राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (RRU), गुजरात ने गुजरात पुलिस की एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) के पुलिस निरीक्षकों के लिए 20 से 22 अगस्त, 2026 तक तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की। यह कार्यक्रम संयुक्त राष्ट्र के विश्व मानव तस्करी विरोधी दिवस के अवसर पर आरआरयू के स्कूल ऑफ क्रिमिनल लॉ एंड मिलिट्री लॉ के अंतर्गत राष्ट्रीय मानव तस्करी विरोधी संसाधन केंद्र (NRCHT) द्वारा आयोजित किया गया। इस कार्यशाला में गुजरात के अलग-अलग जिलों की एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट से 41 पुलिस निरीक्षकों ने भाग लिया।
गृह मंत्रालय द्वारा संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, गुजरात में मानव तस्करी के मामलों में वर्ष 2024 में 65 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जबकि वर्ष 2023 में यह संख्या 48 थी। ये आंकड़े मानव तस्करी के मामलों से निपटने के लिए पुलिस और अन्य संबंधित एजेंसियों की क्षमता को और मजबूत करने की जरूरत को बताते हैं।
तीन दिवसीय इस प्रशिक्षण में मानव तस्करी से जुड़े अलग-अलग विषयों पर जानकारी दी गई। इसमें मानव तस्करी के मामलों की जांच, पुलिस की भूमिका, कानून के तहत कार्रवाई और अपराधियों द्वारा अपनाए जा रहे नए तरीकों पर चर्चा की गई। जांच में तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल पर भी विशेष ध्यान दिया गया।
कार्यशाला की शुरुआत राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय में आयोजित उद्घाटन सत्र से हुई। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी, विशेषज्ञ और गुजरात के विभिन्न जिलों से आए पुलिस अधिकारी मौजूद रहे।
आरआरयू के कुलपति के राष्ट्रीय सुरक्षा स्टाफ अधिकारी श्री आदित्य पुरोहित ने राष्ट्रीय सुरक्षा, शिक्षा और पुलिस प्रशिक्षण के क्षेत्र में विश्वविद्यालय द्वारा किए जा रहे कार्यों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि अपराध के बदलते तरीकों से निपटने के लिए पुलिस को तकनीक, डेटा और विशेष जानकारी का सही तरीके से इस्तेमाल करना जरूरी है।

स्कूल ऑफ क्रिमिनल लॉ एंड मिलिट्री लॉ, आरआरयू के निदेशक श्री सुनील कविश्वर ने कहा कि मानव तस्करी का तरीका समय के साथ बदल रहा है। इसलिए ऐसे मामलों की जांच करने वाले पुलिस अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण देना जरूरी है। उन्होंने राष्ट्रीय मानव तस्करी विरोधी संसाधन केंद्र द्वारा किए जा रहे शोध, प्रशिक्षण और अधिकारियों के कौशल विकास से जुड़े कार्यों की जानकारी भी दी।
उन्होंने इस कार्यशाला को “टैक्टिकल लैबोरेटरी” बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य अधिकारियों को केवल किताबों और कक्षा के माध्यम से जानकारी देना नहीं है, बल्कि उन्हें वास्तविक मामलों की जांच से जुड़ी व्यावहारिक जानकारी भी देना है। उन्होंने मानव तस्करी के मामलों में डिजिटल सबूत, फोरेंसिक जांच, पैसों से जुड़े मामलों की जांच और अलग-अलग एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल के महत्व पर भी बात की।
आरआरयू के प्रो वाइस चांसलर प्रो. डॉ. कल्पेश एच. वंद्रा ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि पुलिस अधिकारियों के लिए समय-समय पर प्रशिक्षण और व्यावहारिक जानकारी बहुत जरूरी है। उन्होंने बताया कि अपराधों की जांच में तकनीक का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है और पुलिस अधिकारियों को नई तकनीकों के बारे में लगातार सीखते रहना चाहिए।
कार्यशाला में श्री अतुल कुलकर्णी, आईपीएस (सेवानिवृत्त), राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी, ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से प्रतिभागियों को संबोधित किया। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए संगठित अपराध और मानव तस्करी के मामलों की जांच तथा ऐसे मामलों में पुलिस और अन्य कानून-प्रवर्तन एजेंसियों की भूमिका के बारे में जानकारी दी।
प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को मानव तस्करी और अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध के बीच संबंध के बारे में बताया गया। इसके साथ ही, मानव तस्करी के मामलों की बेहतर जांच के तरीके और प्रभावी जांच की रणनीतियों पर भी चर्चा की गई।
कार्यशाला में यह भी बताया गया कि मानव तस्करी के मामलों में केवल पुलिस ही नहीं, बल्कि NGOs, समाज कल्याण विभाग, स्वास्थ्य विभाग, सरकारी वकील और अन्य संबंधित एजेंसियों के बीच भी बेहतर तालमेल जरूरी है। सभी एजेंसियों के साथ मिलकर काम करने से ऐसे मामलों की पहचान, जांच और रोकथाम को और बेहतर बनाया जा सकता है।
प्रशिक्षण में मानव तस्करी के मामलों में पुलिस जांच की पूरी प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी दी गई। इसमें जांच अधिकारियों के सामने आने वाली समस्याओं और उन समस्याओं से निपटने के तरीकों पर चर्चा की गई। इसके अलावा, मानव तस्करी के मामलों में फोरेंसिक जांच और बाल तस्करी को रोकने में पुलिस की भूमिका पर भी विशेष सत्र आयोजित किए गए।

कार्यशाला के व्यावहारिक हिस्से के तहत पुलिस अधिकारियों को आरआरयू की आधुनिक ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT) लैब भी दिखाई गई। वहां अधिकारियों को लाइव डेमो के जरिए बताया गया कि इंटरनेट और अन्य सार्वजनिक स्रोतों से उपलब्ध जानकारी का इस्तेमाल पुलिस जांच में किस तरह किया जा सकता है। तकनीक आधारित अलग-अलग टूल्स के इस्तेमाल के बारे में भी जानकारी दी गई।
कार्यशाला के दौरान अलग-अलग जिलों से आए पुलिस अधिकारियों को विशेषज्ञों के साथ बातचीत करने और अपने काम के अनुभव साझा करने का अवसर मिला। अधिकारियों ने मानव तस्करी के मामलों की जांच के दौरान सामने आने वाली चुनौतियों पर चर्चा की। साथ ही, ऐसे मामलों की पहचान, जांच और रोकथाम को बेहतर बनाने के लिए जरूरी कदमों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय और राष्ट्रीय मानव तस्करी विरोधी संसाधन केंद्र इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से मानव तस्करी के मामलों से निपटने वाले पुलिस अधिकारियों की क्षमता बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य पुलिस अधिकारियों को जरूरी जानकारी, तकनीकी समझ और व्यावहारिक प्रशिक्षण देना है, ताकि मानव तस्करी के मामलों की बेहतर पहचान, प्रभावी जांच और रोकथाम की जा सके और इसके खिलाफ काम करने वाली अलग-अलग एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल बनाया जा सके।***
(रिलीज़ आईडी: 2302257) आगंतुक पटल : 13