*केन–बेतवा लिंक परियोजना की वास्तविक स्थिति*

                *केन–बेतवा लिंक परियोजना की वास्तविक स्थिति*
कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि मध्य प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में केन–बेतवा लिंक परियोजना के खिलाफ “चिता आंदोलन”, “फांसी प्रदर्शन” और “जल सत्याग्रह” जैसे प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। इन प्रदर्शनों में आरोप लगाया गया है कि आदिवासी परिवारों को बिना मुआवजा दिए विस्थापित किया जा रहा है। यह आरोप कि प्रभावित परिवारों को मुआवजा या पुनर्वास का लाभ नहीं मिला है, गलत और भ्रामक है। अधिकांश पात्र परिवारों को पूरा मुआवजा और पुनर्वास का लाभ दिया जा चुका है। कुछ मामलों में केवल जरूरी कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी की जानी बाकी हैं। भारत सरकार, मध्य प्रदेश सरकार और केन–बेतवा लिंक परियोजना प्राधिकरण सभी प्रभावित परिवारों को पारदर्शी, उचित और समयबद्ध मुआवजा तथा सम्मानजनक पुनर्वास देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।

तथ्य यह है कि केन–बेतवा लिंक परियोजना राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना के तहत देश की पहली बड़ी नदी जोड़ो परियोजना है। इसका उद्देश्य केन नदी के अतिरिक्त पानी को बेतवा नदी तक पहुंचाना है, ताकि मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में सिंचाई, पेयजल और बिजली की सुविधा बढ़ाई जा सके। इस परियोजना से 10.62 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा मिलेगी, करीब 62 लाख लोगों को पीने का पानी उपलब्ध होगा और 103 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जाएगा। परियोजना की कुल अनुमानित लागत ₹44,604.99 करोड़ है और जुलाई 2026 तक इसमें ₹12,445.85 करोड़ खर्च किए जा चुके हैं। परियोजना का कार्य केन–बेतवा लिंक परियोजना प्राधिकरण द्वारा किया जा रहा है।

भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन का काम RFCTLARR Act, 2013 और मध्य प्रदेश सरकार द्वारा 13 सितंबर 2023 को मंजूर किए गए विशेष पुनर्वास पैकेज के अनुसार किया जा रहा है। अधिग्रहित भूमि के लिए मुआवजा कानून के अनुसार या ₹12.50 लाख प्रति हेक्टेयर, जो भी अधिक हो, उसके आधार पर दिया जा रहा है। मकान, पेड़, कुएं, ट्यूबवेल और अन्य अचल संपत्तियों के लिए भी कानून के अनुसार मुआवजा तय किया गया है। पात्र परिवारों को ग्रामीण क्षेत्र में प्लॉट के लिए ₹7 लाख और शहरी क्षेत्र में प्लॉट के लिए ₹6.50 लाख दिए जा रहे हैं। जो परिवार प्लॉट नहीं लेना चाहते, उन्हें एकमुश्त ₹12.50 लाख की सहायता दी जा रही है। इसके अलावा, अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले पात्र अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति परिवारों को अतिरिक्त आर्थिक सहायता भी दी जा रही है, ताकि पुनर्वास प्रक्रिया उचित और संतुलित तरीके से हो सके।

जुलाई 2026 तक कृषि भूमि के मुआवजे के लिए 10,913 प्रभावित लोगों के लिए कुल ₹360.66 करोड़ के अवॉर्ड जारी किए गए हैं, जिनमें से ₹320.45 करोड़ यानी 88.85 प्रतिशत राशि का भुगतान किया जा चुका है। रहवासी क्षेत्रों और मकानों से जुड़ी संपत्तियों के लिए ₹149.63 करोड़ का मुआवजा तय किया गया है, जिसमें से 93.97 प्रतिशत राशि का भुगतान हो चुका है। पुनर्वास के लिए कुल 5,039 प्रभावित परिवारों की पहचान की गई है। इनके लिए ₹629.87 करोड़ के अवॉर्ड जारी किए गए हैं, जिनमें से ₹590.74 करोड़ यानी 93.78 प्रतिशत का भुगतान किया जा चुका है। बाकी भुगतान जरूरी कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद किया जाएगा। यह सुनिश्चित करने के लिए भूमि रिकॉर्ड की लगातार जांच भी की जा रही है कि कोई भी पात्र परिवार सरकारी लाभ से वंचित न रहे।

जन विश्वास कार्यक्रम के तहत जिला प्रशासन ने हाल ही में करौंदिया में विस्थापित परिवारों की समस्याओं को दूर करने के लिए एक विशेष कैंप लगाया। इस कैंप में पशुपालन, सामाजिक सुरक्षा, गरीबी रेखा, लाड़ली बहना और लाड़ली लक्ष्मी जैसी योजनाओं से जुड़े आवेदनों को मंजूरी दी गई। इसके अलावा 178 लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं दी गईं, आयुष की दवाएं वितरित की गईं, खराब हैंडपंपों की मरम्मत की गई, विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति मैपिंग की गई और छात्रों को किताबें वितरित की गईं। सिर्फ पिछले 10 दिनों में 86 प्रभावित लोगों के लिए ₹10.42 करोड़ की राशि मंजूर की गई है।

ये सभी तथ्य स्पष्ट करते हैं कि मीडिया में बताए गए विरोध प्रदर्शनों को लेकर किए जा रहे दावे भ्रामक हैं। हाल के विरोध प्रदर्शनों में शामिल बताए जा रहे कुछ लोगों के नाम परियोजना से प्रभावित परिवारों की सूची, भूमि रिकॉर्ड या मुआवजा रजिस्टर में नहीं पाए गए हैं। ऐसे में यह सामने आता है कि इन गतिविधियों को बड़े स्तर पर बाहरी लोगों द्वारा अंजाम दिया जा रहा है, जिनका उद्देश्य परियोजना को लेकर भ्रामक और तथ्यहीन बातें फैलाना है। सरकार की प्राथमिकता स्पष्ट है—हर पात्र प्रभावित परिवार को उसका उचित मुआवजा, पुनर्वास और सभी जरूरी सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराना।


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