोंड चित्रकला, मृदा शिल्प, नंदना ब्लॉक प्रिंटिंग और स्थानीय उत्पाद भी यहां प्रदर्शित किए गए हैं। यह पवेलियन देश-विदेश से आए प्रतिनिधियों को मध्य प्रदेश की पर्यटन क्षमता, सांस्कृतिक विविधता और स्थानीय कला से परिचित करा रहा है।